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होम ट्यूशन पढ़ाकर यूपीटीयू में किया टॉप
शाहजहांपुर
Updated Wed, 20 May 2015 11:56 PM IST
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प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल न होने पर संसाधनों की कमी का रोना रोने वाले युवाओं के लिए शहर के मोहल्ला रंगमहला के ऋषभ रस्तोगी एक बेहतर प्रेरणास्रोत साबित हुए हैं। उन्होंने अभावों के बीच रहकर यूपीटीयू बीटेक सेकेंड इयर कंपटीशन में प्रदेश में सर्वोच्च पायदान हासिल करके सिद्घ कर दिया कि प्रतिभाएं संसाधनों की मोहताज नहीं होती है।
मोहल्ला रंगमहला के आभूषण कारीगर अनिल रस्तोगी की एक छोटी सी दुकान है। मेहनत करके बड़े बेटे हिमांशु को एमसीए करा दिया। अधिकांश पूंजी उसी में लग गई। अब वह नोएडा की एक कंपनी में इंजीनियर है। बेटी सुरभि आर्य महिला इंटर कॉलेज से बीए कर चुकी है। बेटा ऋषभ एसएस कॉलेज से बीएससी कर रहा है। इसी वर्ष उसने बीएससी फाइनल इयर की परीक्षा दी। इसी दौरान उसने यूपीटीयू की सेकेंड इयर में भी एप्लाई कर दिया।
दोतरफा पढ़ाई का बोझ होने के साथ ही पढ़ाई का खर्च चलाने के लिए बच्चों को होम ट्यूशन भी दी। इसके बावजूद ऋषभ ने बेहतर टाइम मैनेजमेंट के साथ पढ़ाई की और प्रदेश में टॉप किया। ऋषभ कहते हैं कि वह अपनी सफलता का पूरा श्रेय दादी विमला रस्तोगी, मां रानी रस्तोगी, पिता अनिल और पूरे परिवार को देते हैं। कहते हैं कि उनके परिवार ने पढ़ाई करने के लिए हमेशा उत्साहवर्धन किया।
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ऋषभ के अनुसार वह सुबह छह बजे से लेकर आठ बजे तक होम ट्यूशन पढ़ाते थे। आठ बजे से लेकर 11 बजे तक यूपीटीयू की तैयारी करते थे। इसके बाद कॉलेज और कोचिंग में पढ़ाई करते थे। रात आठ बजे से 12 बजे तक बीएससी की पढ़ाई करते थे। कहते हैं कि उम्मीद थी कि रैंक अच्छी आएगी, लेकिन टॉप करने पर बहुत खुशी मिल रही है। घरवाले अपने होनहार की जीत पर फूले नहीं समा रहे हैं। अपने बेटे के साथ ही घर आने-जाने वाले लोगों को मिठाई खिलाकर अपने बेटे के बारे में बता रहे हैं।
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मोहल्ला रंगमहला के आभूषण कारीगर अनिल रस्तोगी की एक छोटी सी दुकान है। मेहनत करके बड़े बेटे हिमांशु को एमसीए करा दिया। अधिकांश पूंजी उसी में लग गई। अब वह नोएडा की एक कंपनी में इंजीनियर है। बेटी सुरभि आर्य महिला इंटर कॉलेज से बीए कर चुकी है। बेटा ऋषभ एसएस कॉलेज से बीएससी कर रहा है। इसी वर्ष उसने बीएससी फाइनल इयर की परीक्षा दी। इसी दौरान उसने यूपीटीयू की सेकेंड इयर में भी एप्लाई कर दिया।
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दोतरफा पढ़ाई का बोझ होने के साथ ही पढ़ाई का खर्च चलाने के लिए बच्चों को होम ट्यूशन भी दी। इसके बावजूद ऋषभ ने बेहतर टाइम मैनेजमेंट के साथ पढ़ाई की और प्रदेश में टॉप किया। ऋषभ कहते हैं कि वह अपनी सफलता का पूरा श्रेय दादी विमला रस्तोगी, मां रानी रस्तोगी, पिता अनिल और पूरे परिवार को देते हैं। कहते हैं कि उनके परिवार ने पढ़ाई करने के लिए हमेशा उत्साहवर्धन किया।
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ऋषभ के अनुसार वह सुबह छह बजे से लेकर आठ बजे तक होम ट्यूशन पढ़ाते थे। आठ बजे से लेकर 11 बजे तक यूपीटीयू की तैयारी करते थे। इसके बाद कॉलेज और कोचिंग में पढ़ाई करते थे। रात आठ बजे से 12 बजे तक बीएससी की पढ़ाई करते थे। कहते हैं कि उम्मीद थी कि रैंक अच्छी आएगी, लेकिन टॉप करने पर बहुत खुशी मिल रही है। घरवाले अपने होनहार की जीत पर फूले नहीं समा रहे हैं। अपने बेटे के साथ ही घर आने-जाने वाले लोगों को मिठाई खिलाकर अपने बेटे के बारे में बता रहे हैं।