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परशुराम धाम के रामताल तक आने-जाने को लोनिवि बनाएगा अलग-अलग मार्ग
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जलालाबाद स्थित रामताल व उसके किनारे बनी सीढियां। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। मंदिर के पौराणिक रामताल तक श्रद्धालुओं के पहुंचने के लिए आवागमन और सुगम बनाया जाएगा। इसके लिए लोक निर्माण विभाग ने वहां तक आने जाने के लिए दो अलग-अलग रास्ते बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। ऐसे में आने वाले समय में रामताल तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक मार्ग मिलेगा।
जलालाबाद में परशुराम धाम के सौंदर्यीकरण का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा कराने को लोनिवि मंत्री जितिन प्रसाद कई माह से प्रयासरत हैं। इस कड़ी में उन्होंने जलालाबाद के परशुराम धाम को पर्यटन स्थल घोषित कराया। साथ ही दो राजमार्गों से जोड़ने वाला रास्ता बनाने को 2.28 करोड़ का बजट भी स्वीकृत हो चुका। इस कड़ी में मंदिर के पास पौराणिक महत्व के रामताल तक श्रद्धालुओं का आवागमन सुगम बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने दो अलग-अलग रास्ते बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह मार्ग 900-900 मीटर के कुल 1.8 किलोमीटर लंबे और सात मीटर चौड़े बनेंगे। इस पर 2.35 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम ने आतताइयों का संहार करने के बाद अपना रक्तरंजित फरसा इसी ताल में फेंका था और तभी से उसका रंग लाल है। रामताल के प्रति लोगों की इतनी श्रद्धा है कि खास मौकों पर वहां उनकी भीड़ उमड़ने से गलीनुमा संकुचित रास्ते पर चलना कठिन हो जाता है। श्रद्धालुओं की इसी कठिनाई को देखते लोनिवि ने वहां तक आने-जाने के लिए अलग-अलग मार्ग बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। लोनिवि अभियंताओं के अनुसार करीब सात मीटर चौड़े इन दोनों मार्गों की लंबाई 900-900 मीटर होगी और उनके निर्माण पर 2.35 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। इनमेें से एक मार्ग श्रद्धालुओं के आने और दूसरा जाने के लिए निर्धारित किया जाएगा। इन मार्गों के बीच में 3.75 मीटर हिस्सा बजरी-कोलतार पेंट से निर्मित होगा और उसके दोनों ओर फुटपाथों पर इंटरलॉकिंग कराए जाने की योजना है। मार्ग निर्माण का प्रस्ताव बनाने से पहले लोक निर्माण ने क्षेत्र का पूरा सर्वे करा लिया है। प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और उसे जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
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गंगा एक्सप्रेस-वे से परशुराम धाम जोड़ने की योजना
सब कुछ ठीक रहा तो भविष्य में परशुराम धाम मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जाएगा। लोनिवि अभियंताओं के अनुसार अभी गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसलिए परशुराम धाम से एक्सप्रेस-वे तक पहुंच मार्ग का प्रस्ताव लंबित है। जलालाबाद में परशुराम धाम के दायीं ओर ऊपर से एक्सप्रेस-वे फ्लाईओवर की तरह निकाले जाने की योजना है। आगे जाकर एक्सप्रेस-वे जलालाबाद-शाहजहांपुर मार्ग (लिपुलेख-भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग) को क्रॉस करके जहां उतरेगा, वहां से धाम की निकटतम दूरी तक पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे। इस तरह कालांतर में परशुराम धाम पर्यटन स्थल प्रदेश के पश्चिमी हिस्से से लेकर पूर्वांचल तक सीधे जुड़ जाएगा।
मार्ग निर्माण से पहले हटाने होंगे अवैध कब्जे
परशुराम धाम पर्यटन स्थल घोषित होने के तीन माह बाद भी मंदिर से जुड़े रामताल के अवैध कब्जे प्रशासन नहीं हटवा सका है। परशुराम मंदिर के ठीक सामने करीब 70 बीघा रकबा वाला यह तालाब सरकारी अभिलेखों में रामताल के नाम से दर्ज है। इसके दक्षिण व पश्चिम में बस्ती के लोगो ने ताल को पाटकर पक्के निर्माण कर लिए हैं। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर होने के बाद एसडीएम के आदेश पर गठित राजस्व टीम ने रामताल की नाप करके अवैध कब्जों को चिह्नित किया था। बाद में 18 नवंबर 2019 को 18 कब्जेदारों को नोटिस जारी कर लाल निशान लगा दिए गए। तब से तीन-चार बार प्रशासन नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं होने से वहां कब्जे जस के तस हैं। लोगों का कहना है कि रामताल को कब्जा मुक्त कराने के बाद ही वहां से नई रोड बनाई जा सकती है। इस रोड के बन जाने से मंदिर तक बड़े वाहनों की पहुंच आसान हो जाएगी। फिलहाल, मंदिर तक आने जाने का रास्ता काफी संकरा होने से वहां चार पहिया वाहन पहुंचना मुश्किल है।
जलालाबाद में परशुराम मंदिर से जुड़ा सरोवर (रामताल) काफी पुराना और रमणीक है। उसके सौंदर्यीकरण कार्य को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ही वहां तक लोगों केे आने-जाने को अगल-अलग रास्ते बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है जो कि स्वीकृति की प्रक्रिया में है। प्रस्तावित मार्ग के हिस्से में आड़े आने वाले अवैध कब्जे हटाने के बारे में जलालाबाद के तहसीलदार से बात हो चुकी है और वहां से अतिक्रमण जल्द हटाए जाएंगे। गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद परशुराम धाम से वहां तक जाने के लिए पहुंच मार्ग का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
-राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (निर्माण खंड-1)
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जलालाबाद में परशुराम धाम के सौंदर्यीकरण का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा कराने को लोनिवि मंत्री जितिन प्रसाद कई माह से प्रयासरत हैं। इस कड़ी में उन्होंने जलालाबाद के परशुराम धाम को पर्यटन स्थल घोषित कराया। साथ ही दो राजमार्गों से जोड़ने वाला रास्ता बनाने को 2.28 करोड़ का बजट भी स्वीकृत हो चुका। इस कड़ी में मंदिर के पास पौराणिक महत्व के रामताल तक श्रद्धालुओं का आवागमन सुगम बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने दो अलग-अलग रास्ते बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह मार्ग 900-900 मीटर के कुल 1.8 किलोमीटर लंबे और सात मीटर चौड़े बनेंगे। इस पर 2.35 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम ने आतताइयों का संहार करने के बाद अपना रक्तरंजित फरसा इसी ताल में फेंका था और तभी से उसका रंग लाल है। रामताल के प्रति लोगों की इतनी श्रद्धा है कि खास मौकों पर वहां उनकी भीड़ उमड़ने से गलीनुमा संकुचित रास्ते पर चलना कठिन हो जाता है। श्रद्धालुओं की इसी कठिनाई को देखते लोनिवि ने वहां तक आने-जाने के लिए अलग-अलग मार्ग बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। लोनिवि अभियंताओं के अनुसार करीब सात मीटर चौड़े इन दोनों मार्गों की लंबाई 900-900 मीटर होगी और उनके निर्माण पर 2.35 करोड़ रुपये व्यय होने का अनुमान है। इनमेें से एक मार्ग श्रद्धालुओं के आने और दूसरा जाने के लिए निर्धारित किया जाएगा। इन मार्गों के बीच में 3.75 मीटर हिस्सा बजरी-कोलतार पेंट से निर्मित होगा और उसके दोनों ओर फुटपाथों पर इंटरलॉकिंग कराए जाने की योजना है। मार्ग निर्माण का प्रस्ताव बनाने से पहले लोक निर्माण ने क्षेत्र का पूरा सर्वे करा लिया है। प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है और उसे जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
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गंगा एक्सप्रेस-वे से परशुराम धाम जोड़ने की योजना
सब कुछ ठीक रहा तो भविष्य में परशुराम धाम मेरठ से प्रयागराज तक प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेस-वे से भी जोड़ा जाएगा। लोनिवि अभियंताओं के अनुसार अभी गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इसलिए परशुराम धाम से एक्सप्रेस-वे तक पहुंच मार्ग का प्रस्ताव लंबित है। जलालाबाद में परशुराम धाम के दायीं ओर ऊपर से एक्सप्रेस-वे फ्लाईओवर की तरह निकाले जाने की योजना है। आगे जाकर एक्सप्रेस-वे जलालाबाद-शाहजहांपुर मार्ग (लिपुलेख-भिंड राष्ट्रीय राजमार्ग) को क्रॉस करके जहां उतरेगा, वहां से धाम की निकटतम दूरी तक पहुंच मार्ग बनाए जाएंगे। इस तरह कालांतर में परशुराम धाम पर्यटन स्थल प्रदेश के पश्चिमी हिस्से से लेकर पूर्वांचल तक सीधे जुड़ जाएगा।
मार्ग निर्माण से पहले हटाने होंगे अवैध कब्जे
परशुराम धाम पर्यटन स्थल घोषित होने के तीन माह बाद भी मंदिर से जुड़े रामताल के अवैध कब्जे प्रशासन नहीं हटवा सका है। परशुराम मंदिर के ठीक सामने करीब 70 बीघा रकबा वाला यह तालाब सरकारी अभिलेखों में रामताल के नाम से दर्ज है। इसके दक्षिण व पश्चिम में बस्ती के लोगो ने ताल को पाटकर पक्के निर्माण कर लिए हैं। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर होने के बाद एसडीएम के आदेश पर गठित राजस्व टीम ने रामताल की नाप करके अवैध कब्जों को चिह्नित किया था। बाद में 18 नवंबर 2019 को 18 कब्जेदारों को नोटिस जारी कर लाल निशान लगा दिए गए। तब से तीन-चार बार प्रशासन नोटिस जारी कर चुका है, लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं होने से वहां कब्जे जस के तस हैं। लोगों का कहना है कि रामताल को कब्जा मुक्त कराने के बाद ही वहां से नई रोड बनाई जा सकती है। इस रोड के बन जाने से मंदिर तक बड़े वाहनों की पहुंच आसान हो जाएगी। फिलहाल, मंदिर तक आने जाने का रास्ता काफी संकरा होने से वहां चार पहिया वाहन पहुंचना मुश्किल है।
जलालाबाद में परशुराम मंदिर से जुड़ा सरोवर (रामताल) काफी पुराना और रमणीक है। उसके सौंदर्यीकरण कार्य को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ही वहां तक लोगों केे आने-जाने को अगल-अलग रास्ते बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है जो कि स्वीकृति की प्रक्रिया में है। प्रस्तावित मार्ग के हिस्से में आड़े आने वाले अवैध कब्जे हटाने के बारे में जलालाबाद के तहसीलदार से बात हो चुकी है और वहां से अतिक्रमण जल्द हटाए जाएंगे। गंगा एक्सप्रेस-वे बनने के बाद परशुराम धाम से वहां तक जाने के लिए पहुंच मार्ग का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
-राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (निर्माण खंड-1)