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राष्ट्रीय स्तर पर मतभेदों के बावजूद जारी रहेंगे किसान आंदोलन

Tue, 17 May 2022 12:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 17 May 2022 12:23 AM IST
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Farmers' agitation will continue despite differences
शाहजहांपुर। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) में राष्ट्रीय स्तर पर उभरे मतभेदों को लेकर जिले में सक्रिय किसान संगठनों के पदाधिकारी पैनी नजर बनाए हैं। हालांकि, टिकैत गुट समेत अन्य संगठनों के किसान नेताओं का कहना है कि टिकैत समर्थक गुटबाजी में बंटे तो उसी अनुपात में अन्य किसान संगठन मजबूत होंगे और किसान हित के मुद्दों को लेकर उनके आंदोलन भी जारी रहेंगे।
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भाकियू टिकैत गुट के मंडल अध्यक्ष सरदार अजीत सिंह का कहना है कि सरकार किसान संगठनों को तोड़कर किसानों के आंदोलन को कमजोर करना चाहती है, लेकिन उसका यह मंसूबा पूरा नहीं होगा। संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर कुछ लोग हैं, जिन्हेें सरकार अपने स्वार्थ के लिए पुचकार रही है और वही लोग मतभेदों को हवा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि यूनियन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह चौहान ने कई बार फोन कर दबाव बनाया कि वह उन्हें अपना आशीर्वाद दें। लखनऊ के किसान नेता हरनाम वर्मा भी इसी दिशा में प्रयासशील हैं।
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भाकियू नेता अजीत सिंह के अनुसार यह सभी आगे भी जोर लगाएंगे, लेकिन उनसे साफ कह दिया है कि उनकी स्व्यं की और इकाई के अन्य पदाधिकारियों की टिकैत परिवार में पूरी आस्था है और इसी परिवार के नेतृत्व में आगे भी किसानों की लड़ाई जारी रखेंगे। भारतीय किसान मजदूर यूनियन (राष्ट्रीयतावादी) के जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव का कहना है कि अगर टिकैत गुट कमजोर पड़ा तो अन्य किसान संगठन मजबूत होंगे क्योंकि किसानों की लड़ाई लड़ने वाले अपनी मुहिम आगे भी जारी रखेंगे और इससे किसान आंदोलन पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।
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भाकियू भानु गुट के जिला उपाध्यक्ष फौजी श्याम किशोर अग्निहोत्री का कहना है कि हमें सरकार के साथ मिलकर काम करना है, लेकिन प्रशासन सरकार की मंशा से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के किसान आंदोलन में उनका संगठन साथ रहा, लेकिन लाल किले पर धावा बोलने जैसी अनुशासनहीनता से क्षुब्ध होकर संगठन को इस आंदोलन से दूरी बनानी पड़ी। भाकियू राष्ट्रवादी गुट के जिलाध्यक्ष नरेंद्र यादव के अनुसार सरकार से हमारी जन्मजात बुराई नहीं है और सरकार भी किसी को अकारण नाराज नहीं करना चाहती। इसलिए किसी संगठन में टूट-फूट का आरोप सरकार पर लगाना ठीक नहीं होगा। किसानों के हित का कोई बड़ा आंदोलन होगा तो सभी संगठन साथ खड़े दिखाई देंगे।
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