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जेनेटिक अध्ययन के लिए भारत बना सोने की खान
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 12 Feb 2016 09:01 PM IST
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स्वामी शुकदेवानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय (एसएस कॉलेज) में विज्ञान संकाय की ओर से इंटरनेशनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कांफ्रेंस में रसायन, जैव और पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार विषयक प्रमुख रहे। इसमें मुख्य अतिथि सीसीएमबी हैदराबाद के पूर्व निदेशक एवं भारत में फिंगर प्रिंटिंग के जनक माने जाने वाले पद्मश्री प्रोफेसर लालजी सिंह ने प्रोजेक्टर के जरिए देश-दुनिया के अध्ययन पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि करीब के संबंधों में विवाह करने पर बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। भारत में अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इससे बीमारियों का खतरा कम होगा। उनका मानना है कि नजदीकी संबंध रुकने से काफी हद तक बीमारियों के वायरस स्वत: कम हो सकते हैं।
इस अवसर पर प्रो. लालजी सिंह ने कहा कि भारत दुनिया की सर्वाधिक जैविकीय विविधता वाला देश है, जो सारी दुनिया के मानव विज्ञानियों के लिए अध्ययन का विषय बना हुआ है। भारत के लोगों में भाषा, संस्कार, सामाजिक संरचना, पहनावे आदि में अंतर दिखाई देता है। यह अंतर भारत की आनुवंशिक वैविध्यता को बचाए हुए है। इस कारण दुनिया भर के जेनेटिक्स का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के लिए भारत सोने की खान है। प्रो. सिंह ने कहा कि देश में साढ़े चार हजार से अधिक आनुवंशिक जीनोम कोड पाए जाते हैं। इतना ही नहीं, यहां पांच सौ से अधिक जनजातियां हैं, जो अपनी भाषा, पहनावे, संस्कार और संस्कृति के कारण भिन्न हैं।
विशिष्ट अतिथि टर्की के डॉ. अहमद अनवर ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड द्वारा हुए क्रांतिकारी बदलावों की जानकारी दी। कहा: खाद्य क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड तकनीक का इस्तेमाल कर न केवल उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि उत्पादित वस्तुओं को सुरक्षित रखने और उन्हें लोगों तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है। इस तकनीक से सुदूर क्षेत्रों में फल, सब्जियों आदि को सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है।
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समापन सत्र में मुख्य अतिथि विल्सन कॉलेज मुंबई के प्रो. डीवी प्रभु, विशिष्ट अतिथि डॉ. ज्योत्सना चतुर्वेदी, डॉ. प्रियव्रत द्विवेदी आदि ने अपने अनुभव बांटे। इस अवसर पर प्राध्यापक वर्ग में डॉ. कहकशां बेगम, केशव शुक्ला, डॉ. अनिल सिंह आदि ने और शोधार्थी वर्ग में विवेक सक्सेना, गिरधारी चौरसिया, महेश गुप्ता आदि ने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिन्हें पुरस्कृत भी किया गया।
पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद की अध्यक्षता में हुई कांफ्रेंस में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. एके मिश्रा ने और आभार संयोजक डॉ. आलोक सिंह ने व्यक्त किया। संचालन शिप्रा तिवारी और अपूर्वा शर्मा ने किया। व्यवस्था में डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. मीना शर्मा, डॉ. एमके वर्मा, डॉ. आदर्श पांडेय, डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री, डॉ. शिखा सक्सेना, डॉ. निधि त्रिपाठी, डॉ. राजकमल रस्तोगी, डॉ. उस्मान, डॉ. अनिल कुमार आदि का योगदान रहा।
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इस अवसर पर प्रो. लालजी सिंह ने कहा कि भारत दुनिया की सर्वाधिक जैविकीय विविधता वाला देश है, जो सारी दुनिया के मानव विज्ञानियों के लिए अध्ययन का विषय बना हुआ है। भारत के लोगों में भाषा, संस्कार, सामाजिक संरचना, पहनावे आदि में अंतर दिखाई देता है। यह अंतर भारत की आनुवंशिक वैविध्यता को बचाए हुए है। इस कारण दुनिया भर के जेनेटिक्स का अध्ययन करने वाले वैज्ञानिकों के लिए भारत सोने की खान है। प्रो. सिंह ने कहा कि देश में साढ़े चार हजार से अधिक आनुवंशिक जीनोम कोड पाए जाते हैं। इतना ही नहीं, यहां पांच सौ से अधिक जनजातियां हैं, जो अपनी भाषा, पहनावे, संस्कार और संस्कृति के कारण भिन्न हैं।
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विशिष्ट अतिथि टर्की के डॉ. अहमद अनवर ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड द्वारा हुए क्रांतिकारी बदलावों की जानकारी दी। कहा: खाद्य क्षेत्र में अल्ट्रासाउंड तकनीक का इस्तेमाल कर न केवल उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है, बल्कि उत्पादित वस्तुओं को सुरक्षित रखने और उन्हें लोगों तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है। इस तकनीक से सुदूर क्षेत्रों में फल, सब्जियों आदि को सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है।
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समापन सत्र में मुख्य अतिथि विल्सन कॉलेज मुंबई के प्रो. डीवी प्रभु, विशिष्ट अतिथि डॉ. ज्योत्सना चतुर्वेदी, डॉ. प्रियव्रत द्विवेदी आदि ने अपने अनुभव बांटे। इस अवसर पर प्राध्यापक वर्ग में डॉ. कहकशां बेगम, केशव शुक्ला, डॉ. अनिल सिंह आदि ने और शोधार्थी वर्ग में विवेक सक्सेना, गिरधारी चौरसिया, महेश गुप्ता आदि ने शोधपत्र प्रस्तुत किए, जिन्हें पुरस्कृत भी किया गया।
पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद की अध्यक्षता में हुई कांफ्रेंस में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. एके मिश्रा ने और आभार संयोजक डॉ. आलोक सिंह ने व्यक्त किया। संचालन शिप्रा तिवारी और अपूर्वा शर्मा ने किया। व्यवस्था में डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. मीना शर्मा, डॉ. एमके वर्मा, डॉ. आदर्श पांडेय, डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री, डॉ. शिखा सक्सेना, डॉ. निधि त्रिपाठी, डॉ. राजकमल रस्तोगी, डॉ. उस्मान, डॉ. अनिल कुमार आदि का योगदान रहा।