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Holi 2023: खुदागंज में धुलेंडी पर नहीं, पंचमी पर होती है रंगों की होली, गधे पर बैठ निकलते हैं 'लाट साहब'

Wed, 08 Mar 2023 12:09 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 08 Mar 2023 12:09 AM IST
सार

खुदागंज कस्बे में रंग पंचमी पर रंग और गुलाल से होली खेली जाती है। इस दिन निकलने वाले जुलूस के लिए मोहल्ला लक्ष्मीनगर के किसी व्यक्ति को लाट साहब बनाया जाता है।

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Holi play with colours on Rangpanchami in Khudaganj shahjahanpur
गधे पर बैठकर निकलते हैं लाट साहब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शाहजहांपुर के खुदागंज कस्बे में होली मनाने की अनूठी परंपरा है। यहां धुलेंडी के दिन कोई भी रंग नहीं खेलता है, लेकिन रंग पंचमी पर पूरा क्षेत्र और नगर रंग और गुलाल से सराबोर हो जाता है। लाट साहब को जूतों की माला पहनाकर गधे पर बैठाकर जुलूस निकाला जाता है।

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जिला मुख्यालय से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित खुदागंज नगर अमर बलिदानी ठाकुर रोशन सिंह की जन्मभूमि है। यहां से लगभग आठ किलोमीटर दूर नवादा दरोवस्त ठाकुर रोशन सिंह का पैतृक गांव है। पीलीभीत और बरेली जनपद की सीमा से सटे खुदागंज कस्बे में रंग पंचमी का विशेष महत्व है। इस दिन निकलने वाले जुलूस के लिए मोहल्ला लक्ष्मीनगर के किसी व्यक्ति को लाटसाहब बनाया जाता है।

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लाट साहब का सलामी देते हैं थाना प्रभारी 

जब जुलूस निकलता है, तो खुदागंज थाना प्रभारी लाट साहब को सलामी देते हैं। पुलिस की ओर से लाट साहब को शराब और नकदी धनराशि सम्मान स्वरूप भेंट की जाती है। जुलूस में शामिल लोग एक दूसरे के रंग लगाते चलते है। जुलूस लक्ष्मीपुर से पक्का तालाब, जैन मोहल्ला मेन मार्केट, साहूकारा होते हुए गर्रा (देवहा) नदी पर जाकर समाप्त होता है।

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छावनी बन जाता है नगर, मुस्तैद रहती है पुलिस

रंग पंचमी पर निकलने वाले लाट साहब के जुलूस की संवेदनशीलता को ध्यान को में रखकर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया जाता है। इस दौरान पूरा नगर छावनी में बदला नजर आता है। जुलूस की सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, पीएसी के साथ अर्धसैनिक बल भी सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहते हैं।

वर्षों से चली आ रही है परंपरा

खुदागंज नगर के पूर्व चेयरमैन सुधीर सिंह बताते है कि होलिका दहन बाद पांचवें दिन रंग पंचमी को लाटसाहब का जुलूस निकाला जाता है। यह परंपरा कई दशक पुरानी है। व्यापार मंडल अध्यक्ष कृपाशंकर रस्तोगी कहते है कि यह परंपरा अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है।

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