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Shahjahanpur News: दोहरे हत्याकांड में तीन सगे भाइयों समेत आठ को आजीवन कारावास

Mon, 10 Apr 2023 11:38 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 10 Apr 2023 11:38 PM IST
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Life imprisonment to eight including three brothers in double murder
- 1993 में निगोही थाना क्षेत्र के गांव घाटबोझ में हुआ था दोहरा हत्याकांड
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संवाद न्यूज एजेंसी
शाहजहांपुर। विशेष न्यायाधीश अखिलेश कुमार पाठक ने वर्ष 1993 में निगोही क्षेत्र के गांव घाटबोझ में हुए दोहरे हत्याकांड में तीन सगे भाइयों समेत आठ दोषियों को आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दो आरोपियों की मौत मुकदमे के दौरान हो गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, गांव के रहने वाले भबूती ने आठ मार्च 1993 को रिपोर्ट लिखाई थी कि उसके भांजे गंगाराम आदि से गांव के रहने वाले सेठपाल की मुकदमेबाजी को लेकर रंजिश चल रही थी। घटना के दिन शिवकुमार उर्फ छोटे लल्ला हाथ में बंदूक लिए गंगाराम के घर के सामने फायरिंग कर रहा था। उसके भांजे ने फायरिंग से मना कर दिया। इस पर दोनों की कहासुनी हो गई थी। बाद में वह और उसके भांजे उमराय, रामसरन, गंगाराम, सीताराम गांव के लोगों के साथ बातचीत कर रहे थे। तभी वहां पर सेठपाल, रतिपाल, शिवकुमार उर्फ छोटे लल्ला, मटरू, गुड्डू, अजयपाल, प्रेमपाल असलहे लेकर आ गए। उनके साथ में लाठी लेकर बलवीर, नेकपाल, टोडी भी थे। उसके भांजे के घर के सामने सेठपाल ने कहा कि तुम्हें फायर करने से रोकने का मजा अभी चखाते हैं। सेठपाल ने घर के छप्पर में आग लगा दी। ये लोग छत पर चढ़कर भागे तो बलवीर आदि के कहने पर सेठपाल व अन्य लोगों ने फायरिंग की। गोली लगने से उमराय की मौके पर ही मौत हो गई।
शिवकुमार, रतिपाल और मटरू की चलाई गोलियां रामसरन को लगीं, जिससे वह घायल हो गया। गंभीर रूप से घायल रामसरन की बाद में इलाज के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। वादी की तहरीर के आधार पर रतिपाल, प्रेमपाल, अजयपाल (सगे भाई), शिवकुमार, नेकपाल, बलवीर, गुड्डू, मटरू, सेठपाल, एवं टोडी के खिलाफ हत्या, एससीएसटी एक्ट व अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई। अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकील मनोज कुमार मिश्रा, अतुल अग्निहोत्री के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने रतिपाल, प्रेमपाल, अजयपाल, शिवकुमार, नेकपाल, बलवीर, गुड्डू, मटरू को दोषी माना। सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सेठपाल और टोडी की मृत्यु मुकदमे के दौरान हो गई थी।
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30 साल बाद मिला न्याय, परिजनों ने जताया संतोष

निगोही। 30 साल पहले दोहरे हत्याकांड में आठ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने पर परिजनों ने न्यायपालिका को धन्यवाद दिया है। पिता उमराय व चाचा रामसरन के हत्यारों को सजा से दोनों बेटों राजवीर और वेदपाल को न्याय मिला है। दोनों भाइयों ने कहा कि भगवान के घर देर है लेकिन अंधेर नहीं।
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राजवीर ने बताया कि जब हत्याकांड हुआ था तब वे बहुत छोटे थे। बाद में जब बड़े हुए तो उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिली थी। आठ मार्च 1993 की रात करीब साढ़े आठ बजे इस वारदात ने उनके परिवार को तबाह कर दिया था। हत्यारों को हुई सजा से परिजनों में संतोष है। वेदपाल की पत्नी सुनीता, उसके बच्चे आयुष, दुर्गेश, कविता और राजपाल के बच्चे बृजकिशोर, पवन, अंजलि भी खुश हैं। राजपाल का कहना है उनका परिवार आज भी भय के साये में जी रहा है। पिता उमराय के नाम की जमीन पर कब्जा है। उसे आज तक पौने चार बीघा जमीन नहीं मिली है। दर- दर भटक रहे हैं लेकिन कोई नहीं सुन रहा है। संवाद
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