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आवास की आस में दुनिया छोड़ गया मुल्कीराज
Updated Fri, 16 Nov 2018 12:09 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
थानाभवन। कच्ची दीवारें, कमजोर कड़ियों के झुग्गीनुमा मकान में जिंदगी काट रहे 65 वर्षीय बीमार मुल्कीराज का प्रधानमंत्री आवास योजना में पक्का घर बनवाने का सपना था। आवेदन भी किया था, लेकिन उसकी ये अंतिम इच्छा भी पूरी नहीं हो सकी और उसने दम तोड़ दिया। पूूरे क्षेत्र में ये मामला चर्चाओं में है।
मोहल्ला खैल निवासी मुल्कीराज दस साल पहले तक टेप रिकार्डिंग की कैसेट में गाने भरने का काम करता था। मनोरंजन के आधुनिक संसाधनों की होड़ लगी तो टेप रिकार्डिंग का जमाना पुराना हो गया। इसका परिणाम ये हुआ कि मुल्कीराज का रोजगार ठप हो गया और वह आर्थिक तंगी के कगार पर आ खड़ा हुआ। फिलहाल स्थिति ये थी कि एक बेटा हरिद्वार में मजदूरी करता है तो पत्नी एक स्कूल में चपरासी है। आर्थिक तंगी ने ही मुल्कीराज को बीमार कर दिया। घर की हालत भी खस्ताहाल हो गई। केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना ने मुल्कीराज को भी आस जगाई। उसे लगा कि उसका अपने घर का सपना पूरा होगा। इसके लिए आवेदन किया, लेकिन पात्रों की सूची में नाम शामिल न किए जाने से उसकी आस फिर से निराशा में बदल गई। इसके बाद मुल्की ने तमाम अधिकारियों के यहां चक्कर लगाए। खूब तर्क दिए कि उसका मकान भी सूची में शामिल हो जाए। मगर, उसके प्रयास पूरे होने से पहले ही उसने दुनिया ही छोड़ दी। लगातार बीमार चल रहे मुल्की ने दो दिन पहले दम तोड़ दिया।
भौतिक निरीक्षण के बाद इस मामले की जांच कराई जाएगी कि पहली सूची में आखिर मुल्कीराज का मकान क्यों शामिल नहीं किया गया। यदि पात्रता हुई तो जल्द उसके परिवार को इस योजना का लाभ दिलाने के हर संभव प्रयास होंगे। - रवि यादव, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत
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थानाभवन। कच्ची दीवारें, कमजोर कड़ियों के झुग्गीनुमा मकान में जिंदगी काट रहे 65 वर्षीय बीमार मुल्कीराज का प्रधानमंत्री आवास योजना में पक्का घर बनवाने का सपना था। आवेदन भी किया था, लेकिन उसकी ये अंतिम इच्छा भी पूरी नहीं हो सकी और उसने दम तोड़ दिया। पूूरे क्षेत्र में ये मामला चर्चाओं में है।
मोहल्ला खैल निवासी मुल्कीराज दस साल पहले तक टेप रिकार्डिंग की कैसेट में गाने भरने का काम करता था। मनोरंजन के आधुनिक संसाधनों की होड़ लगी तो टेप रिकार्डिंग का जमाना पुराना हो गया। इसका परिणाम ये हुआ कि मुल्कीराज का रोजगार ठप हो गया और वह आर्थिक तंगी के कगार पर आ खड़ा हुआ। फिलहाल स्थिति ये थी कि एक बेटा हरिद्वार में मजदूरी करता है तो पत्नी एक स्कूल में चपरासी है। आर्थिक तंगी ने ही मुल्कीराज को बीमार कर दिया। घर की हालत भी खस्ताहाल हो गई। केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना ने मुल्कीराज को भी आस जगाई। उसे लगा कि उसका अपने घर का सपना पूरा होगा। इसके लिए आवेदन किया, लेकिन पात्रों की सूची में नाम शामिल न किए जाने से उसकी आस फिर से निराशा में बदल गई। इसके बाद मुल्की ने तमाम अधिकारियों के यहां चक्कर लगाए। खूब तर्क दिए कि उसका मकान भी सूची में शामिल हो जाए। मगर, उसके प्रयास पूरे होने से पहले ही उसने दुनिया ही छोड़ दी। लगातार बीमार चल रहे मुल्की ने दो दिन पहले दम तोड़ दिया।
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भौतिक निरीक्षण के बाद इस मामले की जांच कराई जाएगी कि पहली सूची में आखिर मुल्कीराज का मकान क्यों शामिल नहीं किया गया। यदि पात्रता हुई तो जल्द उसके परिवार को इस योजना का लाभ दिलाने के हर संभव प्रयास होंगे। - रवि यादव, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत
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