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राष्ट्रद्रोहियों के खिलाफ छात्र शक्ति ने किया तिरंगा मार्च

Wed, 24 Feb 2016 08:30 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Wed, 24 Feb 2016 08:30 PM IST
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The tri -state power against the student in March
जेएनयू प्रकरण में राष्ट्र विरोधी तत्वों से नरमी बरते जाते को लेकर हिंदूवादी संगठनों से जुड़े छात्रों का बुधवार को धैर्य जवाब दे गया। इन छात्रों ने सिर पर भगवा पट्टियां बांधीं और हाथों में तिरंगा लेकर चौक और टाउन हाल स्थित आरएसएस कार्यालय से जुलूस निकालकर घंटाघर पर गोलबंद हुए। वहां से छात्र जुलूस के रूप में देश भक्ति के नारे लगाते हुए अंटा चौराहा और जेल रोड होकर कलक्ट्रेट पहुंचे। इस मौके पर छात्र शक्ति संगठन की ओर से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को दिया गया। इसमें जेएनयू में देश विरोधी घटनाक्रम के दोषियों को फांसी देने की मांग की गई।
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प्रदर्शन में शामिल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भाजपा छात्र मोर्चा के कार्यकर्ताओं का एक जत्था छोटा चौक और दूसरा जत्था टाउन हाल के संघ भवन में इकट्ठा हुआ। तमाम कार्यकर्ता घरों से तिरंगे साथ लेकर आए। उन्होंने सिर पर भगवा पट्टियां बांधी और तिरंगे लहराते हुए दोनों जत्थे घंटाघर की ओर बढ़ चले। वहां एकजुट हुई छात्रशक्ति का जोश देखने लायक था।
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घंटाघर से छात्रों का समूह देशद्रोही तत्वों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अंटा चौराहा पहुंचा और जेल रोड होकर कलक्ट्रेट गेट तक मार्च किया। वहां पहले से मौजूद पुलिस बल ने उन्हें रोक लिया। इस पर छात्र वहीं धरने पर बैठ गए और सभा शुरू कर दी। इस मौके पर अभाविप नेता राजकमल वाजपेयी ने कहा कि दिल्ली में हुई राष्ट्र विरोधी घटना से प्रत्येक छात्र आहत है।
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छात्र नेता वैभव खन्ना ने कहा कि जेएनयू के छात्र नेता सिर्फ मोहरा बनाए गए, इन राष्ट्र विरोधी घटनाओं के पीछे देश का बुरा सोचने वाली बड़ी ताकतें काम कर रही हैं। रूपेश वर्मा ने देश विरोधी नारे लगाने वालों को गद्दार बताया। अंशुल त्रिवेदी ने देश का अपमान करने वालों को फांसी दिए जाने की मांग की।  

ज्ञापन में ये मांगें शामिल
छात्र शक्ति संगठन की ओर से एडीएम प्रशासन मुनेंद्र नाथ उपाध्याय को दिए ज्ञापन में राष्ट्रपति से जेएनयू में भविष्य में होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों के विनियमन के लिए आचार संहिता बनाने की मांग की गई है। इसके अलावा जेएनयू के राष्ट्र विरोधी प्रदर्शन में शामिल तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ रासुका के तहत कार्रवाई करने, जेएनयू के नियंत्रक मंडल में प्रशासनिक व न्यायिक क्षेत्र में काम करने वाले अनुभवी लोग शामिल करने आदि मांगें शामिल हैं।   


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