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हरितालिका का व्रत रख सुहागिनों ने की अखंड सुहाग की कामना
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ाहजहांपुर में शिव प्राचीन मंदिर में हारितालिका तीज की पूजष अर्चना करती महिलाए । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिनों ने हरितालिका तीज का निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि की कामना की। सौभाग्यवती महिलाओं ने लाल रंग के नये वस्त्र पहनकर, मेहंदी लगाकर, सोलह शृंगार किया।
मंगलवार को हरतालिका तीज पर सुहागिनों ने निर्जला उपवास रख विधि विधान से माता गौरी एवं भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। घरों में उत्सव का माहौल रहा। लोगों ने पूजा की चौकी पर मिटटी से बनी माता गौरी एवं शिव की मूर्तियां स्थापित की। पूजा की चौकी को केले के पत्ते से सजाया गया। इसके बाद माता पार्वती और भोलेनाथ को नए वस्त्र पहनाए गए। माता गौरी को सभी तरह के श्रृंगार की सामग्री अर्पित की गई। फिर पंडित के सानिध्य में माता गौरी एवं शिव की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। माता गौरी एवं भगवान शंकर को विभिन्न तरह के फल एवं पकवान चढ़ाए गए। इसके बाद व्रतियों ने पंडितों से हरतालिका तीज की कथा सुनीं। शिव-पार्वती से अखंड सुहाग की कामना की।
नैमिष के ज्योतिष सत्यम दीक्षित ने बताया कि प्रकृति और प्रेम के भाव से जुड़े इस पर्व पर महिलाएं शुद्ध मिट्टी से शिव-पार्वती और श्री गणेश की प्रतीकात्मक मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजन में रोली, चावल, पुष्प, बेलपत्र, नारियल, दूर्वा, मिठाई आदि से भगवान का भक्ति भाव से पूजन किया जाता है।
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मंगलवार को हरतालिका तीज पर सुहागिनों ने निर्जला उपवास रख विधि विधान से माता गौरी एवं भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। घरों में उत्सव का माहौल रहा। लोगों ने पूजा की चौकी पर मिटटी से बनी माता गौरी एवं शिव की मूर्तियां स्थापित की। पूजा की चौकी को केले के पत्ते से सजाया गया। इसके बाद माता पार्वती और भोलेनाथ को नए वस्त्र पहनाए गए। माता गौरी को सभी तरह के श्रृंगार की सामग्री अर्पित की गई। फिर पंडित के सानिध्य में माता गौरी एवं शिव की विधिविधान से पूजा-अर्चना की गई। माता गौरी एवं भगवान शंकर को विभिन्न तरह के फल एवं पकवान चढ़ाए गए। इसके बाद व्रतियों ने पंडितों से हरतालिका तीज की कथा सुनीं। शिव-पार्वती से अखंड सुहाग की कामना की।
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नैमिष के ज्योतिष सत्यम दीक्षित ने बताया कि प्रकृति और प्रेम के भाव से जुड़े इस पर्व पर महिलाएं शुद्ध मिट्टी से शिव-पार्वती और श्री गणेश की प्रतीकात्मक मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजन में रोली, चावल, पुष्प, बेलपत्र, नारियल, दूर्वा, मिठाई आदि से भगवान का भक्ति भाव से पूजन किया जाता है।
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