{"_id":"61c37b7044336c57c1031fdb","slug":"farmers-setting-new-dimensions-of-crop-production-with-modern-technology-shahjahanpur-news-bly4701433137","type":"story","status":"publish","title_hn":"कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से फल उत्पादन के नए आयाम स्थापित कर रहे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक से फल उत्पादन के नए आयाम स्थापित कर रहे किसान
विज्ञापन
हरमेज सिंह।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। कृषि प्रधान जिले में जनपद के अधिसंख्य किसान अभी तक गेहूं, गन्ना और धान की फसलें प्रमुख रूप से उगाते रहे, लेकिन अब राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के सहयोग से उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों के आधार पर न सिर्फ सहफसली खेती शुरू की है, वह ऐसी फसलें उगाने लगे हैं, जिनकी बाजार में मांग अधिक है। इसके तहत कई किसानों ने पारंपरिक फसल उत्पादन के समानांतर दक्षिण भारत की तरह केला के साथ हाइब्रीड फल-सब्जियों की खेती भी शुरू कर दी है।
लगभग 4.50 लाख किसानों वाले जनपद में करीब एक लाख किसान गन्ना की खेती कर रहे हैं। गन्ना की उपज लेने वाले किसानों को कई कारणों से सहफसली खेती भाने लगी है। हालांकि, अभी बमुश्किल दस हजार गन्ना किसान करीब 8000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में शरदकालीन गन्ना के साथ तोरिया, मटर, मसूर, चना, आलू, गोभी, लहसुन, धनिया, पालक, गेहूं, मूली आदि फसलें उगा रहे हैं। चूंकि, गन्ने के साथ आलू की फसल अधिक लाभकारी सिद्ध हो रही है और प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल आलू की पैदावार हो जाती है। इसलिए अन्य किसानों का भी इस ओर रुझान बढ़ा है। यही नहीं, औद्यानिक खेती के तौर पर जैतीपुर क्षेत्र में केला और कटरा-खुदागंज क्षेत्र में शिमला मिर्च, ब्रोकली आदि सब्जियों का रकबा भी बढ़ रहा है।
किसानों की बात
मैने सिंगल बड से ट्रेंच विधि से गन्ने की बुआई की है। इससे गन्ना की दो लाइनों के बीच में अन्य फसलों के लिए काफी जगह मिल गई है। गन्ना के बीच दो लाइनों में आलू की बुआई की है। कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव पर गन्ने को पेयर्ड रो तकनीक से बोया है और दो लाइनों के बीच एक लाइन में मटर बोई है। इस तरह गन्ने के साथ मुझे दो अतिरिक्त फसलें मिल रही हैं।
विज्ञापन
-हरमेज सिंह, पड़री खमरिया (बंडा)
पहले सिर्फ गन्ना की उपज मिलती थी, लेकिन इस बार पांच एकड़ खेत में गन्ना के साथ लाही, आलू, चना, मटर और धनियां भी उगाई है। लाही का रकबा ज्यादा रखा है ताकि सरसों के तेल की घरेलू जरूरत पूरी होने के साथ अतिरिक्त आय हो सके। कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों के सुझाव पर अमल करने से अब एक साथ कई फसलें मिलने से खेती से कमाई बढ़ गई है।
-रामपाल शुक्ला, नरायनपुर गंगा (बंडा)
मैने गन्ना के साथ मिर्च, टमाटर, मटर, चना और पपीता लगाया है। इस प्रकार गन्ना के साथ एक ही खेत में खाली जगह पर अन्य फसलों को बोकर मुझे खेती से अधिक लाभ मिलने लगा है। सहफसली खेती से पानी की बचत होने लगी है और खेत में सीमित नमी से खरपतवारों का प्रकोप भी कम हो गया है। बाजार में पपीता का अच्छा भाव मिलने की उम्मीद है।
-मुनेंद्र पाल सिंह, नगरा नवदिया, (बंडा)
