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दंगा विस्थापितों की कालौनी पर मंडराए संकट के बादल

Wed, 26 Dec 2018 11:49 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Dec 2018 11:49 PM IST
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दंगा विस्थापितों की कालौनी पर मंडराए संकट के बादल
305 दंगा पीड़ित परिवारों के आशियाने पर मंडराये संकट के बादल
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अमर उजाला ब्यूरो
शामली/ कैराना। वर्ष 2013 के दंगा पीड़ितों को बसाने के लिए देवबंद के एक ट्रस्ट को दान दी गई जमीन पर बैंक का लोन था। लोन ना चुकाने पर बैंक ने जमीन के मालिक को करीब 16 लाख की आरसी जारी कर दी, जिस पर तहसील प्रशासन ने मालिक और ट्रस्ट दोनों को नोटिस जारी कर दिए हैं। वर्तमान में इस जमीन पर अलफलाह कॉलोनी बसी है. जिसमें 305 दंगा पीड़ित परिवार रह रहे हैं। तहसील प्रशासन के अनुसार यदि रकम वसूली नहीं होती तो जमीन की नीलामी कर वसूली हो सकती है। ऐसे में यहां रहने वाले दंगा पीड़ित परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ये मामला सुर्खियों में है।
वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर और शामली में हुए दंगों के बाद कई मुस्लिम परिवार गांव छोड़कर चले गए थे। ये लोग इधर उधर डेरा डालकर रहने लगे थे। देवबंद स्थित तैय्यब ट्रस्ट दंगा पीड़ितों की मदद को आगे आया था। वर्ष 2014 में खुरगान निवासी हाजी दिलशाद ने दंगा पीड़ितों को बसाने के लिए ट्रस्ट को 21 बीघा जमीन तैय्यब ट्रस्ट को दान में दी। इस पर ट्रस्ट ने मकान बनाकर वहां 305 दंगा पीड़ित परिवारों को बसाया। इस कालोनी का नाम अलफलाह कालोनी रखा। ये परिवार तभी से यहां बसे थे। अब इस प्रकरण में नया मोड़ आया गया है। नायब तहसीलदार कोमिंद्र गुप्ता के अनुसार ट्रस्ट को दान दी गई जमीन पर जमीन के मालिक ने लोन लिया हुआ है। बैंक ने 16 लाख रुपये बकाया बताकर तहसील प्रशासन को आरसी जारी की गई। इस आरसी पर जमीन के मालिक हाजी दिलशाद और ट्रस्ट दोनों को नोटिस भेजकर अवगत करा दिया गया है। उनसे बैंक के लोन की रकम अदा कराने को कहा गया है।
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..तो मुश्किल में आ जाएंगे दंगा पीड़ित
नायब तहसीलदार कोमिंद्र गुप्ता के अनुसार पहले तहसील प्रशासन बकायेदार को नोटिस भेजकर रकम जमा कराने को कहता है। आरसी की रकम में 10 प्रतिशत वसूली शुल्क तहसील का होता है। यदि रकम जमा नहीं कराई जाती तो तहसील प्रशासन द्वारा संपत्ति को कुर्क कर उसकी नीलामी के माध्यम से वसूली करता है। चूंकि इस मसले में जमीन पर लोन लिया गया है। ऐसे में वसूली ना होने पर जमीन कुर्क हो सकती है यदि ये नौबत आती है तो यहां रहने वाले दंगा पीड़ितों के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
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कोट
लंबे समय से नहीं जमा की किस्त : प्रबंधक
बैंक प्रबंधक के अनुसार हाजी दिलशाद ने 2011 में एक ट्रैक्टर पर लोन लिया था। इसी लोन की रकम और ब्याज काफी दिनों से जमा नहीं कराया गया। ये रकम अब करीब 16 लाख हो गई है। इसी रकम की वसूली के लिए तहसील को आरसी भेजी गई है।
कोट
2014 में उनके ट्रस्ट को दिलशाद द्वारा 21 बीघा जमीन दान में दी गई थी। जहां पर उनके द्वारा विस्थापितों के लिए मकान तामीर कराए गए थे। अब उन्हें पता चला कि उक्त भूमि पर बैंक से ऋण लिया हुआ है। उन्होंने दिलशाद और बैंक से संपर्क किया है। मसला सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।

मौलाना अनस , ट्रस्टी, तैय्यब ट्रस्ट
कोट
बैंक की आरसी पर दिलशाद और ट्रस्ट को नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे बैंक की रकम जमा कराने को कहा गया है। यदि रकम जमा नहीं होती तो नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
कोमिंद्र गुप्ता नायब तहसीलदार
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