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दरगाह पर लगने वाले उर्स का आठ लाख रूपये का ठेका छोड़ा गया
Updated Sat, 08 Sep 2018 11:25 PM IST
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दरगाह पर लगने वाले उर्स का आठ लाख रुपये का ठेका छोड़ा गया
झिंझाना।
कसबे में इमाम साहब की दरगाह पर लगने वाले उर्स व साल भर काटी जाने वाली बेड़ियों का ठेका दरगाह के सज्जादे ने आठ लाख रुपये में छोड़ा गया है।
कस्बे में ऐतिहासिक दरगाह हजरत इमाम सैयद महमूद सब्जवारी की दरगाह में हर वर्ष उर्स का आयोजन होता है। इस वर्ष लगने वाला 852 वा उर्स है। दरगाह की मान्यता यह है। कि जिन लोगों को मिरगी के दौरे पड़ते हैं, उनके पैरों में इमाम साहब के नाम की बेड़ियां बांधी। ठीक होने पर काटी जाती है। दरगाह के सज्जादे नशीन सफदर अली ने बताया कि वर्ष 2018 से 19 के आठ लाख रुपयों का ठेका बेड़ियां काटने व बांधने का छोड़ा गया है। वर्ष 2017, 18 में ठेके के सात लाख 90 हजार रुपये में छोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि ठेके की धनराशि से दरगाह के रखरखाव के अलावा कुछ प्रतिशत धन राशी वक्फ बोर्ड को भेजी जाती है। इस वर्ष दरगाह पर 852वा उर्स लगाया जा रहा है।
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झिंझाना।
कसबे में इमाम साहब की दरगाह पर लगने वाले उर्स व साल भर काटी जाने वाली बेड़ियों का ठेका दरगाह के सज्जादे ने आठ लाख रुपये में छोड़ा गया है।
कस्बे में ऐतिहासिक दरगाह हजरत इमाम सैयद महमूद सब्जवारी की दरगाह में हर वर्ष उर्स का आयोजन होता है। इस वर्ष लगने वाला 852 वा उर्स है। दरगाह की मान्यता यह है। कि जिन लोगों को मिरगी के दौरे पड़ते हैं, उनके पैरों में इमाम साहब के नाम की बेड़ियां बांधी। ठीक होने पर काटी जाती है। दरगाह के सज्जादे नशीन सफदर अली ने बताया कि वर्ष 2018 से 19 के आठ लाख रुपयों का ठेका बेड़ियां काटने व बांधने का छोड़ा गया है। वर्ष 2017, 18 में ठेके के सात लाख 90 हजार रुपये में छोड़ा गया था। उन्होंने बताया कि ठेके की धनराशि से दरगाह के रखरखाव के अलावा कुछ प्रतिशत धन राशी वक्फ बोर्ड को भेजी जाती है। इस वर्ष दरगाह पर 852वा उर्स लगाया जा रहा है।