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एशियन गेम्स: तीन बेटियों को लेकर समाज ने सुनाए ताने, ड्राइवर पिता ने नहीं मानी हार; अब वित्या ने जीता पदक
Mon, 28 Sep 2026 11:03 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, आइची नागोया
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Mon, 28 Sep 2026 11:03 PM IST
सार
वित्या रामराज ने एशियन गेम्स 2026 में महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स में 54.75 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता और पीटी उषा का 42 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया। ड्राइवर पिता और आर्थिक तंगी के संघर्षों से निकलकर यहां तक पहुंचीं विथ्या ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय परिवार, कोच और उन्हें मिले संस्थागत सहयोग को दिया।
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वित्या रामराज
- फोटो : IANS
विस्तार
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीट वित्या रामराज ने सोमवार को महिलाओं की 400 मीटर बाधा स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता। वित्या ने 54.75 सेकंड का समय निकालकर पदक अपने नाम किया और इसी के साथ दिग्गज एथलीट पीटी उषा के 42 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
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जुड़वां बहन को समर्पित किया मेडल
कांस्य पदक जीतने के बाद वित्या ने अपनी इस उपलब्धि को जुड़वां बहन को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन हमेशा उनके साथ खड़ी रही हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करती हैं। वित्या ने अपने सफर में साथ देने के लिए सरकार और उन संस्थानों का भी आभार जताया, जिन्होंने उन्हें आर्थिक और अन्य स्तर पर सहयोग दिया।
कांस्य पदक जीतने के बाद वित्या ने अपनी इस उपलब्धि को जुड़वां बहन को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उनकी बहन हमेशा उनके साथ खड़ी रही हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी मदद करती हैं। वित्या ने अपने सफर में साथ देने के लिए सरकार और उन संस्थानों का भी आभार जताया, जिन्होंने उन्हें आर्थिक और अन्य स्तर पर सहयोग दिया।
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TOPS, राज्य सरकार, JSW और रेलवे का मिला साथ
वित्या ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), अपनी राज्य सरकार, JSW और इंडियन रेलवे के सहयोग को याद किया। उन्होंने बताया कि वह इंडियन रेलवे में काम करती हैं और इन संस्थानों के समर्थन की वजह से वह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर पा रही हैं। वित्या ने कहा कि फिलहाल उन्हें किसी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है और वह इस बात से खुश हैं।
वित्या ने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS), अपनी राज्य सरकार, JSW और इंडियन रेलवे के सहयोग को याद किया। उन्होंने बताया कि वह इंडियन रेलवे में काम करती हैं और इन संस्थानों के समर्थन की वजह से वह अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर पा रही हैं। वित्या ने कहा कि फिलहाल उन्हें किसी तरह की आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है और वह इस बात से खुश हैं।
किराए के घर में रहा परिवार, लोगों ने बेटियों को लेकर सुनाए ताने
वित्या की सफलता के पीछे परिवार के वर्षों के संघर्ष की कहानी भी है। उन्होंने बताया कि बचपन में उनका परिवार किराए के घर में रहता था। तीन बेटियों के पिता होने के कारण उनके पिता को समाज के सवालों और तानों का सामना करना पड़ता था। वित्या ने बताया कि लोग उनके पिता और दादी से तक पूछते थे कि तीन बेटियां बड़ी हो रही हैं, आगे उनका क्या करेंगे। हालांकि, परिवार ने इन बातों की परवाह किए बिना तीनों बेटियों का साथ दिया।
