Shahjahanpur: फसल बर्बाद होने से बेटी की शादी को लेकर परेशान किसान ने दी जान, परिवार में मचा कोहराम
खेती में घाटा होने और बेटी की शादी को लेकर परेशान किसान ने आत्महत्या कर ली। किसान छुट्टा पशुओं से फसल की रखवाली करने गया था। देर रात किसान का शव पेड़ पर फंदे से लटका मिला।
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शाहजहांपुर के खुटार क्षेत्र में बेटी की शादी के लिए रकम न जुटा पाने से परेशान गांव रजमना के किसान महानंद कुशवाहा (50) ने खेत पर पेड़ से फंदा लगाकर जान दे दी। दो साल से फसल में नुकसान होने और बैंक का कर्ज बढ़ने से महानंद के सामने बेटी के हाथ पीले करने को लेकर चिंतित थे। सूचना पर पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
महानंद रविवार शाम खेत पर गेहूं की फसल की छुट्टा पशुओं से रखवाली करने के लिए गए थे। देर रात तक घर न लौटने पर परिवार के लोगों को चिंता हुई। तलाश करने पर महानंद का शव खेत से कुछ दूर गांव ढकना मलिका संपर्क मार्ग किनारे पेड़ से रस्सी के फंदे से लटकता मिला। परिजनों ने रात में ही पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने महानंद के शव को फंदे से नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया।
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महानंद की मौत से पिता रामकृष्ण, पत्नी मनोरमा देवी, पुत्री 23 वर्षीय बबली, 21 वर्षीय सुरभि, 18 वर्षीय रोजी, 16 वर्षीय पुत्र दीपेंद्र कुमार का रो-रोकर बुरा हाल है। थाना प्रभारी ओमप्रकाश ने बताया कि महानंद ने आत्महत्या की है। आत्महत्या के कारणों की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और परिजनों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चार बेटियों की कर चुके थे शादी
महानंद कुशवाहा के सात पुत्रियां और एक पुत्र दीपेंद्र है। महानंद चार पुत्रियों की शादी कर चुके हैं। कुछ दिन पूर्व उन्होंने 23 वर्षीय पुत्री बबली की शादी पीलीभीत के थाना पूरनपुर के गांव सिरसा में तय की थी। दीपेंद्र के अनुसार पिता के पास छह एकड़ जमीन है। लागत की व्यवस्था न हो पाने के कारण वह चार एकड़ जमीन हर वर्ष ठेके पर दे देते थे।
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दो एकड़ जमीन पर खुद खेती करते थे, लेकिन दो वर्ष से फसल में छुट्टा पशुओं और मौसम की मार से खासा नुकसान हो रहा था। खुटार के एक बैंक का 2.80 लाख रुपये का कर्ज भी पिता पर था। बबली की शादी तय हो जाने के बाद पैसे की व्यवस्था न हो पाने से तीन माह से उनके पिता परेशान थे। अक्सर कहते थे, जो भगवान करेगा, वही होगा।
कैसे पीले होंगे बेटियों के हाथ
महानंद की मौत से पत्नी मनोरमा देवी बदहवास हैं। वह रोते-रोते कई बार गश खाकर गिर पड़ीं और होश आने पर एक ही बात कह रही थीं कि वह अपनी बेटियों के हाथ कैसे पीले कर पाएंगी। उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
गांव के लोग और रिश्तेदार उनको संभालने में लगे हैं। गांव की प्रधान स्नहेलता शुक्ला ने बताया कि महानंद के परिवार के लोग उनके अवसाद में रहने की बात बता रहे हैं। परिवार को आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। कृषक दुर्घटना योजना का भी लाभ दिया जाना चाहिए।