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Shahjahanpur News: आयुष्मान योजना में भुगतान की देरी व कठिन शर्तें बढ़ा रहीं मरीजों का दर्द
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डॉ.पवन अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष-आईएमए।
शाहजहांपुर। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना का लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। मानक और शर्तों के फेर के चलते हृदय, सिजेरियन और सामान्य प्रसव के मरीजों का उपचार करने के बजाय रेफर किया जा रहा है। योजना में अब तक 1,19,482 लोगों का उपचार किया गया है। देरी से भुगतान आने और कई तरह की शर्तें लागू होने से डॉक्टर भी आयुष्मान में उपचार करने में कतराते हैं।
सितंबर 2018 को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले में 12 लाख 70 हजार 293 लोगों के कार्ड बनाए जाने थे। पांच लाख तक का उपचार निशुल्क मिलने के चलते स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाकर लोगों के कार्ड बनाए।
जिले में अब तक 10 लाख 25 हजार 77 लोगों के कार्ड ही बन पाए हैं। शेष के कार्ड आधार कार्ड में नाम, पिता का नाम गलत होने के चलते नहीं बन पाए हैं। सीएमओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 17 सरकारी समेत 35 अस्पतालों में योजना के तहत एक लाख 19 हजार 482 लोगों को लाभ दिया गया है।
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योजना के तहत हृदय रोग, कैंसर, घुटना और गुल्ला प्रत्यारोपण समेत सामान्य बीमारी का उपचार देने का प्रावधान है, लेकिन जिले में स्थिति पूरी तरह से उलट है। निजी अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, आयुष्मान कार्ड योजना में सामान्य प्रसव और सिजेरियन को शामिल नहीं किया गया है। इस वजह से मरीजों को निजी अस्पताल से सरकारी अस्पताल भेज दिया जाता है।
इसी तरह निजी अस्पताल में हृदय रोग के उपचार में कैथ का सिस्टम होने पर उपचार मिल सकता है। दो करोड़ रुपये के कैथ का सेटअप किसी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। इसके चलते मरीजों को बरेली या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। योजना में डायलिसिस की व्यवस्था भी नहीं दी गई।
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राशि कम, साथ ही समय से भुगतान भी नहीं
मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली धनराशि काफी कम है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ.संजीव कनौजिया बताते हैं कि आयुष्मान की राशि मरीजों को कम मिल रही है। अस्पतालों को भी समय से उपलब्ध नहीं हो पाती है। सामान्य प्रसव और सिजेरियन को योजना में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में मरीज को लौटाने पर वे उपचार नहीं करने का आरोप लगाते हैं।
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मामला एक
निजी अस्पताल में डायरिया से पीड़ित मरीज को आयुष्मान कार्ड देखकर भर्ती किया गया। अस्पताल से क्लेम के लिए आवेदन किया तो वहां से सीरम इलेक्टाइटिस की रिपोर्ट मांगी गई। यह काफी महंगी होती है। डॉक्टर के अनुसार, योजना के तहत प्रतिदिन 18 सौ रुपये मिलते हैं। डॉक्टर, बेड, दवा के साथ टेस्ट भी अस्पताल से कराने के लिए कहा गया। इस पर डॉक्टर ने आपत्ति जताई है।
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मामला दो
तारीन जलालनगर की महिला को प्रसव पीड़ा होने पर आयुष्मान कार्ड पर उपचार की आस लेकर परिजन निजी अस्पताल में पहुंचे। यहां डॉक्टर ने महिला को ऑपरेशन करने की बात कहते हुए रुपये जमा करने की बात कही। कार्ड दिखाने पर सिजेरियन करने से इन्कार कर दिया। इसके चलते मरीज को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
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17 सरकारी समेत 35 अस्पतालों में है उपचार की व्यवस्था
15 सीएचसी, जिला महिला अस्पताल, ऑटोनोमोस राज्य मेडिकल कॉलेज, शीला हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर, कमला हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर, ऑक्सीएंट हॉस्पिटल, निपुण हॉस्पिटल, तारा आई क्लीनिक, श्री गुरुनानक हॉस्पिटल, गौतम अस्पताल, अर्नव सर्जिकल अस्पताल, एचसी मेमोरियल अस्पताल, सीतापुर आई अस्पताल, बेग अस्पताल, सुमन लता संतनपाल सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड अस्पताल, सूद आई क्लीनिक, डॉ.वसीम अस्पताल, डॉ. सत्यानंद अस्पताल प्राइवेट लिमिटेड, गुरुनानक अस्पताल, जगमोहन लाल आई एंंड ईएनटी क्लीनिक, रुहेलखंड अस्पताल।
-- भुगतान काफी समय से नहीं आया है। मार्च में धनराशि के आने की संभावना है। समय से भुगतान नहीं आने के बाद भी मरीजों का आयुष्मान कार्ड पर भुगतान कर रहे हैं। शर्तें काफी कठिन हैं। उनके मानक पूरे करना मुश्किल है। रुपये भी कम हैं। क्लेम भी काट-छांट कर दिया जाता है।
