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भूकंप ने तो अच्छे-अच्छों को हिला दिया
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 26 Apr 2015 11:13 PM IST
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धरती डोलने का अहसास रविवार को दूसरे दिन भी शहवासियों को हुआ। चूंकि रविवार को भूकंप की गति शनिवार की अपेक्षा कमतर आंकी गई, शायद इसलिए दूसरे दिन बहुत कम लोगों को इसका अहसास हुआ। रविवार को तो लोगों में इस कदर हड़कंप मच गया था कि जिसे देखो वही अपनी हालत और हालात बयां करते घूम रहा था। मसलन जब भूकंप आया, तब कहां थे, क्या कर रहे थे, कैसा लगा, क्या किया आदि सवाल जवाब पूरे दिन चलते रहे। टीवी सेटों से चिपके लोग अपने देश के अलावा नेपाल के हालात पर चिंता जता रहे थे। आइए जानते हैं शहर के लोगों से उनके अनुभव।
कुर्सी हिली, तब लगा भूकंप है: प्रदीप
घंटाघर निवासी प्रदीप कुमार बताते हैं कि वह कुर्सी पर बैठे थे कि अचानक कुर्सी हिलने लगी, पहले तो समझ में ही नहीं आया कि क्या करें, लेकिन जब आभास हुआ कि भूकंप है, तो उन्होंने अपने साथ कई लोगों को भी घर से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया।
खुले में आना ही सुरक्षित लगा: अरविंद
कांग्रेस के युवा नेता अरविंद सिंह बताते हैं कि शनिवार को तो उन्हें चक्कर आते मालूम पड़े, जिससे वह समझ गए कि कुछ गड़बड़ है, लेकिन भूकंप का अनुमान नहीं था, बाद में पता चला तो वह खुले में निकल आए। रविवार को कोई खास अहसास नहीं हुआ।
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पहले दिन हुई बच्चों की चिंता: नीला
कर्नल एकेडमी की निदेशक नीला चौधरी बताती है कि शनिवार को भूकंप की जानकारी होने पर उन्हें बच्चों की फिक्र हुई। तत्काल टीचर्स को बुलाकर बच्चों को गली में निकाला, लेकिन रविवार को अवकाश होने के कारण चिंता कम थी और फिर झटका भी हल्का ही था।
दूसरे दिन हल्का झटका लगा: नीरज
प्राथमिक विद्यालय अजीजपुर जिगनेरा के शिक्षक नीरज मिश्र बताते हैं कि शनिवार को भूकंप के झटके अधिक चिंताजनक थे। वह घर पर खाना खा रहे थे, कि उन्हें चक्कर आने का अहसास हुआ। खाना छोड़कर वह घर से बाहर भाग खड़े हुए। रविवार को हल्का झटका मालूम पड़ा।
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कुर्सी हिली, तब लगा भूकंप है: प्रदीप
घंटाघर निवासी प्रदीप कुमार बताते हैं कि वह कुर्सी पर बैठे थे कि अचानक कुर्सी हिलने लगी, पहले तो समझ में ही नहीं आया कि क्या करें, लेकिन जब आभास हुआ कि भूकंप है, तो उन्होंने अपने साथ कई लोगों को भी घर से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया।
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खुले में आना ही सुरक्षित लगा: अरविंद
कांग्रेस के युवा नेता अरविंद सिंह बताते हैं कि शनिवार को तो उन्हें चक्कर आते मालूम पड़े, जिससे वह समझ गए कि कुछ गड़बड़ है, लेकिन भूकंप का अनुमान नहीं था, बाद में पता चला तो वह खुले में निकल आए। रविवार को कोई खास अहसास नहीं हुआ।
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पहले दिन हुई बच्चों की चिंता: नीला
कर्नल एकेडमी की निदेशक नीला चौधरी बताती है कि शनिवार को भूकंप की जानकारी होने पर उन्हें बच्चों की फिक्र हुई। तत्काल टीचर्स को बुलाकर बच्चों को गली में निकाला, लेकिन रविवार को अवकाश होने के कारण चिंता कम थी और फिर झटका भी हल्का ही था।
दूसरे दिन हल्का झटका लगा: नीरज
प्राथमिक विद्यालय अजीजपुर जिगनेरा के शिक्षक नीरज मिश्र बताते हैं कि शनिवार को भूकंप के झटके अधिक चिंताजनक थे। वह घर पर खाना खा रहे थे, कि उन्हें चक्कर आने का अहसास हुआ। खाना छोड़कर वह घर से बाहर भाग खड़े हुए। रविवार को हल्का झटका मालूम पड़ा।