{"_id":"932ccbdfe56558717b5cc80d31856165","slug":"parvati-in-spring-was-found-to-bholenath-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘सावन में मां पार्वती ने पाया था भोलेनाथ को’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘सावन में मां पार्वती ने पाया था भोलेनाथ को’
शाहजहांपुर।
Updated Sat, 22 Aug 2015 11:52 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खिरनीबाग रामलीला मैदान में चल रही शिव महापुराण कथा के नौवें दिवस कथा व्यास प्रशांत प्रभु ने कहा कि मनुष्य पर जब प्रभु की कृपा होती है तो उसे विद्या रूपी माया प्राप्त होती है और जब कृपा प्राप्त नहीं होती तो अविद्या प्राप्त होती है।
आदर्श विकलांग कल्याण संस्थान के बैनर तले चल रही शिव महापुराण का भोले बाबा के भक्त खूब रसपान कर रहे हैं। चूंकि सावन के महीने में शिव पुराण का महत्व और भी बढ़ जाता है, इसलिए महिलाओं और पुरुषों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। कथा व्यास ने कहा कि प्रभु की कृपा पाने के लिए मनुष्य को हर समय उसकी शरण में रहना चाहिए। प्रशांत महाराज ने बताया कि सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय है। पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती ने इसी माह उपवास रखकर शिव को पाया था। इसीलिए इस महीने को शिव की साधना का महीना माना जाता है। श्रावण मास में सच्चे मन से की गई भगवान शिव की साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती।
कथा व्यास ने जलाभिषेक के बारे में रोचक जानकारी देते हुए बताया कि समुद्र मंथन इसी माह में हुआ था। समुद्र मंथन में निकले विष को भगवान शिव ने पी लिया था, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया। विष की गर्मी से उनके मुंह से बम-बम की आवाज निकलने लगी। देवताओं ने मां गंगा का जल लेकर शिव के ऊपर डाला, इससे उन्हें शांति मिली। इसीलिए सावन के महीने में गर्मी शांत करने के लिए ही भोले बाबा का अभिषेक किया जाता है। शनिवार को नैमिष पीठाधीश्वर डॉ. केशवानंद महाराज का भी सानिध्य आयोजकों को प्राप्त हुआ। इस बीच विधायक सुरेश खन्ना ने भी समय निकालकर शिव महापुराण का रसपान किया। प्रसाद वितरण के बाद कथा को विश्राम दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
आदर्श विकलांग कल्याण संस्थान के बैनर तले चल रही शिव महापुराण का भोले बाबा के भक्त खूब रसपान कर रहे हैं। चूंकि सावन के महीने में शिव पुराण का महत्व और भी बढ़ जाता है, इसलिए महिलाओं और पुरुषों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। कथा व्यास ने कहा कि प्रभु की कृपा पाने के लिए मनुष्य को हर समय उसकी शरण में रहना चाहिए। प्रशांत महाराज ने बताया कि सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को बहुत प्रिय है। पौराणिक मान्यता है कि माता पार्वती ने इसी माह उपवास रखकर शिव को पाया था। इसीलिए इस महीने को शिव की साधना का महीना माना जाता है। श्रावण मास में सच्चे मन से की गई भगवान शिव की साधना कभी व्यर्थ नहीं जाती।
विज्ञापन
कथा व्यास ने जलाभिषेक के बारे में रोचक जानकारी देते हुए बताया कि समुद्र मंथन इसी माह में हुआ था। समुद्र मंथन में निकले विष को भगवान शिव ने पी लिया था, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया। विष की गर्मी से उनके मुंह से बम-बम की आवाज निकलने लगी। देवताओं ने मां गंगा का जल लेकर शिव के ऊपर डाला, इससे उन्हें शांति मिली। इसीलिए सावन के महीने में गर्मी शांत करने के लिए ही भोले बाबा का अभिषेक किया जाता है। शनिवार को नैमिष पीठाधीश्वर डॉ. केशवानंद महाराज का भी सानिध्य आयोजकों को प्राप्त हुआ। इस बीच विधायक सुरेश खन्ना ने भी समय निकालकर शिव महापुराण का रसपान किया। प्रसाद वितरण के बाद कथा को विश्राम दिया गया।
विज्ञापन