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चांद का दीदार होते ही रमजान महीने का आगाज, आज होगा पहला रोजा

Sun, 03 Apr 2022 01:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 03 Apr 2022 01:21 AM IST
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The sight of the moon, the beginning of the month of Ramadan, the first fasting today
शाहजहांपुर में सिंवई खरीदते मुस्लिम समाज के लोग । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। शाम को चांद के दीदार होते ही रमजान-उल-मुबारक के मुकद्दस महीने का आगाज हो गया। पूरे दिन तैयारियां होती रहीं। लोगों ने बाजार में सिंवई, सूत फेनी, कचरी-पापड़ और खजूर की खरीदारी की। चांद दिखने के साथ ही तरावीह की नमाज भी शुरू हो गई।
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चांद का दीदार करने के लिए शनिवार शाम को मुस्लिम समाज के लोग छतों पर पहुंच गए। बच्चों से लेकर बड़ों तक में रोजा रखने को लेकर उत्साह नजर आया। चांद के दिखने पर सलाम करने के साथ ही दुआ की। सहरी की तैयारियां भी शुरू हो गईं। लोगों ने रोजमर्रा की चीजों की सहरी के लिए खरीदारी की। उसके बाद तरावीह की नमाज अदा करने के लिए मस्जिदों में भीड़ उमड़ पड़ी। रमजान को देखते हुए सिंवई और फेनी की दुकानें भी सज गईं। सिंवई 40 रुपये किलो और सूतफेनी 140 रुपये में खरीदी की गई।
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रमजान इबादत का महीना
रमजान संयम और खुदा की इबादत का महीना है। इस पाक महीने में इबादत बहुत असरदार होती है, इसमें खानपान का संयम होता है। गलतियों को सुधारने का मौका मिलता है। रोजा रखना सभी पर फर्ज है। काजी-ए-शहर सैयद सैफ हसन ने बताया कि रमजान में जकात देने से माल-कारोबार में बरकत होती है। मुकद्दस महीने में अल्लाह ने कुरआन शरीफ को दुनिया में भेजा था।
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बिना वजह रोजा छोड़ना सख्त गुनाह
सैयद सैफ बताते हैं कि रोजे को अरबी में सोम कहते हैं। रोजा अच्छी जिंदगी जीने का प्रशिक्षण है। रोजे के दौरान झूठ बोलना, चुगली करना, किसी पर बुरी निगाह रखना गलत है। रोजे में हर बुराई से दूर रहना जरूरी है। रोजे का असल मकसद भूख, प्यास पर नियंत्रण रखकर अल्लाह के प्रति अकीदत और सही राह पर चलने के संकल्प पर अडिग रहना है।
रोजे का शुमार उन फर्ज इबादत में होता है, जिन पर इस्लाम की बुनियाद कायम है। उन्होंने बताया कि सहरी के बाद से दिन भर खाना-पीना छोडने और बुरी बातों से बचने का नाम ही रोजा है। रमजान का रोजा हर मुसलमान आकील और बालिग पर फर्ज है। बिना किसी वजह से रोजा छोड़ना सख्त गुनाह है।
डीएम कंपाउंड मस्जिद में दस दिन में कुरआन होगा मुकम्मल
डीएम कंपाउंड स्थित मस्जिद में हुई बैठक में राय मशविरा कर तय किया कि मस्जिद में दस दिन में कुरआन सुनाकर नमाज-ए-तरावीह को मुकम्मल किया जाएगा। मौलाना अनीस ने बताया कि तरावीह की नमाज हाफिज सद्दाम हुसैन पढ़ाएंगे। इशा की नमाज सवा आठ बजे होगी। फरहान अली, साजिद खां, सिद्दीक खां आदि मौजूद रहे।

रमजान के मुकद्दस महीने का आगाज हो गया। यह महीना रहमतों और बरकतों वाला है। इस महीने में जन्नत दरवाजे खेाल दिए जाते हैं। अल्लाह रोजेदार की दुआ को कुबूल फरमाता है। मुसलमानों से गुजारिश है कि इस मुकद्दस महीने का अहतराम करें। रोजा रखकर अल्लाह की बारगाह में अपनी और पूरी उम्मत की सलामती के लिए दुआ करें। -मौलाना हुजूर अहमद मंजरी, शहर पेश इमाम

शाहजहांपुर में खाजूर खरीदते  मुस्लिम समाज के लोग । संवाद

शाहजहांपुर में खाजूर खरीदते मुस्लिम समाज के लोग । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR

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