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उदासीनता से आस्तित्व खो रहा 52 दरवाजा मंदिर

Sun, 28 Jun 2015 11:54 PM IST
गौरव त्रिवेदी/मझिगवां (पुवायां)।
गौरव त्रिवेदी/मझिगवां (पुवायां)। Updated Sun, 28 Jun 2015 11:54 PM IST
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Indifferently losing existence 52 Temple door
लगभग दो सौ साल पुराना मुडिय़ा कुर्मियात का मंदिर ढहने की कगार पर है। पुरातात्विक महत्ता के इस मंदिर पर आज तक किसी भी सरकार ने ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी है। कोर्णाक के सूर्य मंदिर की तर्ज पर बने इस मंदिर का निर्माण गांव के दो सगे भाइयों चूरामणि और बुद्धसेन ने कराया था। मंदिर ककईया ईंटों और चूने, सुर्खी से बना हुआ है। बताया जाता है कि निर्माण केे समय मंदिर में काफी सोना भी लगा था जो कालांतर में गायब हो गया। मंदिर के पश्चिम में पुजारी के रहने और संत महात्माओं के ठहरने को कमरे बने हैं जो किसी भी समय ढह सकते हैं। मंदिर प्रांगण में कुंआ भी है। काफी ऊंचाई पर बने मुख्य मंदिर के चारों ओर छोटे-छोटे कई मंदिर बने हैं। तांत्रोक्त विधि से निर्मित मंदिर में भगवान विष्णु, बलदाऊ, राधा जी सहित लगभग 30 देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर में 52 दरवाजे हैं। मंदिर में जिस दरवाजे से प्रवेश करते हैं ज्यादा दरवाजे होने के कारण उससे निकलना काफी मुश्किल होता है। मुख्य गुंबद के अलावा 12 अन्य गुंबद मंदिर की शोभा बढ़ाते हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है।
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इस वंश की 11वीं पीढ़ी के दशरथ वर्मा बताते है कि मंदिर पुरातात्विक महत्ता का है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। मंदिर के गुंबदों पर पीपल आदि के पेड़ जमने से उनकी जड़ों ने गुंबदों सहित मंदिर को काफी नुकसान पहुंचाया है। मंदिर के पश्चिमी हिस्से के कई भवन खंडहर के रूप में बदल चुके हैं। आज भी मंदिर की देखरेख वर्मा परिवार के जिम्मे है।
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