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सर्व शिक्षा अभियान की भीग गईं किताबें
रोजा।
Updated Mon, 13 Jul 2015 11:41 PM IST
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परिषदीय स्कूलों में बच्चों को सरकार की तरफ से नि:शुुल्क वितरण की जाने वाली पुस्तकें बेहद खराब रखरखाव के कारण बरसात में भीगकर खराब हो गईं, जिससे भावलखेड़ा विकास खंड के 25 स्कूलों में आधी जुलाई बीतने के बाद भी पुस्तकों का वितरण नहीं हो सका है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत भावलखेड़ा के परिषदीय स्कूलों में पुस्तकों को वितरण करने के लिए रोजा के प्राइमरी स्कूल प्रथम में रखा गया था। यहां से हर स्कूल के प्रधानाध्यापक पुस्तकों को ले जाकर अपने विद्यालय में बच्चों को बंटवाता था।
21 जून को रोजा के प्राइमरी स्कूल प्रथम में भावलखेड़ा के परिषदीय स्कूलों की किताबे आ गई थी, लेकिन 10 जुलाई तक करीब 25 स्कूलों के प्राइमरी अनुभागों के बच्चों के प्रधानाध्यापक पुस्तकें नहीं ले जा पाए थे। 11 जुलाई को हुई भारी बरसात में स्कूल के कमरे में पानी भर गया। इससे इन स्कूलों को वितरित होने वाली किताबें भीग गईं और खराब हो र्गइं।
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पुस्तकों को भीगने की बात मीडिया में आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद खुली और आनन-फानन में भावलखेड़ा के एबीआरसी रोहिताश्व सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय संजय शुुक्ला और नगर खंड शिक्षा अधिकारी मुन्ना लाल त्रिवेदी रोजा पहुंचे और भीगीं किताबों को सुखाने का काम शुरू किया और पुस्तक न ले जाने वाले प्रधान अध्यापकों की फटकार लगाई।
परिषदीय स्कूलों में पुस्तकों के वितरण के लिए दिया जाता है बजट
सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों में पुस्तकों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा अच्छा खासा बजट दिया जाता है, लेकिन विभाग में लापरवाही के चलते इस बजट का उपयोग किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए नहीं किया जाता है और एक सेंटर बनाकर प्रधान अध्यापकों को किताबों स्वयं लेकर स्कूलों में वितरण करने के निर्देश दिए जाते हैं। यही कारण है कि अप्रैल से शुरू हुए शिक्षा सत्र में लगभग आधी जुलाई बीतने के बाद भी पुस्तकों का वितरण नहीं हो सका है। इस मामले में एबीआरसी रोहिताश्व सिंह ने बताया कि ब्लाक स्तर पर पुस्तक वितरण के लिए कोई पैसा नहीं दिया जाता है। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान के सहायक लेखाधिकारी ही कुछ बता सकते हैं। संकेत मिले हैं कि पुस्तको के वितरण में भी घालमेल हो रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के सहायक लेखाधिकारी बीपी सिंह से जब पक्ष जानने का प्रयास किया तो उन्होंने अपना मोबाइल आफ कर लिया। इस कारण उनका पक्ष नहीं रखा जा सका है।
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत भावलखेड़ा के परिषदीय स्कूलों में पुस्तकों को वितरण करने के लिए रोजा के प्राइमरी स्कूल प्रथम में रखा गया था। यहां से हर स्कूल के प्रधानाध्यापक पुस्तकों को ले जाकर अपने विद्यालय में बच्चों को बंटवाता था।
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21 जून को रोजा के प्राइमरी स्कूल प्रथम में भावलखेड़ा के परिषदीय स्कूलों की किताबे आ गई थी, लेकिन 10 जुलाई तक करीब 25 स्कूलों के प्राइमरी अनुभागों के बच्चों के प्रधानाध्यापक पुस्तकें नहीं ले जा पाए थे। 11 जुलाई को हुई भारी बरसात में स्कूल के कमरे में पानी भर गया। इससे इन स्कूलों को वितरित होने वाली किताबें भीग गईं और खराब हो र्गइं।
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पुस्तकों को भीगने की बात मीडिया में आने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नींद खुली और आनन-फानन में भावलखेड़ा के एबीआरसी रोहिताश्व सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय संजय शुुक्ला और नगर खंड शिक्षा अधिकारी मुन्ना लाल त्रिवेदी रोजा पहुंचे और भीगीं किताबों को सुखाने का काम शुरू किया और पुस्तक न ले जाने वाले प्रधान अध्यापकों की फटकार लगाई।
परिषदीय स्कूलों में पुस्तकों के वितरण के लिए दिया जाता है बजट
सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों में पुस्तकों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा अच्छा खासा बजट दिया जाता है, लेकिन विभाग में लापरवाही के चलते इस बजट का उपयोग किताबों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए नहीं किया जाता है और एक सेंटर बनाकर प्रधान अध्यापकों को किताबों स्वयं लेकर स्कूलों में वितरण करने के निर्देश दिए जाते हैं। यही कारण है कि अप्रैल से शुरू हुए शिक्षा सत्र में लगभग आधी जुलाई बीतने के बाद भी पुस्तकों का वितरण नहीं हो सका है। इस मामले में एबीआरसी रोहिताश्व सिंह ने बताया कि ब्लाक स्तर पर पुस्तक वितरण के लिए कोई पैसा नहीं दिया जाता है। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान के सहायक लेखाधिकारी ही कुछ बता सकते हैं। संकेत मिले हैं कि पुस्तको के वितरण में भी घालमेल हो रहा है। सर्व शिक्षा अभियान के सहायक लेखाधिकारी बीपी सिंह से जब पक्ष जानने का प्रयास किया तो उन्होंने अपना मोबाइल आफ कर लिया। इस कारण उनका पक्ष नहीं रखा जा सका है।