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Shahjahanpur News: पुवायां का ‘गुल्ला’... कई प्रदेशों में मचा रहा हल्ला

Thu, 18 May 2023 12:52 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 18 May 2023 12:52 AM IST
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Puwayan's 'Gulla' creating ruckus in many states
पुवायां क्षेत्र में खेत में लगा खरबूजा। संवाद
पुवायां (शाहजहांपुर)। पुवायां के खरबूजा गुल्ला और मुस्कान ने उत्तराखंड और दिल्ली तक के लोगों को अपने स्वाद और मिठास का मुरीद बना लिया है। इन दिनों रोजाना पिकअप और मिनी ट्रकों से खरबूजा बाहर भेजा जा रहा है। तहसील क्षेत्र के किसान कई वर्षों से परंपरागत खेती छोड़कर नई फसलों के उत्पादन का प्रयोग कर रहे हैं।
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गुटैया क्षेत्र खेती में नए प्रयोग और नकदी वाली फसलों के लिए मशहूर हो चुका है। कभी गन्ना उत्पादन में अग्रणी रहने वाले इस क्षेत्र में अब गन्ने का रकबा नाममात्र का ही रह गया है। साठा धान पर प्रतिबंध लगने के बाद किसानों ने मक्का आदि की खेती शुरू कर दी है। अब अगर किसी फसल का रकबा लगातार बढ़ रहा है तो वह है खरबूजा। किसानों ने खीरा, तरबूज, तोरई, टमाटर आदि पर भी फोकस करना शुरू कर दिया है। गुटैया क्षेत्र के अलावा रामपुर कलां, मीरपुर, गंगाई, पकड़िया हकीम, बहादुरपुर आदि में खरबूजा, तरबूज और खीरे की लगभग 500 एकड़ में खेती की गई है।
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किसान रामलड़ैते, रामचंद्र, गोपाल आदि ने बताया कि खरबूजा का बीज आठ हजार रुपये से लेकर 32 हजार रुपये प्रति किलो तक मिलता है। एक एकड़ में चार सौ ग्राम बीज पड़ता है। खेत अगर ठेके पर लेना हो तो अप्रैल से मई तक तीन महीने के लिए 25 हजार रुपये प्रति एकड़ मिल जाता है। खरबूजे की सबसे ज्यादा मांग उत्तराखंड में है। किच्छा और ऊधम सिंह नगर के व्यापारी यहां से खरबूजा ले जाते हैं। इसके अलावा बहराइच, बरेली, नानपारा, सीतापुर आदि में भी खरबूजे की सप्लाई की जाती है। यदि फसल बढि़या हो और बारिश न हो तो तीन महीने में लगभग एक लाख रुपया प्रति एकड़ की बचत हो जाती है।
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गुल्ला की मिठास के मुरीद है लोग
खरबूज की कई किस्में पुवायां तहसील क्षेत्र में बोई जाती है। इसमें गुल्ला सबसे ज्यादा मीठा होता है। इस कारण गुल्ला का रेट भी कुछ ज्यादा रहता है। गुल्ला के बाद खरबूजे की मुस्कान किस्म की ज्यादा मांग है। सह भी काफी मीठा है। सामान्य में गंगा सतलुज, सोनपरी, कुमुद सहित कई किस्में बोई जाती हैं। सामान्य किस्मों में खरबूजा जल्दी लगने लगता है। गुल्ला थोड़ी देर से तैयार होता है।
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दिल्ली जा रहा खीरा
खीरे को पुवायां से सीधे दिल्ली की मंडी में भेजा जा रहा है। वर्तमान फसल के बाद खीरे की एक और फसल लेने की तैयारी की जा रही है। खीरा अप्रैल में तैयार हो जाता है। इसे शाहजहांपुर के अलावा खीरी, पीलीभीत और दिल्ली भेजा जाता है। दिल्ली के व्यापारी खीरा और उत्तराखंड के व्यापारी खरबूजा खेत से ही उठा लेते हैं, लेकिन अगर प्रशासन प्रयास कर शाहजहांपुर मंडी में व्यापारियों को बुलाने की व्यवस्था करे तो उपज की नीलामी होने से किसानों को अधिक लाभ हो सकता है।
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सरकार प्रयास करे तो बढ़ सकती है खेती
खीरा, तरबूज, खरबूजा, तोरई आदि की खेती का काम बेहद कच्चा है। जरा सी बारिश पॉलेज को भारी नुकसान पहुंचा देती है। इसके अलावा पॉलेज में लगने वाले झुलसा, मकड़ी सहित तमाम रोग इसे भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इससे बचने के लिए फसल में लगातार कीटनाशक दवाओं को स्प्रे करना पड़ता है। तीन महीने में लगभग 90 स्प्रे हो जाते हैं। स्प्रे करने वाली दवाएं काफी महंगी होने के कारण इस पर भारी खर्चा आता है। दवाओं को अनुदान पर दिए जाने से किसानों को काफी राहत मिल सकती है और खीरा, खरबूजा की खेती को बढ़वा मिल सकता है। इसकी खेती बढ़ने से साठा धान का क्षेत्रफल कम होने से भूगर्भीय जल संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।
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तमाम लोगों को मिलता है रोजगार
खीरा, खरबूजा, तोरई आदि की खेती से तमाम लोगों को रोजगार मिलता है। बहुत से युवा खेत से खीरा, खरबूजा खरीदकर रोड के किनारे ठेला लगाकर बिक्री कर बढि़या मुनाफा कमा लेते हैं। सुरेश कुमार, पुवायां

शाहजहांपुर में बने मंडी
खरबूजा किसानों और खेत ठेके पर लेकर करने वालों को ठीक रकम दे जाता है। इस कारण इसकी खेती लगातार बढ़ रही है। शाहजहांपुर में मंडी बननी चाहिए।- रामचंद्र, पुवायां
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