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Shamli News: घर-घर विराजे लड्डू गोपाल, कान्हा की सेवा-शृंगार में जुटीं महिलाएं
Fri, 04 Sep 2026 01:05 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Fri, 04 Sep 2026 01:05 AM IST
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कान्हा जी के साथ सोनाली। महिला
शामली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर घरों में विराजमान लड्डू गोपाल के जन्मोत्सव की तैयारियां शुरू हो गई हैं। महिलाएं कान्हा के लिए नए वस्त्र, आभूषण और भोग की तैयारी में जुटी हैं। कई परिवारों में लड्डू गोपाल वर्षों से घर के सदस्य की तरह पूजे जा रहे हैं।
मां से प्रेरणा लेकर पांच साल से कर रहीं सेवा
कुड़ाना निवासी सोनिया ने बताया कि उनकी मां को लड्डू गोपाल उपहार में मिले थे। वह बचपन से अपनी मां को कान्हा की सेवा करते देखती थीं। मां से मिली प्रेरणा के बाद उन्होंने भी लड्डू गोपाल की सेवा शुरू कर दी। वह पिछले पांच वर्षों से नियमित रूप से कान्हा की सेवा कर रही हैं और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानती हैं।
पति की मृत्यु के बाद कान्हा को माना भाई
बरलाजट निवासी इंद्रेश पिछले आठ वर्षों से लड्डू गोपाल की सेवा कर रही हैं। पति की मृत्यु के बाद कान्हा उनकी आस्था और दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गए। वह लड्डू गोपाल को भाई की तरह मानती हैं।
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जहां जाती हैं, कान्हा को साथ ले जाती हैं
बरलाजट निवासी देवरानी संयोगिता और जेठानी मुनेश करीब दस वर्षों से लड्डू गोपाल की सेवा कर रही हैं। दोनों का कहना है कि कान्हा को घर में अकेला छोड़ना उन्हें अच्छा नहीं लगता। इसलिए यात्रा के दौरान भी लड्डू गोपाल को अपने साथ रखती हैं।
शादी के बाद मां ने भेंट किए थे लड्डू गोपाल
कुड़ाना निवासी सोनाली ने बताया कि करीब 15 वर्ष पहले उनकी मां ने उन्हें लड्डू गोपाल भेंट किए थे। तभी से कान्हा उनके घर में विराजमान हैं। वह उन्हें भाई की तरह मानती हैं और प्रतिदिन उनकी सेवा व देखभाल करती हैं।
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मां से प्रेरणा लेकर पांच साल से कर रहीं सेवा
कुड़ाना निवासी सोनिया ने बताया कि उनकी मां को लड्डू गोपाल उपहार में मिले थे। वह बचपन से अपनी मां को कान्हा की सेवा करते देखती थीं। मां से मिली प्रेरणा के बाद उन्होंने भी लड्डू गोपाल की सेवा शुरू कर दी। वह पिछले पांच वर्षों से नियमित रूप से कान्हा की सेवा कर रही हैं और उन्हें परिवार के सदस्य की तरह मानती हैं।
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पति की मृत्यु के बाद कान्हा को माना भाई
बरलाजट निवासी इंद्रेश पिछले आठ वर्षों से लड्डू गोपाल की सेवा कर रही हैं। पति की मृत्यु के बाद कान्हा उनकी आस्था और दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गए। वह लड्डू गोपाल को भाई की तरह मानती हैं।
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जहां जाती हैं, कान्हा को साथ ले जाती हैं
बरलाजट निवासी देवरानी संयोगिता और जेठानी मुनेश करीब दस वर्षों से लड्डू गोपाल की सेवा कर रही हैं। दोनों का कहना है कि कान्हा को घर में अकेला छोड़ना उन्हें अच्छा नहीं लगता। इसलिए यात्रा के दौरान भी लड्डू गोपाल को अपने साथ रखती हैं।
शादी के बाद मां ने भेंट किए थे लड्डू गोपाल
कुड़ाना निवासी सोनाली ने बताया कि करीब 15 वर्ष पहले उनकी मां ने उन्हें लड्डू गोपाल भेंट किए थे। तभी से कान्हा उनके घर में विराजमान हैं। वह उन्हें भाई की तरह मानती हैं और प्रतिदिन उनकी सेवा व देखभाल करती हैं।

कान्हा जी के साथ सोनाली। महिला