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नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर विशेषः चंदा जुटाकर शहीद नगरी ने किए थे नेताजी के हाथ मजबूत
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शाहजहांपुर में स्थित सुभाष टावर । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। आजाद हिन्द फौज के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस का जुड़ाव शहीद नगरी शाहजहांपुर से भी रहा है। फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना के बाद वह शाहजहांपुर आए थे और लोगों से आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आह्वान किया था। शहीद नगरी के लोगों ने चंदा कर नेताजी को स्वतंत्रता संग्राम के यज्ञ में धनराशि रूपी आहूति भी दी थी।
शाहजहांपुर शहर अपने क्षेत्र तथा जनसंख्या के हिसाब से अन्य कई शहरों से छोटा जरूर है किंतु भारत के इतिहास के हर खंड तथा बड़ी घटना में यहां के नागरिकों का बड़ा योगदान रहा है। महाभारत काल से आधुनिक युग की बात हो या फिर 1857 की क्रांति से लेकर संविधान बनाने तक यहां के बाशिंदों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान अदा किया है। भारत के स्वाधीनता संघर्ष की अनेक घटनाओं तथा प्रमुख धाराओं में शहर की भूमिका परिलक्षित हुई। जहां एक ओर गांधीवादी आंदोलनों में यहां के नागरिक बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे वहीं पं. राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशनसिंह के नेतृत्व में क्रांतिकारियों की दूसरी पीढ़ी का नेतृत्व शहर कर रहा था। आज भी बहुत कम लोग जानते होंगे कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और उनकी आजाद हिंद सेना के लिए भी शहरवासियों ने सहयोग किया था।
एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद नेताजी ने कांग्रेस के अंदर ही फारवर्ड ब्लॉक बना लिया। 22 जनवरी 1940 को नेताजी पहली बार शाहजहांपुर आये। यहां सैकड़ों आजादी के समर्थकों ने उनका स्वागत किया। पांच मार्च को सुभाषचंद्र बोस फिर शाहजहांपुर आए तो शहरवासियों ने उन्हें 1000 रुपये चंदा कर दिया। नेताजी ने आश्वासन दिया कि इस धनराशि की एक-एक पाई राष्ट्र हित और स्वतंत्रता संग्राम में लगेगी। कांग्रेस नेतृत्व में भी इसकी प्रतिक्रिया हुई और उन्हें बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा कर कांग्रेस से छह साल के लिए निकाल दिया गया। वह शीघ्र ही क्रांतिकारी वीर सावरकर के सम्पर्क में आ गए। यह देख ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें घर मे नजरबंद कर दिया।
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शाहजहांपुर में नेताजी की याद में स्मारक
शाहजहांपुर में नेताजी की याद में सुभाष टावर का निर्माण किया गया जो शहर के मध्य खड़ा घंटाघर है। इसके अतिरिक्त अभी हाल में ही नेताजी की याद में हथौड़ा चौराहे का नाम बदलकर सुभाष स्क्वायर किया गया है जहां उनकी प्रतिमा लगाई गई है ताकि आने वाली पीढ़ियां नेताजी सुभाषचंद्र बोस के व्यक्तित्व और बलिदान से प्रेरित हो सकें।
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शाहजहांपुर शहर अपने क्षेत्र तथा जनसंख्या के हिसाब से अन्य कई शहरों से छोटा जरूर है किंतु भारत के इतिहास के हर खंड तथा बड़ी घटना में यहां के नागरिकों का बड़ा योगदान रहा है। महाभारत काल से आधुनिक युग की बात हो या फिर 1857 की क्रांति से लेकर संविधान बनाने तक यहां के बाशिंदों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान अदा किया है। भारत के स्वाधीनता संघर्ष की अनेक घटनाओं तथा प्रमुख धाराओं में शहर की भूमिका परिलक्षित हुई। जहां एक ओर गांधीवादी आंदोलनों में यहां के नागरिक बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे थे वहीं पं. राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, ठाकुर रोशनसिंह के नेतृत्व में क्रांतिकारियों की दूसरी पीढ़ी का नेतृत्व शहर कर रहा था। आज भी बहुत कम लोग जानते होंगे कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और उनकी आजाद हिंद सेना के लिए भी शहरवासियों ने सहयोग किया था।
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एसएस कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. विकास खुराना बताते हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद नेताजी ने कांग्रेस के अंदर ही फारवर्ड ब्लॉक बना लिया। 22 जनवरी 1940 को नेताजी पहली बार शाहजहांपुर आये। यहां सैकड़ों आजादी के समर्थकों ने उनका स्वागत किया। पांच मार्च को सुभाषचंद्र बोस फिर शाहजहांपुर आए तो शहरवासियों ने उन्हें 1000 रुपये चंदा कर दिया। नेताजी ने आश्वासन दिया कि इस धनराशि की एक-एक पाई राष्ट्र हित और स्वतंत्रता संग्राम में लगेगी। कांग्रेस नेतृत्व में भी इसकी प्रतिक्रिया हुई और उन्हें बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा कर कांग्रेस से छह साल के लिए निकाल दिया गया। वह शीघ्र ही क्रांतिकारी वीर सावरकर के सम्पर्क में आ गए। यह देख ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें घर मे नजरबंद कर दिया।
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शाहजहांपुर में नेताजी की याद में स्मारक
शाहजहांपुर में नेताजी की याद में सुभाष टावर का निर्माण किया गया जो शहर के मध्य खड़ा घंटाघर है। इसके अतिरिक्त अभी हाल में ही नेताजी की याद में हथौड़ा चौराहे का नाम बदलकर सुभाष स्क्वायर किया गया है जहां उनकी प्रतिमा लगाई गई है ताकि आने वाली पीढ़ियां नेताजी सुभाषचंद्र बोस के व्यक्तित्व और बलिदान से प्रेरित हो सकें।

शाहजहांपुर के सुभाष चंद्र बोस चौराहा पर लगी नेता सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR