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डेंगू से अधिवक्ता की मौत
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शाहजहांपुर। एक अधिवक्ता और भाजपा कार्यकर्ता की डेंगू से मौत हो गई। उनका बरेली के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
आनंद बिहार कॉलोनी निवासी एडवोकेट सुबोध कुमार सिंह (26) को करीब नौ दिन पहले बुखार आया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद सुबोध की तबीयत और बिगड़ने लगी। परिजनों ने सुबोध को बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से फायदा न होने पर उनको बरेली के ही दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे सुबोध की मौत हो गई। परिजन सुबोध के शव को मदनापुर के पैतृक गांव बरिखास लेकर गए। जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सुबोध की शादी करीब दो साल पहले मदनापुर कस्बे के रहने वाले आमोद सिंह की बेटी सुहानी से हुई थी। पांच अगस्त को सुबोध की पत्नी सुहानी ने एक बेटे को जन्म दिया था। करीब एक घंटे के बाद बच्चे की मौत हो गई थी। सुबोध भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में काफी सक्रिय थे। कुछ समय से सुबोध ने वकालत शुरू की थी। उनकी मां सुशीला देवी मदनापुर ब्लॉक के फिरोजपुर डूडा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक हैं।
अब तक कई लोगों की जान ले चुका है डेंगू
निगोही, अल्हागंज, मिर्जापुर, मदनापुर, कलान क्षेत्र में डेंगू से लोगों की मौत हो चुकी है। ज्यादातर बुखार से पीड़ित निजी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंच रहे हैं। प्राइवेट लैब पर मरीज जांच करा रहे हैँ। इनमें डेंगू की पुष्टि होती है। वे मरीज सरकारी अस्पताल में जाने के बजाए बरेली के निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। अभी तक बरेली, फर्रुखाबाद के अस्पतालों में शाहजहांपुर के रहने वाले डेंगू पीड़ितों की मौत हुई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट लैब में होने वाली जांच को नहीं मानता है। सरकारी अस्पताल में एलाइजा जांच में डेंगू आने पर ही स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि करता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार डेंगू पीड़ित एक भी मरीज की मौत नहीं है।
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आनंद बिहार कॉलोनी निवासी एडवोकेट सुबोध कुमार सिंह (26) को करीब नौ दिन पहले बुखार आया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद सुबोध की तबीयत और बिगड़ने लगी। परिजनों ने सुबोध को बरेली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां से फायदा न होने पर उनको बरेली के ही दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे सुबोध की मौत हो गई। परिजन सुबोध के शव को मदनापुर के पैतृक गांव बरिखास लेकर गए। जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सुबोध की शादी करीब दो साल पहले मदनापुर कस्बे के रहने वाले आमोद सिंह की बेटी सुहानी से हुई थी। पांच अगस्त को सुबोध की पत्नी सुहानी ने एक बेटे को जन्म दिया था। करीब एक घंटे के बाद बच्चे की मौत हो गई थी। सुबोध भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में काफी सक्रिय थे। कुछ समय से सुबोध ने वकालत शुरू की थी। उनकी मां सुशीला देवी मदनापुर ब्लॉक के फिरोजपुर डूडा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक हैं।
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अब तक कई लोगों की जान ले चुका है डेंगू
निगोही, अल्हागंज, मिर्जापुर, मदनापुर, कलान क्षेत्र में डेंगू से लोगों की मौत हो चुकी है। ज्यादातर बुखार से पीड़ित निजी अस्पतालों में इलाज कराने पहुंच रहे हैं। प्राइवेट लैब पर मरीज जांच करा रहे हैँ। इनमें डेंगू की पुष्टि होती है। वे मरीज सरकारी अस्पताल में जाने के बजाए बरेली के निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। अभी तक बरेली, फर्रुखाबाद के अस्पतालों में शाहजहांपुर के रहने वाले डेंगू पीड़ितों की मौत हुई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट लैब में होने वाली जांच को नहीं मानता है। सरकारी अस्पताल में एलाइजा जांच में डेंगू आने पर ही स्वास्थ्य विभाग डेंगू की पुष्टि करता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े के अनुसार डेंगू पीड़ित एक भी मरीज की मौत नहीं है।
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