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गज-ग्राह का मरम श्रोताओं ने जाना

Fri, 13 Mar 2015 08:34 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Fri, 13 Mar 2015 08:34 PM IST
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katha path
खत्री धर्मशाला घूरनतलैया में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ समारोह में कथा व्यास डॉ. दामोदर दीक्षित ने गज-ग्राह प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि वास्तव में मनुष्य ही गज है, जो ईश्वर का साथी है, लेकिन वह लोभ और अहंकार के वशीभूत होकर हाथी बन जाता है।
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कथा व्यास ने कहा कि यह संसार ही ग्राह है, यदि इससे उबरना है तो भगवान के नाम का जप हृदय से करना होगा। इसी कड़ी में उन्होंने भक्त प्रह्लाद, वामन अवतार आदि की व्याख्या करते हुए श्रोताओं को भागवत से जोड़ा। इससे पूर्व संचालक आचार्य रामानंद दीक्षित ने भगवान राम के स्वभाव का वर्णन करते हुए कहा कि जब विभीषण प्रभु की शरण में आया तो सुग्रीव के मना करने के बावजूद श्रीराम ने उसे शरण दी और उसे गले से लगा लिया। राम दुलारे त्रिगुणायत ने रामराज के महत्व पर प्रकाश डाला।
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आरती के पश्चात कथा को विश्राम दिया गया। आयोजन में कमलेश खन्ना, धीरू खन्ना, राज खन्ना, राघव, ओम खन्ना, सरला खन्ना, रागिनी खन्ना, श्याम सुंदर, प्रिया आदि का योगदान रहा।
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