{"_id":"5a550a884f1c1b40198b5c5a","slug":"61515522696-shamli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंजूरी के बाद ही शुरु हो गई थी नियमों के पालन की कवायद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंजूरी के बाद ही शुरु हो गई थी नियमों के पालन की कवायद
Updated Wed, 10 Jan 2018 12:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामली जिले को शामिल कराने के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने चार दिसंबर को नई दिल्ली में हुई बैठक में प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। अब एनसीआर के मुताबिक एनजीटी के नियमों का पालन करने के लिहाज से जिले में समिति का गठन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई विशेष प्रोजेक्ट शामली जिले को नहीं मिल पाया है।
शामली जिले को एनसीआर में शामिल कराने की मांग बीते छह वर्षों से चल रही थी। तत्कालीन जिलाधिकारी एनपी सिंह और फिर सुजीत कुमार के समय में 24 पन्नों की रिपोर्ट तैयार करके प्रदेश सरकार को भेजी गई थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने भी शामली को एनसीआर में शामिल कराने संबंधी प्रस्ताव एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के समक्ष भेजा था। वहीं, चार दिसंबर को नई दिल्ली में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक हुई थी, जिसमें शामली को एनसीआर में शामिल कराने को मंजूरी दे दी गई थी। उसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि एनसीआर में शामिल होने पर शामली जिले में विकास को पंख लगेंगे। औद्योगिक विकास होगा तथा नए प्रोजेक्ट आएंगे, मगर अभी तक उसका कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि एनसीआर में शामिल होने की वजह से ही शामली जिले में एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) के नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए समिति का गठन भी हो चुका है, जिसमें उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पुलिस, प्रशासन, एआरटीओ, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग से अधिकारियों को शामिल किया गया है।
विज्ञापन
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में शामली जिले को शामिल कराने के लिए एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने चार दिसंबर को नई दिल्ली में हुई बैठक में प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। अब एनसीआर के मुताबिक एनजीटी के नियमों का पालन करने के लिहाज से जिले में समिति का गठन भी हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई विशेष प्रोजेक्ट शामली जिले को नहीं मिल पाया है।
शामली जिले को एनसीआर में शामिल कराने की मांग बीते छह वर्षों से चल रही थी। तत्कालीन जिलाधिकारी एनपी सिंह और फिर सुजीत कुमार के समय में 24 पन्नों की रिपोर्ट तैयार करके प्रदेश सरकार को भेजी गई थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने भी शामली को एनसीआर में शामिल कराने संबंधी प्रस्ताव एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के समक्ष भेजा था। वहीं, चार दिसंबर को नई दिल्ली में एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक हुई थी, जिसमें शामली को एनसीआर में शामिल कराने को मंजूरी दे दी गई थी। उसके बाद उम्मीद की जा रही थी कि एनसीआर में शामिल होने पर शामली जिले में विकास को पंख लगेंगे। औद्योगिक विकास होगा तथा नए प्रोजेक्ट आएंगे, मगर अभी तक उसका कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि एनसीआर में शामिल होने की वजह से ही शामली जिले में एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) के नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए समिति का गठन भी हो चुका है, जिसमें उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पुलिस, प्रशासन, एआरटीओ, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी, वन विभाग, स्वास्थ्य विभाग से अधिकारियों को शामिल किया गया है।
विज्ञापन