वित्या की सफलता के पीछे परिवार के वर्षों के संघर्ष की कहानी भी है। उन्होंने बताया कि बचपन में उनका परिवार किराए के घर में रहता था। तीन बेटियों के पिता होने के कारण उनके पिता को समाज के सवालों और तानों का सामना करना पड़ता था। वित्या ने बताया कि लोग उनके पिता और दादी से तक पूछते थे कि तीन बेटियां बड़ी हो रही हैं, आगे उनका क्या करेंगे। हालांकि, परिवार ने इन बातों की परवाह किए बिना तीनों बेटियों का साथ दिया।
ड्राइवर पिता ने 15 हजार की कमाई में बेटियों का सपना पूरा किया
वित्या के पिता ड्राइवर थे और उस समय उनकी मासिक कमाई करीब 15 हजार रुपये थी। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों के खेल के लिए जरूरी सामान जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वित्या ने बताया कि 2009 में भी अच्छे जूतों की कीमत करीब 2,000 से 5,000 रुपये तक होती थी। वह और उनकी जुड़वां बहन एक साथ दो खेल खेलती थीं, जिससे ड्रेस, जूते और दूसरे उपकरणों पर काफी खर्च आता था। इसके बावजूद उनके पिता ने इन खर्चों का इंतजाम किया।
वित्या के पिता ड्राइवर थे और उस समय उनकी मासिक कमाई करीब 15 हजार रुपये थी। आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद उन्होंने अपनी बेटियों के खेल के लिए जरूरी सामान जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वित्या ने बताया कि 2009 में भी अच्छे जूतों की कीमत करीब 2,000 से 5,000 रुपये तक होती थी। वह और उनकी जुड़वां बहन एक साथ दो खेल खेलती थीं, जिससे ड्रेस, जूते और दूसरे उपकरणों पर काफी खर्च आता था। इसके बावजूद उनके पिता ने इन खर्चों का इंतजाम किया।
कोच को था 55 सेकंड का बैरियर तोड़ने का भरोसा
वित्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच को भी दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें खुद भरोसा नहीं था कि वह 55 सेकंड के बैरियर को तोड़ पाएंगी, लेकिन उनके कोच को पूरा विश्वास था। वित्या ने कहा कि उन्हें अपने कोच पर भरोसा है और वह वर्षों से वही करती आई हैं, जो उनके कोच ने करने के लिए कहा।
वित्या ने अपनी सफलता का श्रेय अपने कोच को भी दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें खुद भरोसा नहीं था कि वह 55 सेकंड के बैरियर को तोड़ पाएंगी, लेकिन उनके कोच को पूरा विश्वास था। वित्या ने कहा कि उन्हें अपने कोच पर भरोसा है और वह वर्षों से वही करती आई हैं, जो उनके कोच ने करने के लिए कहा।
एशियन गेम्स में लगातार दूसरा मेडल
वित्या ने 2023 में हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी 400 मीटर हर्डल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। नागोया में ब्रॉन्ज जीतकर उन्होंने इस स्पर्धा में लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स पदक हासिल किया। इस एशियन गेम्स में वित्या ने मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम के साथ सिल्वर मेडल भी जीता है। इस तरह नागोया में उनके नाम अब दो पदक हो चुके हैं।
वित्या ने 2023 में हांगझोऊ एशियन गेम्स में भी 400 मीटर हर्डल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। नागोया में ब्रॉन्ज जीतकर उन्होंने इस स्पर्धा में लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स पदक हासिल किया। इस एशियन गेम्स में वित्या ने मिक्स्ड 4x400 मीटर रिले टीम के साथ सिल्वर मेडल भी जीता है। इस तरह नागोया में उनके नाम अब दो पदक हो चुके हैं।
नागोया के ट्रैक को बताया 'स्पीड ट्रैक'
वित्या ने नागोया के ट्रैक की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि उन्होंने सिंथेटिक और मोंडो ट्रैक पर दौड़ लगाई है, लेकिन नागोया का ट्रैक उन्हें थोड़ा अलग लगा। उनके मुताबिक यह एक 'स्पीड ट्रैक' है और वह इस ट्रैक से काफी खुश हैं।
वित्या ने नागोया के ट्रैक की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि उन्होंने सिंथेटिक और मोंडो ट्रैक पर दौड़ लगाई है, लेकिन नागोया का ट्रैक उन्हें थोड़ा अलग लगा। उनके मुताबिक यह एक 'स्पीड ट्रैक' है और वह इस ट्रैक से काफी खुश हैं।