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पानीपत-खटीमा मार्ग से एक फुट तक धंस गया कैराना यमुना पुल
Updated Mon, 10 Jul 2017 12:55 AM IST
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कैराना।
कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है और कैराना यमुना पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल के पिलर जमीन में धंस गए हैं, जिससे उसका ऊपरी हिस्सा पानीपत-खटीमा मार्ग से एक फीट नीचा हो गया। ऐसे में कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
कैराना यमुना पुल 60 के दशक में यूपी को हरियाणा, पंजाब, राजस्थान से जोड़ने के लिए करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। दस पिलर के सहारे खड़े 600 मीटर लंबे पुल को बने पांच दशक हो गए हैं। सभी पिलर और पुल के बीच बड़े बड़े शौकर लगे हैं। भारी वाहनों के आने-जाने पर शौकरों के कारण पुल में कंपन्न होता है। तीन साल पहले भी यमुना पुल के तीन पिलरों के नीचे से शौकर निकल गए थे, लेकिन बाद में नोएडा से आए इंजीनियरों उनको रिपेयर कर दिया था। इसके एक साल बाद ही पुलिस चौकी के पास पुल से जुड़ा लिंक मार्ग दो फीट नीचे धंस गया था। प्रशासन ने रोड डलवाकर उसे समतल कराया था, लेकिन कुछ माह बाद उसी स्थान से मार्ग फिर धंस गया था। इसे पीडब्लूडी के इंजीनियरों ने पुल के नीचे से लिंक मार्ग पर पत्थर लगाये तथा ऊपर से रोड़ी डाल कर मार्ग का समतल कर दिया था। दुरुस्त कर दिया था।
अब फिर यमुना पुल से लिंक मार्ग एक फिट नीचे धंस गया है। जिससे पुल के नीचे जगह-जगह दरारें आ गई हैं। पुल को सपोर्ट देने वाली साइड की दीवार में भी जगह जगह दरारें हैं। यमुना पुल पर 24 घंटे भारी वाहन गुजरते हैं। रविवार को श्रावण मास शुरू होने से अगले 11 दिन तक यमुना पुल पर कांवड़ियों का मेला लगा रहेगा। जिस स्थान से यमुना पुल की सपोर्ट वाली दीवार में दरारें आयी हैं उसके नीचे से कांवड़िये यमुना में स्नान करेंगे। पुल के हालात हादसे को न्योता दे रहे हैं। उधर, एसडीएम विजय प्रकाश तिवारी का कहना है कि पुल की मरम्मत के लिए पूर्व में भी पत्र पीडब्लूडी को लिखा जा चुका है, अब दोबारा पत्र लिखा जाएगा और पुल की मरम्मत कराई जाएगी।
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कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है और कैराना यमुना पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। पुल के पिलर जमीन में धंस गए हैं, जिससे उसका ऊपरी हिस्सा पानीपत-खटीमा मार्ग से एक फीट नीचा हो गया। ऐसे में कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है।
कैराना यमुना पुल 60 के दशक में यूपी को हरियाणा, पंजाब, राजस्थान से जोड़ने के लिए करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था। दस पिलर के सहारे खड़े 600 मीटर लंबे पुल को बने पांच दशक हो गए हैं। सभी पिलर और पुल के बीच बड़े बड़े शौकर लगे हैं। भारी वाहनों के आने-जाने पर शौकरों के कारण पुल में कंपन्न होता है। तीन साल पहले भी यमुना पुल के तीन पिलरों के नीचे से शौकर निकल गए थे, लेकिन बाद में नोएडा से आए इंजीनियरों उनको रिपेयर कर दिया था। इसके एक साल बाद ही पुलिस चौकी के पास पुल से जुड़ा लिंक मार्ग दो फीट नीचे धंस गया था। प्रशासन ने रोड डलवाकर उसे समतल कराया था, लेकिन कुछ माह बाद उसी स्थान से मार्ग फिर धंस गया था। इसे पीडब्लूडी के इंजीनियरों ने पुल के नीचे से लिंक मार्ग पर पत्थर लगाये तथा ऊपर से रोड़ी डाल कर मार्ग का समतल कर दिया था। दुरुस्त कर दिया था।
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अब फिर यमुना पुल से लिंक मार्ग एक फिट नीचे धंस गया है। जिससे पुल के नीचे जगह-जगह दरारें आ गई हैं। पुल को सपोर्ट देने वाली साइड की दीवार में भी जगह जगह दरारें हैं। यमुना पुल पर 24 घंटे भारी वाहन गुजरते हैं। रविवार को श्रावण मास शुरू होने से अगले 11 दिन तक यमुना पुल पर कांवड़ियों का मेला लगा रहेगा। जिस स्थान से यमुना पुल की सपोर्ट वाली दीवार में दरारें आयी हैं उसके नीचे से कांवड़िये यमुना में स्नान करेंगे। पुल के हालात हादसे को न्योता दे रहे हैं। उधर, एसडीएम विजय प्रकाश तिवारी का कहना है कि पुल की मरम्मत के लिए पूर्व में भी पत्र पीडब्लूडी को लिखा जा चुका है, अब दोबारा पत्र लिखा जाएगा और पुल की मरम्मत कराई जाएगी।
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