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गेहूं खरीद: आखिरी 15 दिन तक सूने रहने के बाद सभी सेंटर हुए बंद

Mon, 04 Jul 2022 12:54 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jul 2022 12:54 AM IST
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Only 1.25 percent of the target could be purchased
शाहजहांपुर। सरकारी गेहूं खरीद शासन से मिले लक्ष्य के सापेक्ष महज 1.25 प्रतिशत ही हो सकी। जून के आखिरी 15 दिन तक क्रय केंद्रों को खुले रखने के निर्देश के बाद भी कोई किसान अपना गेहूं लेकर नहीं पहुंचा। लिहाजा सिर्फ 3882 टन गेहूं खरीद होने के बाद सभी 183 क्रय केंद्रों को अब बंद कर दिया गया है।
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रबी विपणन वर्ष 2021-22 के तहत समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद गत एक अप्रैल से शुरू हुई थी। बीती 15 जून तक खरीद होनी थी, लेकिन तब तक जनपद में महज 1.25 प्रतिशत खरीद हो सकी थी। शासन ने सभी क्रय केंद्र 30 जून तक खोले रखने के निर्देश दिए थे। लेकिन इस दौरान भी एक दाना गेहूं नहीं खरीदा गया। इस वर्ष खुले बाजार में गेहूं का भाव समर्थन मूल्य से अधिक रहने के कारण सरकारी खरीद पर प्रतिकूल असर पड़ा।
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यही नहीं, केंद्र सरकार द्वारा गेहूं निर्यात खोल दिए जाने से गल्ला आढ़तों और खाद्यान्न का कारोबार करने वाली कंपनियों ने करीब 25 लाख क्विंटल गेहूं खाड़ी और यूरोप के करीब एक दर्जन देशों को निर्यात कर दिया। इससे बाजार में मांग बढ़ने के साथ गेहूं के भाव बढ़े तो किसानों ने भी नगद भुगतान पर गेहूं खुले बाजार में देने में देर नहीं लगाई। इस कारणों से सरकारी खरीद इतनी शिथिल पड़ गई कि क्रय एजेंसियों के कई केंद्रों को मई के अंतिम सप्ताह से गेहूं मिलना बंद हो गया।
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खास यह है जनपद हर साल गेहूं खरीद में सिरमौर रहा है। इसीलिए इस वर्ष सरकारी खरीद का लक्ष्य 38 हजार टन बढ़ाकर 3.11 लाख टन किया गया। लक्ष्य यह यह मानकर बढ़ाया गया कि इस वर्ष शीतकाल तक मौसम अनुुकूल रहने से गेहूं की बंपर पैदावार होगी। इसीलिए शुरुआत में विभिन्न एजेंसियों के 164 क्रय केंद्र खुले, लेकिन बाद में उनकी संख्या बढ़ाकर 183 कर दी गई। समय से पहले गर्मी और तापमान की अधिकता से गेहूं की औसत उत्पादकता में कमी आ गई। निर्यात शुरू होने पर खुले बाजार में गेहूं महंगा हुआ तो सरकारी खरीद को एकदम ब्रेक लग गया।

रबी सीजन में पहली बार पूरे खरीद सत्र में शुरुआती दिन छोड़कर गेहूं का बाजार भाव समर्थन मूल्य से भी अधिक रहा। काफी मात्रा में गेहूं विदेश को भी निर्यात हुआ, जिससे खुले बाजार में उसके दाम बढ़ गए। इसीलिए इस बार जनपद में सरकारी खरीद लक्ष्य के अनुरूप नहीं हो सकी। सभी एजेंसियां खरीद लक्ष्य से बहुत पीछे रहीं। सबसे लचर प्रदर्शन एसएफसी का रहा। इस एजेंसी को 9000 टन खरीद लक्ष्य दिया गया, लेकिन उसे सिर्फ 7.45 टन गेहूं मिला। आखिरी दो सप्ताह में गांवों का दौरा करने पर भी किसानों से गेहूं नहीं मिला। -कमलेश कुमार पांडेय, प्रभारी जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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