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विश्व जल दिवस : भावलखेड़ा और ददरौल के गांवों का पानी काफी ज्यादा हानिकारक

Tue, 22 Mar 2022 11:07 AM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर
अमर उजाला नेटवर्क, शाहजहांपुर Published by: बरेली ब्यूरो Updated Tue, 22 Mar 2022 11:07 AM IST
सार

पृथ्वी संस्था के सचिव व एसएस कॉलेज के शिक्षक आलोक कुमार सिंह बताते हैं कि वर्ष 2021 में पृथ्वी संस्था ने भावलखेड़ा और ददरौल ब्लॉक के लालपुर, बंथरा, खानपुर समेत दस गांवों से जल के 34 सैंपल लिए थे।

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world water day : water pollution in bhawalkhera and dadraul
फाइल फोटो - फोटो : istock

विस्तार

शाहजहांपुर में लगातार बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण के साथ ही पानी भी शुद्ध नहीं रहा है। गला तर करने के लिए नल के जिस पानी को हम शुद्ध समझकर पी रहे हैं, वह सही मायने में अशुद्ध है। शहर और उसके आसपास के इलाकों में पानी की शुद्धता पर सवालिया निशान लगा है। गत वर्ष पृथ्वी संस्था ने पानी का सैंपल लेकर जांच की तो यह बात सामने आई। भावलखेड़ा और ददरौल के दस गांवों के जल की जांच में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा मानक से तीन से चार गुना ज्यादा मिली है। वहीं शहर क्षेत्र में पानी में आयरन की मात्रा ज्यादा है।

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पृथ्वी संस्था के सचिव व एसएस कॉलेज के शिक्षक आलोक कुमार सिंह बताते हैं कि वर्ष 2021 में पृथ्वी संस्था ने भावलखेड़ा और ददरौल ब्लॉक के लालपुर, बंथरा, खानपुर समेत दस गांवों से जल के 34 सैंपल लिए थे। पानी की जांच फोटोमीटर यंत्र से करने के बाद पानी में आर्सेनिक और फ्लोराइड की मात्रा मानक से तीन से चार गुना ज्यादा मिली है।
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फ्लोराइडयुक्त पानी के सेवन से दांत पीले और पैदा होने वाले बच्चों की हड्डी टेढ़ी हो जाती है। जबकि आर्सेनिक से शरीर में त्वचा का कैंसर और किडनी फेल होने जैसी समस्या होती है। इसी तरह शहर में बाबा विश्वनाथ मंदिर, घंटाघर, हनुमतधाम व उसके आसपास के 17 हैंड पंपों के पानी का सैंपल लिया गया। शहर में बरेली मोड़ से गर्रा नदी तक पानी में आयरन की मात्रा ज्यादा है। आयरन ज्यादा होने से शरीर में विभिन्न तरह के रोग दिक्कतें पैदा होती हैं। जबकि शहर के अंदर कई जगहों पर फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा है।

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वर्षा का जल संचयन कराने को रूफ वॉटर हार्वेस्टिग का होगा निर्माण

शाहजहांपुर में बारिश का पानी उचित जल प्रबंधन न होने के कारण व्यर्थ चला जाता है। जिसके चलते लगातार जलस्तर गिर रहा। बारिश के जल को संचयन करने और गिरते हुए जलस्तर को बचाने के लिए जीएफ कॉलेज ने कदम उठाया। 2019 में वर्षा जल संचयन रिचार्ज पिट के तहत दो टैंकों का निर्माण कराने के बाद अब रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग के जरिये जल संरक्षित करने की तैयारी है।



पांच सितंबर 2019 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के निर्देश के बाद जीएफ कॉलेज में वर्षा के जल को संरक्षित करने के लिए दो टैंक का निर्माण कराया गया था। प्राचार्य डॉ. तारिक अहमद ने बताया कि आधे महाविद्यालय के छतों और इसके अतिरिक्त अन्य भाग का पानी क्षेत्रफल के हिसाब से बनाए गए एक टैंक में जाता है। उसके बाद पानी साफ होकर दूसरे टैंक से गुजरते हुए जमीन के नीचे बोरिंग द्वारा पहुंच जाता है। गिरते हुए जलस्तर और कॉलेज के बड़े आकार को देखते हुए एक और रूफ वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कराया जाएगा। जल्द ही काम को शुरू कराया दिया जाएगा।

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