{"_id":"5d7010d68ebc3e93d02839b3","slug":"go-sadan-shahjahanpur-news-bly3749505128","type":"story","status":"publish","title_hn":"योगी जी! अस्थाई गोशाला में और दो गायों ने दम तोड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
योगी जी! अस्थाई गोशाला में और दो गायों ने दम तोड़ा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जलालाबाद। तहसील क्षेत्र के गांव झौहना में बनी अस्थाई गोशाला में गोवंशीय पशुओं को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। सूखे भूसे और दूषित पानी पर निर्भर यहां रहने वाले जानवर एक-एक कर दम तोड़ते जा रहे हैं। एक पशु की मंगलवार को तो एक की बुधवार को मौत हो गई। वहीं चार पशु मरणासन्न स्थिति में हैं। जिनमें से एक बच्चे को जन्म देने वाली है।
गोशाला की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसो दूर है। जिससे यहां बंद करीब 60 बेजुबानों का बुरा हाल है। छुट्टा घूमने वाले पशुओं से लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए योगी सरकार ने अस्थायी गोशालाओं का निर्माण करवाया था। शुरुआत में इन गोशालाओं को लेकर अधिकारी गंभीर रहे, लेकिन अब उनकी तरफ कोई झांकने तक नही जाता। जिससे यह गोशालाएं जानवरों के आश्रय स्थल की जगह उनकी कब्रगाह बनकर रह गई है। गांव झौहना की गौशाला इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। यहां बंद करीब साठ जानवरों को बीते दो महीनों से बहुत ही सीमित मात्रा में सूखा भूसा ही नसीब हो पा रहा है। पीने के लिए जमीन में गड्ढा खोदकर उसे नल के पानी से भर दिया जाता है, जानवर वहीं पानी पीते रहते हैं। कई-कई दिन तक भरा रहने वाला पानी भी दूषित हो जाता है।
इस गोशाला के पास ही करीब दस बीघा जमीन चारे के लिए है। पहले चारा बोया गया था जो दो महीने पहले खत्म हो गया। अब समस्या यह है कि चारा तैयार करने को न पानी और न ही खाद के लिए पैसे है। यही नहीं जो चारा पहले तैयार हुआ था उस जमीन पर बाड़ न होने के कारण गोशाला से अधिक आवारा घूमने वाले जानवर चारा खा गए।
विज्ञापन
खास बात यह है कि गोशाला में आहार रजिस्टर रखा है उसमें प्रतिदिन के हिसाब से जानवरों को दिए जाने वाले खाने में हरा चारा ही नहीं दाना भी देना दर्शाया जाता है। उसमें किसी न किसी अधिकारी के हस्ताक्षर भी बने हैं।
लगातार हो रहे पशुओं की मौत के बाद भी यहां कभी कभार पहुंचने वाले पशु चिकित्सक बीमार जानवर को पास आकर देखने के बजाय बाहर ही गौपालक को बुलाकर गोलियां देकर चले जाते हैं। बताते है कि हर मर्ज के लिए एक ही तरह की गोली दे दी जाती है।
इस गोशाला में जानवरों की देखभाल के लिए पांच गो पालक लगाए गए हैं। जो करीब आठ महीने पहले अस्तित्व में आई गोशाला के समय से यहां जानवरों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन लोगों के अनुसार उन्हें आठ महीनों में अभी तक प्रशासन ने फूटी कौड़ी भी नही दी।
ग्राम पंचायत सेक्रेटरी को छोड़कर कोई भी अधिकारी गोशाला की समस्या जानने नहीं आता है महीने में कभी आने वाले अधिकारी एक दिन में ही पूरे महीने की हाजिरी भर देते हैं। जानवर बीमारी के अलावा भूख से भी मर रहे हैं।
देवनारायण, निवासी गुरैया
इस गोशाला में हरा चारा और दाना तो दूर जानवरों को लंबे समय से भरपेट भूसा भी नसीब नही हो रहा है। जिससे जानवरों की बुरी दशा है। इससे अच्छा तो सरकार इन्हें आजाद कर दे।
ओमवीर, निवासी गांव खलसा
विज्ञापन
गोशाला की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से कोसो दूर है। जिससे यहां बंद करीब 60 बेजुबानों का बुरा हाल है। छुट्टा घूमने वाले पशुओं से लोगों को होने वाली परेशानी को देखते हुए योगी सरकार ने अस्थायी गोशालाओं का निर्माण करवाया था। शुरुआत में इन गोशालाओं को लेकर अधिकारी गंभीर रहे, लेकिन अब उनकी तरफ कोई झांकने तक नही जाता। जिससे यह गोशालाएं जानवरों के आश्रय स्थल की जगह उनकी कब्रगाह बनकर रह गई है। गांव झौहना की गौशाला इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। यहां बंद करीब साठ जानवरों को बीते दो महीनों से बहुत ही सीमित मात्रा में सूखा भूसा ही नसीब हो पा रहा है। पीने के लिए जमीन में गड्ढा खोदकर उसे नल के पानी से भर दिया जाता है, जानवर वहीं पानी पीते रहते हैं। कई-कई दिन तक भरा रहने वाला पानी भी दूषित हो जाता है।
विज्ञापन
इस गोशाला के पास ही करीब दस बीघा जमीन चारे के लिए है। पहले चारा बोया गया था जो दो महीने पहले खत्म हो गया। अब समस्या यह है कि चारा तैयार करने को न पानी और न ही खाद के लिए पैसे है। यही नहीं जो चारा पहले तैयार हुआ था उस जमीन पर बाड़ न होने के कारण गोशाला से अधिक आवारा घूमने वाले जानवर चारा खा गए।
विज्ञापन
खास बात यह है कि गोशाला में आहार रजिस्टर रखा है उसमें प्रतिदिन के हिसाब से जानवरों को दिए जाने वाले खाने में हरा चारा ही नहीं दाना भी देना दर्शाया जाता है। उसमें किसी न किसी अधिकारी के हस्ताक्षर भी बने हैं।
लगातार हो रहे पशुओं की मौत के बाद भी यहां कभी कभार पहुंचने वाले पशु चिकित्सक बीमार जानवर को पास आकर देखने के बजाय बाहर ही गौपालक को बुलाकर गोलियां देकर चले जाते हैं। बताते है कि हर मर्ज के लिए एक ही तरह की गोली दे दी जाती है।
इस गोशाला में जानवरों की देखभाल के लिए पांच गो पालक लगाए गए हैं। जो करीब आठ महीने पहले अस्तित्व में आई गोशाला के समय से यहां जानवरों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन लोगों के अनुसार उन्हें आठ महीनों में अभी तक प्रशासन ने फूटी कौड़ी भी नही दी।
ग्राम पंचायत सेक्रेटरी को छोड़कर कोई भी अधिकारी गोशाला की समस्या जानने नहीं आता है महीने में कभी आने वाले अधिकारी एक दिन में ही पूरे महीने की हाजिरी भर देते हैं। जानवर बीमारी के अलावा भूख से भी मर रहे हैं।
देवनारायण, निवासी गुरैया
इस गोशाला में हरा चारा और दाना तो दूर जानवरों को लंबे समय से भरपेट भूसा भी नसीब नही हो रहा है। जिससे जानवरों की बुरी दशा है। इससे अच्छा तो सरकार इन्हें आजाद कर दे।
ओमवीर, निवासी गांव खलसा