- डॉ.पवन अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष-इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
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आयुष्मान योजना के लंबित भुगतान को लेकर शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। शेष बचे आयुष्मान कार्ड भी बनाने के लिए अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए ब्लॉकवार सूची बनाई गई है। जल्द ही बेहतर नतीजे सामने आएंगे।
- डॉ.विवेक मिश्रा, सीएमओ
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सितंबर 2018 को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले में 12 लाख 70 हजार 293 लोगों के कार्ड बनाए जाने थे। पांच लाख तक का उपचार निशुल्क मिलने के चलते स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाकर लोगों के कार्ड बनाए।
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जिले में अब तक 10 लाख 25 हजार 77 लोगों के कार्ड ही बन पाए हैं। शेष के कार्ड आधार कार्ड में नाम, पिता का नाम गलत होने के चलते नहीं बन पाए हैं। सीएमओ कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, 17 सरकारी समेत 35 अस्पतालों में योजना के तहत एक लाख 19 हजार 482 लोगों को लाभ दिया गया है।
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योजना के तहत हृदय रोग, कैंसर, घुटना और गुल्ला प्रत्यारोपण समेत सामान्य बीमारी का उपचार देने का प्रावधान है, लेकिन जिले में स्थिति पूरी तरह से उलट है। निजी अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, आयुष्मान कार्ड योजना में सामान्य प्रसव और सिजेरियन को शामिल नहीं किया गया है। इस वजह से मरीजों को निजी अस्पताल से सरकारी अस्पताल भेज दिया जाता है।
इसी तरह निजी अस्पताल में हृदय रोग के उपचार में कैथ का सिस्टम होने पर उपचार मिल सकता है। दो करोड़ रुपये के कैथ का सेटअप किसी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। इसके चलते मरीजों को बरेली या लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। योजना में डायलिसिस की व्यवस्था भी नहीं दी गई।
राशि कम, साथ ही समय से भुगतान भी नहीं
मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली धनराशि काफी कम है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ.संजीव कनौजिया बताते हैं कि आयुष्मान की राशि मरीजों को कम मिल रही है। अस्पतालों को भी समय से उपलब्ध नहीं हो पाती है। सामान्य प्रसव और सिजेरियन को योजना में शामिल नहीं किया गया है। ऐसे में मरीज को लौटाने पर वे उपचार नहीं करने का आरोप लगाते हैं।
मामला एक
निजी अस्पताल में डायरिया से पीड़ित मरीज को आयुष्मान कार्ड देखकर भर्ती किया गया। अस्पताल से क्लेम के लिए आवेदन किया तो वहां से सीरम इलेक्टाइटिस की रिपोर्ट मांगी गई। यह काफी महंगी होती है। डॉक्टर के अनुसार, योजना के तहत प्रतिदिन 18 सौ रुपये मिलते हैं। डॉक्टर, बेड, दवा के साथ टेस्ट भी अस्पताल से कराने के लिए कहा गया। इस पर डॉक्टर ने आपत्ति जताई है।
मामला दो
तारीन जलालनगर की महिला को प्रसव पीड़ा होने पर आयुष्मान कार्ड पर उपचार की आस लेकर परिजन निजी अस्पताल में पहुंचे। यहां डॉक्टर ने महिला को ऑपरेशन करने की बात कहते हुए रुपये जमा करने की बात कही। कार्ड दिखाने पर सिजेरियन करने से इन्कार कर दिया। इसके चलते मरीज को राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
17 सरकारी समेत 35 अस्पतालों में है उपचार की व्यवस्था
15 सीएचसी, जिला महिला अस्पताल, ऑटोनोमोस राज्य मेडिकल कॉलेज, शीला हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर, कमला हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर, ऑक्सीएंट हॉस्पिटल, निपुण हॉस्पिटल, तारा आई क्लीनिक, श्री गुरुनानक हॉस्पिटल, गौतम अस्पताल, अर्नव सर्जिकल अस्पताल, एचसी मेमोरियल अस्पताल, सीतापुर आई अस्पताल, बेग अस्पताल, सुमन लता संतनपाल सिंह इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड अस्पताल, सूद आई क्लीनिक, डॉ.वसीम अस्पताल, डॉ. सत्यानंद अस्पताल प्राइवेट लिमिटेड, गुरुनानक अस्पताल, जगमोहन लाल आई एंंड ईएनटी क्लीनिक, रुहेलखंड अस्पताल।
- डॉ.पवन अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष-इंडियन मेडिकल एसोसिएशन
आयुष्मान योजना के लंबित भुगतान को लेकर शासन स्तर पर पत्राचार किया गया है। शेष बचे आयुष्मान कार्ड भी बनाने के लिए अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए ब्लॉकवार सूची बनाई गई है। जल्द ही बेहतर नतीजे सामने आएंगे।
- डॉ.विवेक मिश्रा, सीएमओ

डॉ.पवन अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष-आईएमए।

डॉ.पवन अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष-आईएमए।