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एनसीआर में शामिल ईट भट्ठो का अस्तिव खतरें
Updated Wed, 06 Dec 2017 11:46 PM IST
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शामली। एनसीआर में शामिल होने के बाद शामली जिले में ईट भट्ठा कारोबारियों में खलबली मच गई है। कारण है कि एनसीआर में शामिल होने के बाद एनजीटी के आदेश पर पुराने ढर्रे पर चल रहे ईंट भट्ठे बंद करने पड़ेंगे। अगले साल से आधुनिक तकनीक जिगजैग वाले ईंट भट्ठे लगाने पड़ेंगे। नई तकनीक से ईट भट्ठे स्थापित करने में 40 लाख रुपये की लागत आएगी।
एनसीआर में शामली जिले को शामिल करने की घोषणा होने से जिले के 150 ईंट भट्ठा कारोबारियों में खलबली मच गई है। इन ईट भट्ठा कारोबारियों के सामने यह परेशानी आ गई है कि पुुरानी तकनक से चल रहे ईंट भट्ठे इस साल बंद हो जाएगे। नियम के अनुसार एनसीआर में शामिल जिलों में नई तकनीक के प्रदूषण मुक्त हाई ड्राफ्ट जिगजैग ईट भट्ठे लगाए जाएंगे। जिला ईट निर्माता समिति के अध्यक्ष और ईंट भट्ठा कारोबारी भूपेंद्र मलिक के मुताबिक पुराने तकनीक के ईट भट्ठा लगाने में 10 से लेकर 12 लाख रुपये खर्च हुआ है। यह पैसा खत्म हो चुका है। नई तकनीक के ईंट भट्ठे लगाने के लिए कम कम से प्रत्येक ईट भट्ठा कारोबारी को 40 लाख रुपये खर्च करने होंगे। एक ईट भट्ठा कारोबारी के पास 40 लाख रुपये की धनराशि होना संभव नहीं है। इसके लिए बैंकों से कर्जा लेना होगा। एनसीआर में शामिल जिलों के लिए एनजीटी ने कारोबारियों को एक साल में नई तकनीक के ईट भट्ठे लगाने का समय दिया है।
उधर, ईट भट्ठा कारोबारियाें के मुताबिक नई तकनीक के ईट भट्ठे लगाने के लिए कम कम से छह माह लगेंगे। उन्होंने इसके लिए तीन साल की अवधि मांगी है। इसके अलावा 30 से लेकर 40 लाख रुपये के कर्जा दस साल के लिए प्रत्येक कारोबारियों को बैंकों से सस्ती दरों पर दिलाने की भी मांग की है।
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बिहार और दूसरे प्रांतों से मंगानी पड़ेगी लेबर
शामली। ईट भट्ठा कारोबारियों के मुताबिक नई तकनीक के ईंट भट्ठे लगाने के लिए बिहार से एडवांस धनराशि देकार लेबर मंगानी पड़ेगी। जनरेटर की व्यवस्था करनी होगी। नए ईंट भट्ठों पर प्रदूषण खत्म होगा, जिनका संचालन कोयले को पीस कर किया जाएगा।
ईट भट्ठों की जनपद वार डाटा
जिला ईट भट्ठा की संख्या
शामली 150
मुजफ्फरनगर 350
मेरठ 200
गाजियाबाद 400
बागपत 300
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एनसीआर में शामली जिले को शामिल करने की घोषणा होने से जिले के 150 ईंट भट्ठा कारोबारियों में खलबली मच गई है। इन ईट भट्ठा कारोबारियों के सामने यह परेशानी आ गई है कि पुुरानी तकनक से चल रहे ईंट भट्ठे इस साल बंद हो जाएगे। नियम के अनुसार एनसीआर में शामिल जिलों में नई तकनीक के प्रदूषण मुक्त हाई ड्राफ्ट जिगजैग ईट भट्ठे लगाए जाएंगे। जिला ईट निर्माता समिति के अध्यक्ष और ईंट भट्ठा कारोबारी भूपेंद्र मलिक के मुताबिक पुराने तकनीक के ईट भट्ठा लगाने में 10 से लेकर 12 लाख रुपये खर्च हुआ है। यह पैसा खत्म हो चुका है। नई तकनीक के ईंट भट्ठे लगाने के लिए कम कम से प्रत्येक ईट भट्ठा कारोबारी को 40 लाख रुपये खर्च करने होंगे। एक ईट भट्ठा कारोबारी के पास 40 लाख रुपये की धनराशि होना संभव नहीं है। इसके लिए बैंकों से कर्जा लेना होगा। एनसीआर में शामिल जिलों के लिए एनजीटी ने कारोबारियों को एक साल में नई तकनीक के ईट भट्ठे लगाने का समय दिया है।
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उधर, ईट भट्ठा कारोबारियाें के मुताबिक नई तकनीक के ईट भट्ठे लगाने के लिए कम कम से छह माह लगेंगे। उन्होंने इसके लिए तीन साल की अवधि मांगी है। इसके अलावा 30 से लेकर 40 लाख रुपये के कर्जा दस साल के लिए प्रत्येक कारोबारियों को बैंकों से सस्ती दरों पर दिलाने की भी मांग की है।
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बिहार और दूसरे प्रांतों से मंगानी पड़ेगी लेबर
शामली। ईट भट्ठा कारोबारियों के मुताबिक नई तकनीक के ईंट भट्ठे लगाने के लिए बिहार से एडवांस धनराशि देकार लेबर मंगानी पड़ेगी। जनरेटर की व्यवस्था करनी होगी। नए ईंट भट्ठों पर प्रदूषण खत्म होगा, जिनका संचालन कोयले को पीस कर किया जाएगा।
ईट भट्ठों की जनपद वार डाटा
जिला ईट भट्ठा की संख्या
शामली 150
मुजफ्फरनगर 350
मेरठ 200
गाजियाबाद 400
बागपत 300