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हनुमान मंदिर के लिए जमीन देने वाले असमत उल्ला का सम्मान
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तिलहर। कछियानी खेड़ा हनुमान मंदिर के लिए एक बीघा जमीन दान में दिए जाने पर भूस्वामी असमत उल्ला उर्फ बाबू मंसूरी को सम्मानित किया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री चिन्मयानंद ने असमत उल्ला को गले लगाकर कहा कि अब बाबा और बाबू एक हो गए हैं।
रविवार दोपहर रस्तोगी धर्मशाला में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि बाबू मंसूरी ने अपनी जमीन मंदिर को दान करके हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल को मजबूती दी है। शहीद नगरी की साझी विरासत की परंपरा को बाबू ने आगे बढ़ाया है। चिन्मयानंद ने असंतोष प्रकट करते हुए कहा कि मंदिर के भवन निर्माण में महंत रामलखन गिरी की साधना रही है इसलिए उन्हें विश्वास में लेकर काम करना चाहिए था।
स्वामी चिन्मयानंद ने घोषणा की कि कचियानी खेड़ा अब हनुमत नगर के नाम से जाना जाएगा। आवश्यकता पर बाबू मंसूरी से और जमीन लेकर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए बड़ा हाल, जूना अखाड़े के महंतों के लिए बड़ा कक्ष, रसोईघर अन्य कक्षों के अलावा अन्य व्यवस्थाएं मुकम्मल की जाएंगी। चिन्मयानंद ने कहा कि हनुमान जी का नाम लेकर राजनीति करने वालों को श्रद्धालुओं की भावना का सम्मान करना चाहिए था। चिन्मयानंद के मुताबिक जब उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुस्लिम भाई द्वारा हनुमान मंदिर के लिए जमीन दान देने की बात बताई तो वह अचंभित रह गए।
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चिन्मयानंद ने कहा कि दान की गई कृषि भूमि को पूजा योग्य बनाने के लिए 11 ब्राह्मण यहां 18 से 23 अक्तूबर तक यज्ञ करेंगे। पांच दिन तक लगातार यज्ञ के साथ ही भंडारे का आयोजन किया गया है। यज्ञ की व्यवस्था भानु प्रताप शास्त्री और सत्येंद्र पाठक को सौंपी गई है। भंडारे आदि की व्यवस्था के लिए देवेंद्र गुप्ता को नामित किया गया है।
ये लोग रहे मौजूद
भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र गुप्ता, भानु प्रताप शास्त्री, अरुण रस्तोगी उर्फ मदन, सत्यप्रकाश आर्य, हेतराम गंगवार, प्रभात सहाय, भगत जी, ईशपाल, शीलेंद्र मोहन, सिद्धार्थ गुप्ता, कुलदीप गुप्ता, अनूप गुप्ता, रितिक गुप्ता, संजीव गुप्ता, एडवोकेट शिवराम, शालिनी, एडवोकेट फिरोज हसन खान, अशोक अग्रवाल, जाकिर अली मंसूरी, कानूनगो अवधेश सक्सेना, लेखपाल अंकुर चौधरी आदि।
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रविवार दोपहर रस्तोगी धर्मशाला में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि बाबू मंसूरी ने अपनी जमीन मंदिर को दान करके हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल को मजबूती दी है। शहीद नगरी की साझी विरासत की परंपरा को बाबू ने आगे बढ़ाया है। चिन्मयानंद ने असंतोष प्रकट करते हुए कहा कि मंदिर के भवन निर्माण में महंत रामलखन गिरी की साधना रही है इसलिए उन्हें विश्वास में लेकर काम करना चाहिए था।
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स्वामी चिन्मयानंद ने घोषणा की कि कचियानी खेड़ा अब हनुमत नगर के नाम से जाना जाएगा। आवश्यकता पर बाबू मंसूरी से और जमीन लेकर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए बड़ा हाल, जूना अखाड़े के महंतों के लिए बड़ा कक्ष, रसोईघर अन्य कक्षों के अलावा अन्य व्यवस्थाएं मुकम्मल की जाएंगी। चिन्मयानंद ने कहा कि हनुमान जी का नाम लेकर राजनीति करने वालों को श्रद्धालुओं की भावना का सम्मान करना चाहिए था। चिन्मयानंद के मुताबिक जब उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मुस्लिम भाई द्वारा हनुमान मंदिर के लिए जमीन दान देने की बात बताई तो वह अचंभित रह गए।
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चिन्मयानंद ने कहा कि दान की गई कृषि भूमि को पूजा योग्य बनाने के लिए 11 ब्राह्मण यहां 18 से 23 अक्तूबर तक यज्ञ करेंगे। पांच दिन तक लगातार यज्ञ के साथ ही भंडारे का आयोजन किया गया है। यज्ञ की व्यवस्था भानु प्रताप शास्त्री और सत्येंद्र पाठक को सौंपी गई है। भंडारे आदि की व्यवस्था के लिए देवेंद्र गुप्ता को नामित किया गया है।
ये लोग रहे मौजूद
भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र गुप्ता, भानु प्रताप शास्त्री, अरुण रस्तोगी उर्फ मदन, सत्यप्रकाश आर्य, हेतराम गंगवार, प्रभात सहाय, भगत जी, ईशपाल, शीलेंद्र मोहन, सिद्धार्थ गुप्ता, कुलदीप गुप्ता, अनूप गुप्ता, रितिक गुप्ता, संजीव गुप्ता, एडवोकेट शिवराम, शालिनी, एडवोकेट फिरोज हसन खान, अशोक अग्रवाल, जाकिर अली मंसूरी, कानूनगो अवधेश सक्सेना, लेखपाल अंकुर चौधरी आदि।