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कुम्हारी कला को नहीं होगा मिट्टी का अभाव
Updated Tue, 26 Jun 2018 01:04 AM IST
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कुम्हारी कला के लिए नहीं होगा मिट्टी का अभाव
शामली।
कुम्हारी कला के लिए मिट्टी न मिलने की समस्या का जल्द ही समाधान हो जाएगा। राजस्व परिषद ने निर्णय लिया है कि कुम्हारी कला से जुड़े लोगों को आसामी पट्टे आवंटित किए जाएंगे, ताकि कुम्हारी कला के लिए आसानी से मिट्टी उपलब्ध हो सके।
दरअसल, कुम्हारी कला के तहत मिट्टी के बर्तन और अन्य उत्पाद बनाने के लिए चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है, जो तालाब और पोखरों से मिलती है। शासन तक ऐसी सूचनाएं पहुंच रही थी कि कुम्हारी कला के लिए मिट्टी मिल पाने में कठिनाई आ रही है, जिस कारण कुम्हारी कला व्यवसाय करने वालों को दिक्कत हो रही है। प्रदेश सरकार ने कुम्हारी कला योजना को प्रोत्साहित करने के लिए निर्देश दिया। इसी के चलते कुम्हारी कला को प्रोत्साहित करने एवं कुम्हार जाति तथा इस व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को मिट्टी प्राप्त करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय हुआ।
राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव लीना जोहरी ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि भूमि प्रबंधक समिति के अधिकार क्षेत्र एवं प्रबंधन में आने वाली ऐसी भूमि जहां कुम्हारी कला कार्य हेतु मिट्टी उपलब्ध हो, उसके आसामी पट्टे आवंटित किए जाएंगे। यह पट्टा 10 वर्ष की अवधि के लिए दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि ग्राम सभा क्षेत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा गठित कुम्हार सहकारी समितियों को वरीयता से पट्टा आवंटन किया जाएगा। जहां समिति का गठन नहीं है, वहां गठन किया जाएगा। जिन गांवों में समितियां गठित करना व्यवहारिक नहीं है, वहां उपलब्ध भूमि के क्षेत्रफल तथा संबंधित गांव के कुम्हारों की संख्या को देखते हुए प्रत्येक को पट्टे आवंटित किए जाएंगे। यह भी कहा गया है कि जिन स्थानों का उपयोग कुम्हारी कला के लिए मिट्टी निकालने के रूप में होता है, उन स्थानों को चकबंदी प्रक्रिया के तहत निजी जोत में शामिल न किया जाए। अपर जिलाधिकारी केबी सिंह ने बताया कि राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव का पत्र प्राप्त हो गया है, उस पर अमल कराया जाएगा।
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शामली।
कुम्हारी कला के लिए मिट्टी न मिलने की समस्या का जल्द ही समाधान हो जाएगा। राजस्व परिषद ने निर्णय लिया है कि कुम्हारी कला से जुड़े लोगों को आसामी पट्टे आवंटित किए जाएंगे, ताकि कुम्हारी कला के लिए आसानी से मिट्टी उपलब्ध हो सके।
दरअसल, कुम्हारी कला के तहत मिट्टी के बर्तन और अन्य उत्पाद बनाने के लिए चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है, जो तालाब और पोखरों से मिलती है। शासन तक ऐसी सूचनाएं पहुंच रही थी कि कुम्हारी कला के लिए मिट्टी मिल पाने में कठिनाई आ रही है, जिस कारण कुम्हारी कला व्यवसाय करने वालों को दिक्कत हो रही है। प्रदेश सरकार ने कुम्हारी कला योजना को प्रोत्साहित करने के लिए निर्देश दिया। इसी के चलते कुम्हारी कला को प्रोत्साहित करने एवं कुम्हार जाति तथा इस व्यवसाय से जुड़े व्यक्तियों को मिट्टी प्राप्त करने के लिए भूमि उपलब्ध कराने का निर्णय हुआ।
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राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव लीना जोहरी ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि भूमि प्रबंधक समिति के अधिकार क्षेत्र एवं प्रबंधन में आने वाली ऐसी भूमि जहां कुम्हारी कला कार्य हेतु मिट्टी उपलब्ध हो, उसके आसामी पट्टे आवंटित किए जाएंगे। यह पट्टा 10 वर्ष की अवधि के लिए दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि ग्राम सभा क्षेत्र में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा गठित कुम्हार सहकारी समितियों को वरीयता से पट्टा आवंटन किया जाएगा। जहां समिति का गठन नहीं है, वहां गठन किया जाएगा। जिन गांवों में समितियां गठित करना व्यवहारिक नहीं है, वहां उपलब्ध भूमि के क्षेत्रफल तथा संबंधित गांव के कुम्हारों की संख्या को देखते हुए प्रत्येक को पट्टे आवंटित किए जाएंगे। यह भी कहा गया है कि जिन स्थानों का उपयोग कुम्हारी कला के लिए मिट्टी निकालने के रूप में होता है, उन स्थानों को चकबंदी प्रक्रिया के तहत निजी जोत में शामिल न किया जाए। अपर जिलाधिकारी केबी सिंह ने बताया कि राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव का पत्र प्राप्त हो गया है, उस पर अमल कराया जाएगा।
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