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Shahjahanpur News: सरकारी स्कूलों में खेलों के नाम पर खेल...संसाधनों का अभाव
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शाहजहांपुर। सरकारी स्कूलों में खेल के नाम पर खेल हो रहा है। संसाधनों का अभाव होने के कारण विद्यालयों में बेहतर खिलाड़ी तैयार नहीं हो पा रहे हैं। स्कूलों में मैदान के साथ ही खेल शिक्षकों का भी अभाव है। ऐसे में खेलों के नाम पर मात्र खानापूर्ति हो रही है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के शहरी स्कूलों में जीआईसी, संजय सरस्वती कॉलेज, क्रिश्चियन गर्ल्स हाईस्कूल के अलावा अधिकतर कॉलेजों में मैदान नहीं है। देवी प्रसाद इंटर कॉलेज में खेल मैदान पर विवाद चल रहा है। जनता इंटर कॉलेज का मैदान विद्यालय से कहीं अलग है। आर्य महिला इंटर कॉलेज, आर्य कन्या पाठशाला, नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज, जीजीआईसी, एसपी कॉलेज समेत कई स्कूलों के पास भी मैदान का अभाव है।
इसी तरह अधिकतर स्कूलों के पास खेल शिक्षक तक नहीं हैं। जहां पर खेल शिक्षक हैं। वहां स्टाफ के अभाव में उनसे अन्य कक्षाओं में शिक्षण कार्य कराया जा रहा। ऐसी स्थिति में खेल रोजाना नहीं हो रहे और खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। हालत यह है कि जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में विभिन्न खेलों की गिनी-चुनी टीमें ही पहुंच पाती हैं। उन्हीं के बीच खेल कराकर मंडल के लिए भेज दिया जाता है।
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प्रतियोगिता नजदीक आने पर कराते हैं अभ्यास
जनपद स्तरीय रैली नजदीक आने पर खेलों का स्टेडियम में अभ्यास शुरू कराया जाता है। रैली निपटने के बाद फिर से खेल उपकरण बंद कर रख दिए जाते हैं। बीते कई वर्ष से खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर जिले के बाहर जीत दर्ज नहीं कर पाए हैं।
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बेसिक शिक्षा का हाल भी खेल में खराब
माध्यमिक के साथ ही बेसिक की स्थिति भी खेलों में बेहतर नहीं है। परिषदीय विद्यालयों में 235 अनुदेशकों को खेल की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन अल्प मानदेय के चलते उनका मन नियमित खेल कराने में नहीं लगता है। बेसिक में प्रतिवर्ष प्राइमरी में पांच हजार और उच्च व कंपाेजिट में दस हजार रुपये खेल के सामान के लिए दिए जाते हैं। इतने संसाधन होने के बावजूद खेल प्रतिभाएं ऊंचा मुकाम हासिल नहीं कर पा रही हैं।
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स्कूलों में खेल सामान के लिए धनराशि जारी कर दी गई है। अनुदेशकों को रोजाना ही खेल कराने के निर्देश दिए हैं। कुछ स्कूलाें के खेलकूद की तैयारी के नियमित फोटो भी आते हैं।
- दिव्या गुप्ता, बीएसए
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माध्यमिक स्कूलों में कई के पास अपने मैदान हैं। वहां खेल कराया जाता है। खेलकूद कराने के प्रत्येक स्कूल को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूलों में प्रतियोगिताएं चल भी रही हैं।
- हरिवंश कुमार, डीआईओएस
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माध्यमिक शिक्षा विभाग के शहरी स्कूलों में जीआईसी, संजय सरस्वती कॉलेज, क्रिश्चियन गर्ल्स हाईस्कूल के अलावा अधिकतर कॉलेजों में मैदान नहीं है। देवी प्रसाद इंटर कॉलेज में खेल मैदान पर विवाद चल रहा है। जनता इंटर कॉलेज का मैदान विद्यालय से कहीं अलग है। आर्य महिला इंटर कॉलेज, आर्य कन्या पाठशाला, नेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज, जीजीआईसी, एसपी कॉलेज समेत कई स्कूलों के पास भी मैदान का अभाव है।
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इसी तरह अधिकतर स्कूलों के पास खेल शिक्षक तक नहीं हैं। जहां पर खेल शिक्षक हैं। वहां स्टाफ के अभाव में उनसे अन्य कक्षाओं में शिक्षण कार्य कराया जा रहा। ऐसी स्थिति में खेल रोजाना नहीं हो रहे और खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं। हालत यह है कि जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता में विभिन्न खेलों की गिनी-चुनी टीमें ही पहुंच पाती हैं। उन्हीं के बीच खेल कराकर मंडल के लिए भेज दिया जाता है।
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प्रतियोगिता नजदीक आने पर कराते हैं अभ्यास
जनपद स्तरीय रैली नजदीक आने पर खेलों का स्टेडियम में अभ्यास शुरू कराया जाता है। रैली निपटने के बाद फिर से खेल उपकरण बंद कर रख दिए जाते हैं। बीते कई वर्ष से खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर जिले के बाहर जीत दर्ज नहीं कर पाए हैं।
बेसिक शिक्षा का हाल भी खेल में खराब
माध्यमिक के साथ ही बेसिक की स्थिति भी खेलों में बेहतर नहीं है। परिषदीय विद्यालयों में 235 अनुदेशकों को खेल की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन अल्प मानदेय के चलते उनका मन नियमित खेल कराने में नहीं लगता है। बेसिक में प्रतिवर्ष प्राइमरी में पांच हजार और उच्च व कंपाेजिट में दस हजार रुपये खेल के सामान के लिए दिए जाते हैं। इतने संसाधन होने के बावजूद खेल प्रतिभाएं ऊंचा मुकाम हासिल नहीं कर पा रही हैं।
स्कूलों में खेल सामान के लिए धनराशि जारी कर दी गई है। अनुदेशकों को रोजाना ही खेल कराने के निर्देश दिए हैं। कुछ स्कूलाें के खेलकूद की तैयारी के नियमित फोटो भी आते हैं।
- दिव्या गुप्ता, बीएसए
माध्यमिक स्कूलों में कई के पास अपने मैदान हैं। वहां खेल कराया जाता है। खेलकूद कराने के प्रत्येक स्कूल को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूलों में प्रतियोगिताएं चल भी रही हैं।
- हरिवंश कुमार, डीआईओएस