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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Dasharatha breathed his last at OCF and Sita placed the garland around Shri Ram's neck at Khirnibagh.

Shahjahanpur News: ओसीएफ में दशरथ ने प्राण त्यागे और खिरनीबाग में सीताजी ने श्रीराम के गले में डाली वरमाला

Fri, 26 Sep 2025 04:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 26 Sep 2025 04:01 AM IST
सार

शाहजहांपुर, कुर्रियाकलां और मिर्जापुर में रामलीला मंचनों व श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन हुए। राम-केवट संवाद, दशरथ वियोग, असुर संहार और पुष्प वाटिका प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। आयोजनों में स्थानीय समितियों का सहयोग रहा।

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Dasharatha breathed his last at OCF and Sita placed the garland around Shri Ram's neck at Khirnibagh.
मिर्जापुर में कथा सुनाते गोपाल शास्त्री। स्रोत: आयोजक - फोटो : samvad

विस्तार

‎शाहजहांपुर। ओसीएफ रामलीला में बृहस्पतिवार को केवट द्वारा भगवान श्रीराम, सीता जी और लक्ष्मण को गंगा पार कराने व दशरथ के प्राण त्यागने की लीला का मंचन किया गया। वहीं खिरनीबाग में श्रीराम विवाह की लीला का मंचन हुआ।
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ओसीएफ रामलीला में श्रीराम, सीताजी और लक्ष्मण वनगमन करते हुए गंगा तट पर पहुंचे। वहां केवट ने प्रभु को पार उतारने की विनती की। श्रीराम ने उसकी भक्ति स्वीकार की और गंगा पार की। उधर अयोध्या में सुमंत ने महाराज दशरथ को श्रीराम के वनगमन की व्यथा सुनाई।
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श्रीराम के वियोग में महाराज दशरथ ने प्राण त्याग दिए। मंचन की व्यवस्था में मेला महासचिव ऋषि बाबू, मेला सचिव राममोहन अग्निहोत्री, हरिशंकर, सचिव देवेश दीक्षित आदि का सहयोग रहा।
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खिरनीबाग रामलीला में नवचेतना कलाकार परिषद के कलाकारों ने लीला की शुरुआत गुरु विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण के रंगशाला में प्रवेश से हुई। जहां राजाओं की उपस्थिति ने माहौल को रोमांचित कर दिया।
रावण और बाणासुर के संवाद ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से सबका ध्यान खींचा। श्रीराम द्वारा धनुष तोड़ने के अद्वितीय दृश्य ने माहौल को जीवंत कर दिया। इसके बाद परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखा संवाद हुआ। धनुष यज्ञ के बाद सीताजी ने श्रीराम के गले में माला पहनाई और मंगल गीत गाए गए।

मंचन के बीच में दीपक शर्मा, मनीष अग्रवाल, अनूप चतुर्वेदी, अरुण कुमार मुन्ना पांडे, अवनीश शर्मा, नमित दीक्षित ने परिवार समेत देव स्वरूपों के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
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श्रीराम और लक्ष्मण ने असुरों का किया संहार, हुई जय-जयकार
कुर्रियाकलां। चौहनापुर गांव की रामलीला में बृहस्पतिवार को विश्वामित्र के यज्ञ की भगवान श्रीराम और लक्ष्मण द्वारा रक्षा किए जाने का मंचन किया। कलाकारों ने दर्शाया कि विश्वामित्र के सिद्ध आश्रम में हो रहे यज्ञ में विघ्न डालने के लिए मारीच और सुबाहु जैसे असुर आए, किंतु श्रीराम और लक्ष्मण ने अपने पराक्रम से उन्हें परास्त कर दिया। युद्ध में सुबाहु मारा गया और मारीच को समुद्र में फेंक दिया गया। इस प्रकार श्रीराम और लक्ष्मण ने विश्वामित्र के यज्ञ की सफलतापूर्वक रक्षा की। असुरों का संहार होते देख दर्शक भी रोमांचित होकर भगवान की जय-जयकार करने लगे। मंचन में ऋषभ, सूरज,सचिन और शिवम ने क्रमानुसार श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का किरदार निभाया। व्यवस्था में मंचन प्रभारी संजय सिंह, संयोजक रामू मिश्र, रामकुमार सिंह, सतीश पांडेय, नन्हे लाल अवस्थी, रवि त्रिपाठी,केशव मिश्रा आदि का सहयोग रहा। संवाद

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श्रीराम-केवट का संवाद सुनकर द्रवित हो उठे श्रद्धालु
खुदागंज। श्री आदर्श रामलीला कमेटी की ओर से मेला मैदान पर आयोजित रामलीला में बृहस्पतिवार को कलाकाराें ने श्रीराम-केवट के बीच हुए संवाद का मंचन कर दर्शकों को द्रवित कर दिया। मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम के वन जाने के बाद अयोध्या वासी बहुत ही दुखी हुए। वह नदी पार करने के लिए केवट से नाव मांगते हैं।
केवट ने यह कहकर नाव देने से मना कर दिया कि उनके पैर की धूल लगने से पत्थर नारी में बदल गया। यदि नाव भी औरत बन गई तो उसे जीविका का संकट हो जाएगा। तत्पश्चात केवट ने प्रभु श्रीराम के पांव पखारने के बाद ही उन्हें नाव पर बैठाया। व्यवस्था के लिए मेला कमेटी संरक्षक और नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष सुधीर सिंह, कृष्ण कुमार सक्सेना, राम लड़ैते सिंह, मुन्नू सिंह, बालिस्टर सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
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पुष्प वाटिका में श्रीराम-सीता के मिलन का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु हुए भाव विभोर
मिर्जापुर। दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को कथा व्यास पंडित गोपाल शास्त्री ने श्रीराम-सीता के पुष्प वाटिका में मिलन का मनोहारी प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।
कथा व्यास ने कहा कि सीताजी के स्वयंवर में राजा जनक के बुलावे पर विश्वामित्र अपने साथ शिष्यों श्रीराम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला नगरी पहुंचे। वहां रात्रि विश्राम के पश्चात दोनों भाई अगले दिन प्रात: गुरु जी की पूजा के लिए फूल लेने पुष्प वाटिका गए।
जब भगवान पुष्प चुन रहे थे कि तभी सखियों के साथ सीता जी का पुष्प वाटिका में आगमन हुआ। उनकी एक सखी श्रीराम का रूप लावण्य देखकर वशीभूत हो गई और भागती हुई सीताजी के पास पहुंची। सखी ने उनसे उपवन में देखे गए सुंदर पुरुष का वर्णन किया।

इस पर जानकीजी भी प्रभु श्रीराम को देखने को तत्पर हो गईं। सीता जी के नूपुरों की मधुर ध्वनि ने श्रीराम के हृदय में भी हलचल उत्पन्न कर दी। कथा के समापन पर आरती के बाद प्रसाद वितरण हुआ। व्यवस्था में बड़े कश्यप, राकेश कुमार, रहीस बाबा, जय सिंह, जगपाल, मोरपाल आदि का सहयोग रहा। संवाद

मिर्जापुर में कथा सुनाते गोपाल शास्त्री। स्रोत: आयोजक

मिर्जापुर में कथा सुनाते गोपाल शास्त्री। स्रोत: आयोजक- फोटो : samvad

मिर्जापुर में कथा सुनाते गोपाल शास्त्री। स्रोत: आयोजक

मिर्जापुर में कथा सुनाते गोपाल शास्त्री। स्रोत: आयोजक- फोटो : samvad

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