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रेलवे बोर्ड ने तानाशाही रवैया न छोड़ा तो होगा आंदोलन
शाहजहांपुर, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Mar 2017 12:23 AM IST
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उत्तरीय रेलव मजदूर यूनियन ने बैठक कर रेलवे बोर्ड के तानाशाही रवैये का विरोध करते हुए कर्मचारियों को एकजुट रहकर 23 और 30 मार्च को होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की। इससे पहले यूनियन के पदाधिकारियों ने विभिन्न कार्यालयों में जाकर कर्मचारियों को शोषण के बारे में बताया।
एनएफआईआर के आवाहन पर आयोजित बैठक में रेलवे बोर्ड के तानाशाही रवैये के साथ ही विभिन्न मुद्दो पर चर्चा करते हुए यूनियन के शाखा सचिव राजीव शर्मा ने कहा कि सातवें कमीशन में ट्रैक मेंटनरों को भी रखा गया है, लेकिन अभी तक उन्हे इसका लाभ नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड ने 30 जनवरी के अपने आदेश में ट्रेन दुर्घटनाओं में रेल कर्मचारियों को दोषी करार दिया है, जबकि ट्रेन दुर्घटनाएं ठेकेदारी प्रथा के कारण कोचों, ट्रैक इत्यादि में घटिया मैटेरियल लगाए जाने के कारण हो रहीं हैं। शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने सातवें पे कमीशन में रेलवे कामगारों एवं केंद्रीय कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय किया है। विभिन्न भत्तों को समाप्त कर दिया है एवं कई तरह के जो भत्ते दे रहे हैं वे भी छठे पे कमीशन के अनुरूप नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि रेलवे बोर्ड ने अपना तानाशाही रवैया नहीं बदला तो 23 मार्च को मंडल स्तर पर और 30 मार्च को नई दिल्ली मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में अध्यक्ष रामचंद्र, राजीव वर्मा, केपी सिंह, मोहम्मद वली खां, राकेश तिवारी, पीपी विश्वकर्मा आदि लोग शामिल थे।
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एनएफआईआर के आवाहन पर आयोजित बैठक में रेलवे बोर्ड के तानाशाही रवैये के साथ ही विभिन्न मुद्दो पर चर्चा करते हुए यूनियन के शाखा सचिव राजीव शर्मा ने कहा कि सातवें कमीशन में ट्रैक मेंटनरों को भी रखा गया है, लेकिन अभी तक उन्हे इसका लाभ नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड ने 30 जनवरी के अपने आदेश में ट्रेन दुर्घटनाओं में रेल कर्मचारियों को दोषी करार दिया है, जबकि ट्रेन दुर्घटनाएं ठेकेदारी प्रथा के कारण कोचों, ट्रैक इत्यादि में घटिया मैटेरियल लगाए जाने के कारण हो रहीं हैं। शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने सातवें पे कमीशन में रेलवे कामगारों एवं केंद्रीय कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय किया है। विभिन्न भत्तों को समाप्त कर दिया है एवं कई तरह के जो भत्ते दे रहे हैं वे भी छठे पे कमीशन के अनुरूप नहीं दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि रेलवे बोर्ड ने अपना तानाशाही रवैया नहीं बदला तो 23 मार्च को मंडल स्तर पर और 30 मार्च को नई दिल्ली मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। बैठक में अध्यक्ष रामचंद्र, राजीव वर्मा, केपी सिंह, मोहम्मद वली खां, राकेश तिवारी, पीपी विश्वकर्मा आदि लोग शामिल थे।
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