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सूबे में पूरब से पश्चिम तक माटी हुई बीमार

Tue, 08 Sep 2015 11:40 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Tue, 08 Sep 2015 11:40 PM IST
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Mati was sick in the state from east to west
अपने सूबे में पूरब से लेकर मध्य और पश्चिमी हिस्से के जिलों की माटी की सेहत बिगड़ गई है। यानी माटी बीमार हो गई है। वायुमंडल से नाइट्रोजन का अवशोषण कर पौधों में पाचन तंत्र यानी हाजमे को सही रखने के लिए जरूरी अम्लानुपात (पीएच लेवल) भी बागपत, गाजीपुर और मऊ जिले के अलावा खीरी के लखीमपुर में गड़बड़ मिला है। यूपी गन्ना शोध परिषद में अगले वर्ष खेती के लिए जरूरी सुझाव तालिका तैयार करने के क्रम में पूर्व, मध्य और पश्चिम के कुल 10 जिलों से लिए गए 4009 माटी के नमूनों के जांच में यह तथ्य सामने आया है।
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मृदा विज्ञान के लिहाज से अच्छी सेहत वाली माटी में पीएच का औसत मानक 6.5 से 7.5 के बीच होता है। यह अनुपात डगमगाते ही पौधे की संरचना डगमगा जाती है। अधिक हुआ तो पौधा कमजोर होगा और पैदावार भी प्रभावित होगी। दूसरी ओर इसके कम होने पर पत्तियां और तने में गलन की स्थिति होती है जैसा कि खीरी जनपद के पलिया क्षेत्र में बीजुआ और भीरा में है। परिषद के लैब में हुई जांच में पौधे की बढ़वार के लिए जरूरी कार्बनिक तत्व एवं जड़ और तने के विकास के लिए जरूरी फास्फोरस भी हर जिले में मानक से कम मिले है। तय मानक के लिहाज से एक हेक्टेयर खेत की माटी में औसतन 108 किग्रा पोटाश होना चाहिए। परीक्षण के लिए अन्य जिलों के नमूनों में इसकी मात्रा सही पाई गई।
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परिषद के निदेशक डॉ. वीएल शर्मा की देखरेख में जारी इस विश्लेषण रिपोर्ट को तैयार करने लिए परीक्षण में मृदा विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. अनेग सिंह, सहायक वरिष्ठ वैज्ञानिक आरडी तिवारी, वैज्ञानिक सहायक राजेश कुमार आदि जुटे हैं। इन्होंने चीनी मिल क्षेत्रों के उन खेतों से नमूने भरे हैं, जहां गन्ने के अलावा धान और गेहूं की भी खेती होती है।
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पूरे सूबे में खेती लायक माटी की तबीयत खराब है। गोबर जनित खाद के इस्तेमाल की कमी एवं मनमाने अनुपात में खाद रूप में सिर्फ यूरिया का प्रयोग इसकी बड़ी वजह है। दो किग्रा फास्फोरस और एक किग्रा पोटाश के साथ चार किग्रा यूरिया का प्रयोग करना चाहिए जबकि यूरिया का प्रयोग चार या पांच गुना अधिक मात्रा में हो रहा है। इससे खेती की लागत भी तीन से चार गुना बढ़ रही है और माटी बीमार होने से उत्पादन ठिठका हुआ है। ताजा परीक्षण और विश्लेषण में यही तथ्य सामने आए हैं।
- डॉ. अनेग सिंह, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, मृदा विभाग, उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद।


विभिन्न जिलों के माटी में मिले औसत पोषक तत्व एकनजर में
जिला        पीएच लेवल        कार्बनिक तत्व    फास्फोरस        पोटाश
                    (ग्राम प्रति किग्रा)    (किग्रा प्रति हे.)    (किग्रा प्रति हे.)
खीरी        7.72            4.34            9.58            164.7
(लखीमपुर)
खीरी        7.02            4.79            11.45            171
(गोला)
बरेली        7.46            3.82            10.8            158.2
शाहजहांपुर    6.9            3.12            9.28            144
बदायूं        7.27            3.89            8.72            118
बिजनौर    6.98            3.54            8.035            89.17
बागपत    7.67            4.59            10.40            157
हरदोई        7.50            3.98            8.6            170
आजमगढ़    7.41            4.22            8.61            155
गाजीपुर    7.74            4.05            8.37            196
मऊ        7.77            4.68            10.23            178


नोट : मृदा विज्ञान के लिहाज से अच्छी सेहत वाली माटी में पीएच का औसत मानक 6.5 से 7.5 के बीच होता है। पोटाश के लिए यह औसत मानक प्रति हेक्टेयर खेत में 108 किग्रा और फास्फोरस के लिए प्रति हेक्टेयर 20 किग्रा है, जबकि कार्बनिक तत्व एक किग्रा माटी में पांच ग्राम से अधिक होनी चाहिए।
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