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क्षमा जीव का सबसे बड़ा आभूषण
Updated Thu, 27 Sep 2018 12:22 AM IST
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शामली। दशलक्षण पर्व के बाद में क्षमावाणी पर्व पर आयोजित धर्मसभा में जैन संत विज्ञान सागर महाराज ने कहा कि संसार में प्रत्येक प्राणी को क्षमा नहीं करोगे, तब तक जीव के मोक्ष नहीं प्राप्त होगा। जीव को प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी होगी।
बुधवार को शहर के तालाब रोड स्थित जैन धर्मशाला में श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर से दशलक्षण पर्व के समापन के बाद क्षमावाणी पर्व पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के अध्यक्ष जेके जैन, शामली के प्रसिद्ध उद्योगपति जेेेके जैन क्षमावाणी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उपस्थित जैन समाज के लोगों से गलतियों की क्षमा याचना मांगी। जैन संत विज्ञान सागर महाराज ने कहा कि क्षमा जीव का सबसे बड़ा आभूषण है। संसार में प्रत्येक प्राणी को क्षमा नही करोंगे, तब तक जीव के मोक्ष नही प्राप्त होगा। जीव को प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी होगी। जीव की जितनी लड़ाई है, वह सभी नफरत से हो रही है। जीव जैैसा कर्म करेगा, वैसे ही फल उसे मिलेगा। जीव के सभी रिश्ते हैं वह वह परमात्मा तय करता है। यह विधि विधान का नियम है। जीव को सुख-दुख, रिश्ते- नाते परमात्मा से बनते है। जीव को दूसरे जीव से छल नहीं करना चाहिए, जो गलती करके जीव जीवन में सुधार ले वही इंसान है। मां का सबसे बड़ा रिश्ता है। मां के रिश्ते का जीव को सम्मान करना होगा। मौके पर श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के अध्यक्ष जेके जैन, महामंत्री अनिल जैन, कोषाध्यक्ष प्रवीण जैन, वीरेश जैन, अरविंद, श्रीपाल जैन, प्रोफेसर एमसी जैन, अरुण जैन, सतेंद्र जैन, प्रवीण जैन, कनिष्क जैन, सुशील जैन, मोहित जैन आदि मौजूूूद रहे।
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बुधवार को शहर के तालाब रोड स्थित जैन धर्मशाला में श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर से दशलक्षण पर्व के समापन के बाद क्षमावाणी पर्व पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के अध्यक्ष जेके जैन, शामली के प्रसिद्ध उद्योगपति जेेेके जैन क्षमावाणी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उपस्थित जैन समाज के लोगों से गलतियों की क्षमा याचना मांगी। जैन संत विज्ञान सागर महाराज ने कहा कि क्षमा जीव का सबसे बड़ा आभूषण है। संसार में प्रत्येक प्राणी को क्षमा नही करोंगे, तब तक जीव के मोक्ष नही प्राप्त होगा। जीव को प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी होगी। जीव की जितनी लड़ाई है, वह सभी नफरत से हो रही है। जीव जैैसा कर्म करेगा, वैसे ही फल उसे मिलेगा। जीव के सभी रिश्ते हैं वह वह परमात्मा तय करता है। यह विधि विधान का नियम है। जीव को सुख-दुख, रिश्ते- नाते परमात्मा से बनते है। जीव को दूसरे जीव से छल नहीं करना चाहिए, जो गलती करके जीव जीवन में सुधार ले वही इंसान है। मां का सबसे बड़ा रिश्ता है। मां के रिश्ते का जीव को सम्मान करना होगा। मौके पर श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के अध्यक्ष जेके जैन, महामंत्री अनिल जैन, कोषाध्यक्ष प्रवीण जैन, वीरेश जैन, अरविंद, श्रीपाल जैन, प्रोफेसर एमसी जैन, अरुण जैन, सतेंद्र जैन, प्रवीण जैन, कनिष्क जैन, सुशील जैन, मोहित जैन आदि मौजूूूद रहे।
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