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पीढ़ी दर पीढ़ी राखी बनाने का काम कर रहे हैं तिलहर के कई परिवार

Fri, 05 Aug 2022 01:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 05 Aug 2022 01:09 AM IST
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Tilhar's family is making Rakhi from generation to generation
ेजय - फोटो : SHAHJAHANPUR
लोकेश आर्य
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तिलहर (शाहजहांपुर)। कई स्थानीय परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी राखी बनाने काम चला आ रहा है। यहां पुराने प्रचलन की राखियों से लेकर फैंसी राखियां तक बनाई जाती हैं। साल भर धागा बिक्री का काम करने वाले परिवारों की राखियां दूसरे जिलों में भी बिक्री को जाती हैं। शाहजहांपुर के अलावा पीलीभीत, बदायूं, बरेली तथा आसपास के कस्बों और देहात के फुटकर व्यापारी यहां आकर राखी की खरीदारी करते हैं। हालांकि महंगाई की मार ने राखी कारोबार को प्रभावित किया है। नगर के मोहल्ला पक्का कटरा में पटवा बिरादरी के लोग इस कारोबार में बरसों से जुटे हैं।
बुजुर्ग राजेंद्र और कृपाराम पटवा ने बताया कि उनके बुजुर्गों से राखी बनाने का काम चला आ रहा है। लगभग आधा दर्जन से अधिक परिवार रक्षाबंधन आने के लगभग दो ढाई माह पहले ही राखी बनाना शुरू कर देते हैं। घरों पर ही यह काम चलता रहता है। इसमें परिवार की महिलाएं और बच्चे भी हाथ बंटाते हैं। साल के अन्य दिनों में धागे का काम होता है।
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राजेंद्र पटवा ने बताया कि राखी बनाने का मैटेरियल अहमदाबाद, कोलकाता और दिल्ली से लाया जाता है। राखी व्यापारी अजय, संजीव, अरविंद, रविंद्र ने बताया कि राखी व्यापार पर महंगाई का असर पड़ा है। पिछले वर्षों से इस वर्ष लगभग दस प्रतिशत महंगाई है। बताया कि प्राचीन समय से हाथ पर बांधे जाने वाले सोख्ते के रक्खे (बड़ी राखी) का प्रचलन धीरे-धीरे शहरी क्षेत्र में लगभग समाप्त हो गया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में इसका आज भी जारी है।
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सोख्ता का एक दर्जन का पत्ता थोक में पांच से दस रुपये में बिकता है। इसके अलावा फैंसी राखी 20 और 25 रुपये दर्जन थोक में जाती हैं। बताया कि अधिकतम दो सौ रुपये दर्जन की फैंसी राखी बनाते हैं। बाजार में फुटकर मूल्य पर ये राखियां महंगे दामों पर बिकती हैं। संवाद
राखी बनाने का काम बरसों पुराना है। महंगाई से राखी का कारोबार प्रभावित हुआ है। अन्य दिनों में धागे का काम चलता है। राजेंद्र पटवा
हमारे परिवार में राखी बनाने का काम बुजुर्गों से चला आ रहा है। शाहजहांपुर, निगोही, कांट, खुदागंज से आने वाले व्यापारी थोक में राखियों की खरीदारी करते हैं। - कृपाराम पटवा

जब छोटा था तभी राखी बनाने का काम सीख गया था। अन्य दिनों में बाजार में दुकानें लगाकर परिवार की गुजर-बसर करते हैं। - अजय पटवा
सभी तरह की राखी हम लोग बनाते हैं। कारोबार पहले से प्रभावित हुआ है। अभी खूब बिक्री शुरू नहीं हुई है। उम्मीद है दो-तीन दिन में बिक्री बढ़ेगी। - अरविंद पटवा

अरविंद

अरविंद- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

राजेंद्र पटवा

राजेंद्र पटवा- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

कृपाराम

कृपाराम- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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