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प्रभु अपने भक्तों का करते है कल्याण
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:14 AM IST
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प्रभु अपने भक्तों का करते है कल्याण
जलालाबाद(शामली)। भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने शिव के ग्यारहवें अवतार हनुमान का अवतार सुनाया। उन्होंने बताया कि प्रभु अपने भक्तों का कल्याण करने के लिए कोई भी रूप धारण कर लेता है।
कस्बे के गांधी चौक मैदान में हो रही मास पारायण शिव महापुराण कथा में कथा व्यास स्वामी विवेकानंद ने कहा कि भस्मासुर ने को भोलेनाथ ने वरदान दे दिया कि जिस पर भी तुम अपना हाथ रखोगे, वह भस्म हो जाएगा। भस्मासुर ने अपना हाथ भगवान के सिर पर रखना चाहा। भोलेनाथ दौड़ने लगे तो विष्णु भगवान ने मोहनी रूप धारण कर नृत्य करना शुरू कर दिया। उधर, भस्मासुर ने मोहनी नारी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। भस्मासुर नृत्य करने लगा और उसी का हाथ उसके सिर पर पहुंचा और वह वहीं भस्म होकर जल गया।
शिव ने देखा कि संकट के समय विष्णु भगवान ने उनकी रक्षा की, तो उन्होंने कहा कि विष्णु मैं भी संकट के समय आपका यह ऋण उतारूंगा। जब विष्णु ने राम का अवतार लिया, शिव ने हनुमान बनकर उनकी सेवा की। राम को शिव अपना ईष्ट मानकर हर समय उनकी भक्ति में डूबे रहते हैं। कार्यक्रम के अंत में भगवान शिव की आरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान पंडित राधेश्याम शर्मा, बोधराज नारंग, हर्ष नारंग, राजकुमार रूहेला, पंडित राजुकमार, राजेंद्र भगत, प्रमोद मित्तल, तिलकराम कोरी, मास्टर देवेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।
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जलालाबाद(शामली)। भगवान शिव के अनेक अवतारों का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने शिव के ग्यारहवें अवतार हनुमान का अवतार सुनाया। उन्होंने बताया कि प्रभु अपने भक्तों का कल्याण करने के लिए कोई भी रूप धारण कर लेता है।
कस्बे के गांधी चौक मैदान में हो रही मास पारायण शिव महापुराण कथा में कथा व्यास स्वामी विवेकानंद ने कहा कि भस्मासुर ने को भोलेनाथ ने वरदान दे दिया कि जिस पर भी तुम अपना हाथ रखोगे, वह भस्म हो जाएगा। भस्मासुर ने अपना हाथ भगवान के सिर पर रखना चाहा। भोलेनाथ दौड़ने लगे तो विष्णु भगवान ने मोहनी रूप धारण कर नृत्य करना शुरू कर दिया। उधर, भस्मासुर ने मोहनी नारी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। भस्मासुर नृत्य करने लगा और उसी का हाथ उसके सिर पर पहुंचा और वह वहीं भस्म होकर जल गया।
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शिव ने देखा कि संकट के समय विष्णु भगवान ने उनकी रक्षा की, तो उन्होंने कहा कि विष्णु मैं भी संकट के समय आपका यह ऋण उतारूंगा। जब विष्णु ने राम का अवतार लिया, शिव ने हनुमान बनकर उनकी सेवा की। राम को शिव अपना ईष्ट मानकर हर समय उनकी भक्ति में डूबे रहते हैं। कार्यक्रम के अंत में भगवान शिव की आरती की गई और प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान पंडित राधेश्याम शर्मा, बोधराज नारंग, हर्ष नारंग, राजकुमार रूहेला, पंडित राजुकमार, राजेंद्र भगत, प्रमोद मित्तल, तिलकराम कोरी, मास्टर देवेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।
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