राष्टीय कृषि विकास योजना के तहत सरकार ऐसी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहन दे रही है, जिनकी बाजार में अच्छी मांग होने से किसानों को ज्यादा लाभ हो सके। गन्ना के साथ अन्य फसलें लेने से दलहन, तिलहन, सब्जी, मसालों की घरेलू जरूरतें भी पूरी हो जाती है। दलहनी फसलों जैसे मटर, मसूर, चना से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। बृहस्पतिवार को किसान दिवस पर कृषि में नवाचार का प्रयोग करने में सफल रहे किसानों को सम्मानित किया जाएगा।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
विज्ञापन
लगभग 4.50 लाख किसानों वाले जनपद में करीब एक लाख किसान गन्ना की खेती कर रहे हैं। गन्ना की उपज लेने वाले किसानों को कई कारणों से सहफसली खेती भाने लगी है। हालांकि, अभी बमुश्किल दस हजार गन्ना किसान करीब 8000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में शरदकालीन गन्ना के साथ तोरिया, मटर, मसूर, चना, आलू, गोभी, लहसुन, धनिया, पालक, गेहूं, मूली आदि फसलें उगा रहे हैं। चूंकि, गन्ने के साथ आलू की फसल अधिक लाभकारी सिद्ध हो रही है और प्रति हेक्टेयर 250 से 300 क्विंटल आलू की पैदावार हो जाती है। इसलिए अन्य किसानों का भी इस ओर रुझान बढ़ा है। यही नहीं, औद्यानिक खेती के तौर पर जैतीपुर क्षेत्र में केला और कटरा-खुदागंज क्षेत्र में शिमला मिर्च, ब्रोकली आदि सब्जियों का रकबा भी बढ़ रहा है।
विज्ञापन
किसानों की बात
मैने सिंगल बड से ट्रेंच विधि से गन्ने की बुआई की है। इससे गन्ना की दो लाइनों के बीच में अन्य फसलों के लिए काफी जगह मिल गई है। गन्ना के बीच दो लाइनों में आलू की बुआई की है। कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव पर गन्ने को पेयर्ड रो तकनीक से बोया है और दो लाइनों के बीच एक लाइन में मटर बोई है। इस तरह गन्ने के साथ मुझे दो अतिरिक्त फसलें मिल रही हैं।
विज्ञापन
-हरमेज सिंह, पड़री खमरिया (बंडा)
पहले सिर्फ गन्ना की उपज मिलती थी, लेकिन इस बार पांच एकड़ खेत में गन्ना के साथ लाही, आलू, चना, मटर और धनियां भी उगाई है। लाही का रकबा ज्यादा रखा है ताकि सरसों के तेल की घरेलू जरूरत पूरी होने के साथ अतिरिक्त आय हो सके। कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों के सुझाव पर अमल करने से अब एक साथ कई फसलें मिलने से खेती से कमाई बढ़ गई है।
-रामपाल शुक्ला, नरायनपुर गंगा (बंडा)
मैने गन्ना के साथ मिर्च, टमाटर, मटर, चना और पपीता लगाया है। इस प्रकार गन्ना के साथ एक ही खेत में खाली जगह पर अन्य फसलों को बोकर मुझे खेती से अधिक लाभ मिलने लगा है। सहफसली खेती से पानी की बचत होने लगी है और खेत में सीमित नमी से खरपतवारों का प्रकोप भी कम हो गया है। बाजार में पपीता का अच्छा भाव मिलने की उम्मीद है।
-मुनेंद्र पाल सिंह, नगरा नवदिया, (बंडा)
राष्टीय कृषि विकास योजना के तहत सरकार ऐसी फसलों के उत्पादन को प्रोत्साहन दे रही है, जिनकी बाजार में अच्छी मांग होने से किसानों को ज्यादा लाभ हो सके। गन्ना के साथ अन्य फसलें लेने से दलहन, तिलहन, सब्जी, मसालों की घरेलू जरूरतें भी पूरी हो जाती है। दलहनी फसलों जैसे मटर, मसूर, चना से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। बृहस्पतिवार को किसान दिवस पर कृषि में नवाचार का प्रयोग करने में सफल रहे किसानों को सम्मानित किया जाएगा।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी

रामपाल शुक्ला।- फोटो : SHAHJAHANPUR

मुनेंद्र पाल सिंह।- फोटो : SHAHJAHANPUR