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राजकीय मेडिकल कॉलेज बना, सभी बीमारियों के डॉक्टर भी नहीं मिल सके
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शाहजहांपुर का मेडिकल कॉलेज ।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। जनपद की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के उद्देश्य से जिला अस्पताल से राजकीय मेडिकल कॉलेज बने हुए तीन वर्ष बीत चुके हैं। उसके बाद भी गंभीर बीमारियों का उपचार करने वाले डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होने से मरीजों को दिक्कतों से जूझना पड़ रहा। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। स्त्री रोग, बाल रोग और त्वचा रोग विभाग में डॉक्टरों की नियुक्ति न होने से मरीजों को भटकना पड़ रहा है। साथ ही न्यूरो और किडनी रोगों के विशेषज्ञ नहीं हैं।
बरेली मोड़ स्थित जिला अस्पताल को तीन साल पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज के रूप में बदलाव कर दिया गया था। कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के प्रयास से मेडिकल कॉलेज बनने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में थोड़ा सा परिवर्तन हुआ, लेकिन गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जनपद में लाभ मिलना संभव नहीं हो सका। वजह यह है कि जनपद में करीब 22 पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है।
मुख्य पद पर रिक्त होने से आ रही परेशानी
राजकीय मेडिकल कॉलेज में 45 डाक्टर कार्यरत हैं, जबकि 22 पद खाली पड़े हैं। अधिकतर में मेन आचार्य और सह आचार्य के पद रिक्त पड़े हैं। क्लीनिकल स्टाफ में स्त्री प्रसूति में दो, मद्य निषेद विभाग में तीन, मेडिसीन में एक, बाल रोग विशेषज्ञ में दो, मानसिक रोग विभाग और नेत्र रोग विभाग में दो-दो पद खाली पड़े हैं। सीनियर डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर रोगियों को रेफर करना पड़ता है।
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300 बेड का है राजकीय मेडिकल कॉलेज
-40 से 50 ऑपरेशन हर रोज होते हैं।
-12 से 15 सौ मरीजों ओपीडी में हर रोज आते हैं।
हृदय रोगियों को भागना पड़ता है दिल्ली-बरेली
-राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी कई बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बरेली और दिल्ली भागना पड़ता है। अपने यहां पर बेहतर व्यवस्था न होने के कारण मजबूरी में इलाज कराने जाना पड़ रहा है। यहां पर कॉर्डियोलॉजिस्ट तैनात नहीं है। लिवर फेलियर होने पर भी बाहर ले जाना पड़ता है। न्यूरो सर्जरी की व्यवस्था भी नहीं है। नेफ्रोलॉजिस्ट न होने से इलाज में दिक्कत होती है।
-जिला अस्पताल से राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद कई बदलाव हुए हैं। रिक्त पदों के लिए हम लोग समय-समय पर विज्ञापन निकालते रहते हैं। प्रयास है कि जनपद वालों को बेहतर सुविधाओं को मुहैया कराया जा सके। -राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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बरेली मोड़ स्थित जिला अस्पताल को तीन साल पहले राजकीय मेडिकल कॉलेज के रूप में बदलाव कर दिया गया था। कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना के प्रयास से मेडिकल कॉलेज बनने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में थोड़ा सा परिवर्तन हुआ, लेकिन गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जनपद में लाभ मिलना संभव नहीं हो सका। वजह यह है कि जनपद में करीब 22 पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है।
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मुख्य पद पर रिक्त होने से आ रही परेशानी
राजकीय मेडिकल कॉलेज में 45 डाक्टर कार्यरत हैं, जबकि 22 पद खाली पड़े हैं। अधिकतर में मेन आचार्य और सह आचार्य के पद रिक्त पड़े हैं। क्लीनिकल स्टाफ में स्त्री प्रसूति में दो, मद्य निषेद विभाग में तीन, मेडिसीन में एक, बाल रोग विशेषज्ञ में दो, मानसिक रोग विभाग और नेत्र रोग विभाग में दो-दो पद खाली पड़े हैं। सीनियर डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर रोगियों को रेफर करना पड़ता है।
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300 बेड का है राजकीय मेडिकल कॉलेज
-40 से 50 ऑपरेशन हर रोज होते हैं।
-12 से 15 सौ मरीजों ओपीडी में हर रोज आते हैं।
हृदय रोगियों को भागना पड़ता है दिल्ली-बरेली
-राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी कई बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बरेली और दिल्ली भागना पड़ता है। अपने यहां पर बेहतर व्यवस्था न होने के कारण मजबूरी में इलाज कराने जाना पड़ रहा है। यहां पर कॉर्डियोलॉजिस्ट तैनात नहीं है। लिवर फेलियर होने पर भी बाहर ले जाना पड़ता है। न्यूरो सर्जरी की व्यवस्था भी नहीं है। नेफ्रोलॉजिस्ट न होने से इलाज में दिक्कत होती है।
-जिला अस्पताल से राजकीय मेडिकल कॉलेज बनने के बाद कई बदलाव हुए हैं। रिक्त पदों के लिए हम लोग समय-समय पर विज्ञापन निकालते रहते हैं। प्रयास है कि जनपद वालों को बेहतर सुविधाओं को मुहैया कराया जा सके। -राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज