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Shahjahanpur News: शस्त्र लाइसेंस धारकों में एक तिहाई महिलाएं
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शाहजहांपुर। जिले में शस्त्र लाइसेंस लेने के काफी शौकीन लोग हैं। जिले में 37 हजार के करीब लाइसेंस धारक हैं। जिसमें 12 हजार महिलाओं के नाम लाइसेंस हैं। वर्तमान में नए लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया बंद है। शासनादेश के आधार पर डीएम अपने विवेक से बहुत जरूरतमंद लोगों के लाइसेंस बनाने की अनुमति दे सकते हैं।
वर्ष 2018-2019 में शासन की ओर से शस्त्र लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद एक शासनादेश जारी किया गया था। इसमें बहुत ही जरूरतमंद लोगों जैसे जिनकी जान को खतरा है या फिर खिलाड़ियों के लिए लाइसेंस जारी किए जा सकते हैं। लाइसेंस रोक लगने के बाद से इस प्रकार के करीब 10 लाइसेंस ही जिले में बनाए गए हैं।
बाकी लोगों के लिए लाइसेंस देने की प्रक्रिया बंद है। असलहा कार्यालय में वर्तमान में विरासत और ट्रांसफर आदि का ही कार्य हो रहा है। इसमें दूसरे प्रदेश में लाइसेंस जारी कराने वाले अधिकतर भूतपूर्व सैनिक शामिल हैं।
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जिले में लाइसेंस की हैं करीब 50 दुकानें
जिले में लाइसेंस की करीब 50 दुकानें हैं। इन दुकानों पर सिर्फ कारतूस आदि की बिक्री या फिर असलहा रखने का कार्य हो रहा है। कुछ दुकानों पर शस्त्रों की मरम्मत का कार्य भी होता है। नए शस्त्रों की बिक्री का कार्य लगभग न के बराबर है।
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अब शस्त्र लेकर चलने का फैशन हुआ कम
करीब दो दशक पहले शस्त्र को साथ में लेकर चलने का दौर चला था। इसके विपरीत अब लोग शस्त्र लेकर या लगाकर नहीं चल रहे हैं। जो लेकर चल रहे हैं। इसमें अधिकतर लोग सुरक्षा से संबंधित लोग शामिल हैं। खेल से संबंधित लोग अपने लाइसेंस को किसी बैग में लेकर ही कहीं जा सकते हैं।
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लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया पर रोक लगी है। बस डीएम के विवेक पर जरूरतमंद लोगों के लाइसेंस बनाए जा सकते हैं। बाकी विरासत और ट्रांसफर आदि का ही काम हो रहा है।
- प्रवेंद्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट
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वर्ष 2018-2019 में शासन की ओर से शस्त्र लाइसेंस बनाने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद एक शासनादेश जारी किया गया था। इसमें बहुत ही जरूरतमंद लोगों जैसे जिनकी जान को खतरा है या फिर खिलाड़ियों के लिए लाइसेंस जारी किए जा सकते हैं। लाइसेंस रोक लगने के बाद से इस प्रकार के करीब 10 लाइसेंस ही जिले में बनाए गए हैं।
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बाकी लोगों के लिए लाइसेंस देने की प्रक्रिया बंद है। असलहा कार्यालय में वर्तमान में विरासत और ट्रांसफर आदि का ही कार्य हो रहा है। इसमें दूसरे प्रदेश में लाइसेंस जारी कराने वाले अधिकतर भूतपूर्व सैनिक शामिल हैं।
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जिले में लाइसेंस की हैं करीब 50 दुकानें
जिले में लाइसेंस की करीब 50 दुकानें हैं। इन दुकानों पर सिर्फ कारतूस आदि की बिक्री या फिर असलहा रखने का कार्य हो रहा है। कुछ दुकानों पर शस्त्रों की मरम्मत का कार्य भी होता है। नए शस्त्रों की बिक्री का कार्य लगभग न के बराबर है।
अब शस्त्र लेकर चलने का फैशन हुआ कम
करीब दो दशक पहले शस्त्र को साथ में लेकर चलने का दौर चला था। इसके विपरीत अब लोग शस्त्र लेकर या लगाकर नहीं चल रहे हैं। जो लेकर चल रहे हैं। इसमें अधिकतर लोग सुरक्षा से संबंधित लोग शामिल हैं। खेल से संबंधित लोग अपने लाइसेंस को किसी बैग में लेकर ही कहीं जा सकते हैं।
लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया पर रोक लगी है। बस डीएम के विवेक पर जरूरतमंद लोगों के लाइसेंस बनाए जा सकते हैं। बाकी विरासत और ट्रांसफर आदि का ही काम हो रहा है।
- प्रवेंद्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट