{"_id":"128d179c519d147935c02ab168080d9a","slug":"meera-s-devotion-to-fair-was-staged-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेला में किया गया मीरा की भक्ति का मंचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेला में किया गया मीरा की भक्ति का मंचन
शाहजहांपुर।
Updated Sat, 28 Nov 2015 12:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुमुक्षु आश्रम में चल रहे कार्तिक मेला के तीसरे दिन रासलीला में मीराबाई के चरित्र का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि मीरा पूर्व जन्म में श्यामा नाम की एक स्त्री थी। श्यामा की माता ने मना किया कि अपनी ससुराल ब्रज में कृष्ण नाम वाले व्यक्ति को अपना मुख मत दिखाना। वह ब्रज में पहुंची और कृष्ण ने कई बार मुंह देखने की कोशिश की, लेकिन वह मुंह नहीं देख सके।
एक दिन ब्रजवासियों ने पूजन में इंद्र को नहीं पूजा, तो क्रोधित होकर इंद्र ने वर्षा शुरू कर दी। इस पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठाकर सभी की जान बचाई। तब श्यामा को पता चला की उसकी मां ने उसेे गलत बताया था और वह कृष्ण के चरणों में गिर पड़ी। तभी उसे पता चला की कृष्ण भगवान का रूप है। इस बार कृष्ण ने मुंह घुमा लिया। बार-बार कहने और विनती करने पर कृष्ण ने कहा अगले जन्म में तुम मीरा के नाम से आओगी तब मेरा मुख देख पाओगी और मेरी भक्ती में लीन रहोगी। तभी मेरी भक्ति तुम्हें प्राप्त होगी। तब में गिरधर रूप में प्राप्त होऊंगा।
मीरा का विवाह उदयपुर के महाराणा कुंवर भोजराज के साथ हुआ था जो उदयपुर के महाराणा सांगा के पुत्र थे। विवाह के कुछ समय बाद ही उनके पति का देहांत हो गया। पति की मृत्यु के बाद उन्हें पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया, किंतु मीरा इसके लिए तैयार नहीं हुई। वे संसार की ओर से विरक्त हो गयीं और साधु संतों की संगति में हरिकीर्तन करते हुए अपना समय व्यतीत करने लगीं। घर वालों ने इसके लिए मना किया, उनके व्यवहार से परेशान होकर वह द्वारका और वृंदावन गईं। उन्हें लोग उनको देवियों के जैसा प्यार और सम्मान देते थे। मीरा ने अपने जीवन का अंत श्रीनाथ जी के चरणों में किया।
विज्ञापन
मंचन से पहले भगवान श्रीकृष्ण की आरती मुख्य यजमान बालकृष्ण अग्रवाल एवं मनोज अग्रवाल ने की। मुमुक्षु आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र, डॉ. संजय वरनवाल, डॉ. अमीर सिंह आदि भी मौजूद रहे।
मेेला व्यवस्थापक चंद्रभान त्रिपाठी के मार्गदर्शन में चल रहे मेले की व्यवस्था में शोभित अग्रवाल, हिमांशु मिश्रा, सुबोध कांत मिश्रा, सूर्यप्रताप सिंह, अतुल सिहं, सत्येंद्र कुमार, शालीन सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, गौरव, अमित सैनी, अमित सिंह, अनिल कुमार आदि का सहयोग रहा। इधर, दिन में मेले में सुदूर क्षेत्रों से आए ग्रामीणों ने मेले में जरूरी वस्तुओं की खरीददारी की और चाट-पकौड़ी का आनंद लिया।
विज्ञापन
एक दिन ब्रजवासियों ने पूजन में इंद्र को नहीं पूजा, तो क्रोधित होकर इंद्र ने वर्षा शुरू कर दी। इस पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उंगली पर उठाकर सभी की जान बचाई। तब श्यामा को पता चला की उसकी मां ने उसेे गलत बताया था और वह कृष्ण के चरणों में गिर पड़ी। तभी उसे पता चला की कृष्ण भगवान का रूप है। इस बार कृष्ण ने मुंह घुमा लिया। बार-बार कहने और विनती करने पर कृष्ण ने कहा अगले जन्म में तुम मीरा के नाम से आओगी तब मेरा मुख देख पाओगी और मेरी भक्ती में लीन रहोगी। तभी मेरी भक्ति तुम्हें प्राप्त होगी। तब में गिरधर रूप में प्राप्त होऊंगा।
विज्ञापन
मीरा का विवाह उदयपुर के महाराणा कुंवर भोजराज के साथ हुआ था जो उदयपुर के महाराणा सांगा के पुत्र थे। विवाह के कुछ समय बाद ही उनके पति का देहांत हो गया। पति की मृत्यु के बाद उन्हें पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया, किंतु मीरा इसके लिए तैयार नहीं हुई। वे संसार की ओर से विरक्त हो गयीं और साधु संतों की संगति में हरिकीर्तन करते हुए अपना समय व्यतीत करने लगीं। घर वालों ने इसके लिए मना किया, उनके व्यवहार से परेशान होकर वह द्वारका और वृंदावन गईं। उन्हें लोग उनको देवियों के जैसा प्यार और सम्मान देते थे। मीरा ने अपने जीवन का अंत श्रीनाथ जी के चरणों में किया।
विज्ञापन
मंचन से पहले भगवान श्रीकृष्ण की आरती मुख्य यजमान बालकृष्ण अग्रवाल एवं मनोज अग्रवाल ने की। मुमुक्षु आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती, प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र, डॉ. संजय वरनवाल, डॉ. अमीर सिंह आदि भी मौजूद रहे।
मेेला व्यवस्थापक चंद्रभान त्रिपाठी के मार्गदर्शन में चल रहे मेले की व्यवस्था में शोभित अग्रवाल, हिमांशु मिश्रा, सुबोध कांत मिश्रा, सूर्यप्रताप सिंह, अतुल सिहं, सत्येंद्र कुमार, शालीन सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, गौरव, अमित सैनी, अमित सिंह, अनिल कुमार आदि का सहयोग रहा। इधर, दिन में मेले में सुदूर क्षेत्रों से आए ग्रामीणों ने मेले में जरूरी वस्तुओं की खरीददारी की और चाट-पकौड़ी का आनंद लिया।