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Shahjahanpur: जिला जेल में बंद कैदी ने 10वीं की परीक्षा में हासिल किए 84 फीसदी अंक, 12वीं के लिए कर रहा मेहनत

Sun, 13 Nov 2022 10:56 AM IST
Digvijay Singh पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Sun, 13 Nov 2022 10:56 AM IST
सार

एक निचली अदालत ने 2014 में छह साल के बच्चे की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई थी। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने कहा कि अध्ययनों ने मनोज को एक पतली उम्मीद भी दी है कि उच्च न्यायालय किसी तरह उन पर दया कर सकता है।

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Shahjahanpur Prisoner in District Jail secured 84 percent marks in 10th examination
शाहजहांपुर जिला कारागार (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूपी की शाहजहांपुर जिला जेल में बंद 30 वर्षीय हत्याकांड के दोषी मनोज ने अपनी 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 84 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं और वह 12वीं कक्षा में इस अंक को और बेहतर करने की तैयारी कर रहा है। एक निचली अदालत ने 2014 में छह साल के बच्चे की हत्या के लिए मौत की सजा सुनाई थी। जेल अधीक्षक मिजाजी लाल ने कहा कि अध्ययनों ने मनोज को एक पतली उम्मीद भी दी है कि उच्च न्यायालय किसी तरह उन पर दया कर सकता है।

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मिजाजी लाल ने बताया कि वह अपने नाम के साथ जुड़े हत्यारे के टैग से परेशान है और पढ़ाई के माध्यम से इसे मिटा देना चाहता है और अपनी एक नई पहचान बनाना चाहता है। 58 महिलाओं सहित 1500 जेल के कैदियों में से 250 से अधिक नियमित रूप से अध्ययन करते हैं। जेल के छह कैदी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में भाग ले रहे हैं ताकि समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद वे आजीविका कमा सकें। 

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केवल शिक्षा ही नहीं, जिला जेल अधिकारियों ने कैदियों के लिए योग कक्षाओं की व्यवस्था की है, छोटी बीमारियों से निपटने के लिए परिसर में आयुर्वेदिक पौधे उगाए जा रहे हैं, जबकि महिला कैदियों को शाहजहांपुर के प्रसिद्ध जरदोजी कढ़ाई के काम में प्रशिक्षित किया जा रहा है। निरक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाने के लिए एक ठोस प्रयास किया जा रहा है। करीब 100 कैदी इस लक्ष्य को हासिल कर चुके हैं जबकि 100 अन्य कक्षा 5 से लेकर 10वीं तक पढ़ रहे हैं। जेल अधीक्षक ने बताया कि कक्षाएं सुबह नौ से 11 बजे तक चलती हैं जिसके लिए उनकी मांग पर बेसिक शिक्षा विभाग की एक महिला व एक पुरुष शिक्षक को उपलब्ध कराया गया है। 

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पैसे के लेन-देन के मामले में जेल में बंद सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका निरुपमा महंत महिला कैदियों की पढ़ाई में मदद करती हैं। हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कामराज आर्य इस काम में साथ दे रहे हैं। खुद M.Sc B.Ed हैं और वह कैदियों को इंटरमीडिएट कक्षाओं तक पढ़ाते हैं।

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