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2.72 लाख किसानों का गन्ना सर्वे, 2000 हेक्टेयर बढ़ा रकबा
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शाहजहांपुर। जिले में दो माह पूर्व शुरू किया गया गन्ना सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस वर्ष कुल 96000 हेक्टेयर में किसानों ने गन्ना बुआई की है। यह रकबा गत पेराई सत्र 2020-21 की तुलना में दो हजार हेक्टेयर ज्यादा है। इसमें 54600 हेक्टेयर गन्ना और 41400 हेक्टेयर पेड़ी गन्ना शामिल है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष 2.72 लाख किसानों के खेतों का गन्ना सर्वे किया जा चुका है। सबसे ज्यादा गन्ने का क्षेत्रफल 14.50 प्रतिशत मकसूदापुर चीनी मिल क्षेत्र में बढ़ा है। रोजा मिल क्षेत्र में सिर्फ पांच प्रतिशत रकबा बढ़ा है जबकि तिलहर, निगोही और पुवायां मिल के गन्ना क्षेत्रफल मे कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने बताया कि सर्वे का काम पूरा होने के साथ अब गन्ना समितियों की सदस्यता को विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिले के किसानों के लिए नकदी फसल के तौर पर गन्ना से अधिक लाभकारी अन्य कोई फसल नहीं है। यही कारण है कि किसान गन्ने की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले वर्ष 1.80 लाख किसानों ने जिले की पांचों चीनी मिलों समेत पड़ोसी जनपदों की चार चीनी मिलों को गन्ना की आपूर्ति की थी।
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डीसीओ के अनुसार इस बार रेड रॉट बीमारी के प्रकोप के कारण 15 प्रतिशत किसानों ने पेड़ी गन्ना समाप्त कर दिया है। किसानों के इस प्रयास से आगामी फसल को रेड रॉट से बचाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि जिन गांवों में गन्ना रकबा कम हुआ है, वहां शरदकालीन गन्ना बुआई को विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने पहली बार गन्ना बोया है, उनको समिति की सदस्यता लेना जरूरी है।
इसके लिए आगामी 30 सितंबर तक समिति के सदस्य बनने की समय सीमा मुख्यालय से निर्धारित की गई है। अब तक 2500 किसानों ने समिति का सदस्य बनाने के लिए आवेदन किया है, हालांकि किसान चाहें तो समिति की ऑनलाइन सदस्यता भी ले सकते हैं।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष 2.72 लाख किसानों के खेतों का गन्ना सर्वे किया जा चुका है। सबसे ज्यादा गन्ने का क्षेत्रफल 14.50 प्रतिशत मकसूदापुर चीनी मिल क्षेत्र में बढ़ा है। रोजा मिल क्षेत्र में सिर्फ पांच प्रतिशत रकबा बढ़ा है जबकि तिलहर, निगोही और पुवायां मिल के गन्ना क्षेत्रफल मे कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम भार्गव ने बताया कि सर्वे का काम पूरा होने के साथ अब गन्ना समितियों की सदस्यता को विशेष अभियान शुरू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि जिले के किसानों के लिए नकदी फसल के तौर पर गन्ना से अधिक लाभकारी अन्य कोई फसल नहीं है। यही कारण है कि किसान गन्ने की खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले वर्ष 1.80 लाख किसानों ने जिले की पांचों चीनी मिलों समेत पड़ोसी जनपदों की चार चीनी मिलों को गन्ना की आपूर्ति की थी।
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डीसीओ के अनुसार इस बार रेड रॉट बीमारी के प्रकोप के कारण 15 प्रतिशत किसानों ने पेड़ी गन्ना समाप्त कर दिया है। किसानों के इस प्रयास से आगामी फसल को रेड रॉट से बचाया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि जिन गांवों में गन्ना रकबा कम हुआ है, वहां शरदकालीन गन्ना बुआई को विशेष अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन किसानों ने पहली बार गन्ना बोया है, उनको समिति की सदस्यता लेना जरूरी है।
इसके लिए आगामी 30 सितंबर तक समिति के सदस्य बनने की समय सीमा मुख्यालय से निर्धारित की गई है। अब तक 2500 किसानों ने समिति का सदस्य बनाने के लिए आवेदन किया है, हालांकि किसान चाहें तो समिति की ऑनलाइन सदस्यता भी ले सकते हैं।