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कुंभकरण- मेघनाथ युद्ध में मारे गए, सलोचना हुई सती
Updated Sun, 01 Oct 2017 12:08 AM IST
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शामली। हनुमानधाम स्थित रामलीला रंगमंच पर कुंभकरण-मेघनाद वध व सुलोचना सती की लीला का मंचन किया गया।
शुक्रवार की देर रात हनुमान धाम के श्रीरामलीला रंगमंच पर कलाकारों द्वारा गणेश वंदना और आरती के बाद लीला का मंचन शुरू हुआ। रावण ढोल- नगाड़ों से कुुुंभकरण को जगाता है। छह माह पूरा होने से पूर्व नींद से जगाने का रावण से कारण पूछता है। रावण आपातकाल की सूचना देकर सूर्पणखा के नाक कटने के बाद से लेकर युद्ध काल तक की घटना की जानकारी देता है। ब्रह्मा की वाणी की जानकारी देकर कुंभकरण रावण को बताता है कि ब्रह्म का अवतार हो चुका है, तुम्हें याद नहीं, सीता के रूप में जिसका हरण किया है। वह साक्षात मां जगदंबा हैं। वह सीता को श्रीराम को सौंपकर उनसे संधि के लिए कहते हैं। कुंभकरण की बात सुनकर रावण भड़क जाता है। वह कुंभकरण को एक भाई का दूसरे भाई का फर्ज बताकर युद्ध के लिए तैयार करता हैं। रावण से आशीर्वाद लेकर कुुुंभकरण युद्ध के लिए प्रस्थान करता है।
युद्ध भूमि में राम की आज्ञा लेकर कुंभकरण को समझाने के लिए विभीषण जाता है। कुंभकरण को देखकर विभीषण उन्हें समझाता है। वह श्रीराम से मित्रता कर ले तो लंका का राजा बनाने का न्योता देता है। कुुुंभकरण कहता है कि वह देश की आन के लिए श्रीराम से युद्ध करेगा। विभीषण कहता है कि उसे लंकेश ने राज दरबार में अपमान कर देश निकाला दिया है। विभीषण वापस आता है। श्रीराम- कुंभकरण युद्ध होता है। कुंभकरण युद्ध में मारा जाता है। रावण के महल में हाहाकार मच जाता है। मंदोदरी रावण को समझाती है, किंतु युद्ध के लिए मेघनाद प्रस्थान करता है। लक्ष्मण-मेघनाद के बीच युद्ध होता है। मेघनाथ लक्ष्मण के ऊपर ब्रहमा, शिवजी व नारायण अस्त्र का प्रयोग करता है। सभी लक्ष्मण की परिक्रमा करके लौट जाते है। युद्ध छोड़कर वह रावण को सारी जानकारी देकर कहता है कि राम-लक्ष्मण नारायण के अवतार हैं, किंतु मेघनाद को नसीहत देकर अकेला युद्ध करने की बात कहता है। मेघनाद नारायण के हाथों मरने की बात कहकर युद्ध भूमि में पुन: प्रस्थान करता है। युद्ध में लक्ष्मण के हाथों मारा जाता हैं।
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शुक्रवार की देर रात हनुमान धाम के श्रीरामलीला रंगमंच पर कलाकारों द्वारा गणेश वंदना और आरती के बाद लीला का मंचन शुरू हुआ। रावण ढोल- नगाड़ों से कुुुंभकरण को जगाता है। छह माह पूरा होने से पूर्व नींद से जगाने का रावण से कारण पूछता है। रावण आपातकाल की सूचना देकर सूर्पणखा के नाक कटने के बाद से लेकर युद्ध काल तक की घटना की जानकारी देता है। ब्रह्मा की वाणी की जानकारी देकर कुंभकरण रावण को बताता है कि ब्रह्म का अवतार हो चुका है, तुम्हें याद नहीं, सीता के रूप में जिसका हरण किया है। वह साक्षात मां जगदंबा हैं। वह सीता को श्रीराम को सौंपकर उनसे संधि के लिए कहते हैं। कुंभकरण की बात सुनकर रावण भड़क जाता है। वह कुंभकरण को एक भाई का दूसरे भाई का फर्ज बताकर युद्ध के लिए तैयार करता हैं। रावण से आशीर्वाद लेकर कुुुंभकरण युद्ध के लिए प्रस्थान करता है।
युद्ध भूमि में राम की आज्ञा लेकर कुंभकरण को समझाने के लिए विभीषण जाता है। कुंभकरण को देखकर विभीषण उन्हें समझाता है। वह श्रीराम से मित्रता कर ले तो लंका का राजा बनाने का न्योता देता है। कुुुंभकरण कहता है कि वह देश की आन के लिए श्रीराम से युद्ध करेगा। विभीषण कहता है कि उसे लंकेश ने राज दरबार में अपमान कर देश निकाला दिया है। विभीषण वापस आता है। श्रीराम- कुंभकरण युद्ध होता है। कुंभकरण युद्ध में मारा जाता है। रावण के महल में हाहाकार मच जाता है। मंदोदरी रावण को समझाती है, किंतु युद्ध के लिए मेघनाद प्रस्थान करता है। लक्ष्मण-मेघनाद के बीच युद्ध होता है। मेघनाथ लक्ष्मण के ऊपर ब्रहमा, शिवजी व नारायण अस्त्र का प्रयोग करता है। सभी लक्ष्मण की परिक्रमा करके लौट जाते है। युद्ध छोड़कर वह रावण को सारी जानकारी देकर कहता है कि राम-लक्ष्मण नारायण के अवतार हैं, किंतु मेघनाद को नसीहत देकर अकेला युद्ध करने की बात कहता है। मेघनाद नारायण के हाथों मरने की बात कहकर युद्ध भूमि में पुन: प्रस्थान करता है। युद्ध में लक्ष्मण के हाथों मारा जाता हैं।
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