{"_id":"57cdaf0d4f1c1b305e31741d","slug":"the-first-attack-on-sonu-there-was-also-injured-in-raman","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोनू पर पहला हमला करने में रमन भी हुई थी चोटिल ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
सोनू पर पहला हमला करने में रमन भी हुई थी चोटिल
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Mon, 05 Sep 2016 11:19 PM IST
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बंडा थाना क्षेत्र के गांव बसंतापुर निवासी एनआरआई सुखजीत सिंह उर्फ सोनू की हत्या से पहले बीती 22 अगस्त की रात कार से गांव लौटने के दौरान गांव उदना के पास पेट्रोल पंप के निकट ही एनआरआई दंपति आपस में उलझे थे। सुखजीत को छोड़ने के बाद वापसी के दौरान रात में रमनदीप कौर ने उसी स्पॉट पर सोनू पर धारदार हथियार से हमला बोला था। उस हमले में पति को शरीर के ऊपरी हिस्से में तीन स्थानों पर चोटें आईं थीं, तो रमन का बांह भी कटा था और वह भी चोटिल हुई थी, लेकिन उस घटना के बारे में दोनों ने ही परिवारवालों को अज्ञात लोगों द्वारा हमले की कहानी बताई, जिसे सुनकर मां वंश कौर ने सुरक्षित आवाजाही के लिए तत्काल 10 लाख रुपये खर्च कर नई स्कार्पियो खरीदकर दी थी।
दोनों के बीच झड़प और लड़ाई इतनी बदहवासी में हुई कि उनके आपसी धक्कामुक्की एवं एक-दूसरे पर काबू करने के चक्कर में कार का शीशा तक टूट गया था। छह फुटा बलिष्ठ पति पर हमला कर मौत के घाट उतारने की योजना तब नाकाम हो गई थी। तब उसने दुबई जाने के लिए दिल्ली को रवाना हुए पति के दोस्त मिट्ठू से मोबाइल पर अकेले में संपर्क किया और उस पर तब तक दुबई न जाने का दबाव बनाया जबतक कि सोनू का काम तमाम नहीं हो जाता है। हामी न भरने पर रमन ने खुदकुशी कर लेने की धमकी दी तो उसने दुबई जाने की योजना को थोड़े समय के टाला था।
सोनू को अपने साथ गलत होने की आशंका हो चली थी और इसी कारण वह मुख्य और ऊपरी मंजिल का दरवाजा भीतर से लॉक करके सोने लगा था। एक और दो सितंबर की रात भी उसने ऐसा ही किया था। जालीदार कमरे में सोनू सोया था, जबकि बच्चे बंद कमरे में। इस पूरे तथ्य से शाहजहांपुर पुलिस ने ब्रिटिश कांसुलेट को भी अवगत कराया था। साथ ही दोनों आरोपियों के काल डिटेल और सर्विलांस पर उनके लगातार मिली लोकेशन संबंधी जानकारी भी कांसुलेट को मुहैया करा दी गई।
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एसपी डॉ. मनोज कुमार ने इस आशंका को सिरे से खारिज किया कि कातिलों की संख्या ज्यादा रही होगी। उन्होंने बताया कि सब कुछ साफ और पुष्ट हो चुका है। कत्ल करने वाले दोनों के अलावा मौके पर मिट्ठू को लेकर जाने वाला किराए का ड्राइवर भी था, लेकिन वह कार में ही था।
नशा नहीं करता था सुखजीत
पुवायां। साले को पुत्र की तरह पाल पोस कर बड़ा करने वाले इंग्लैंड के डर्बीशायर में रहने वाले मृत सुखजीत के बहनोई कुलदीप सिंह टुरना और बहन कुलविंदर कौर ने बताया कि रमनदीप कौर सुखजीत पर ड्रग लेने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाकर लोगों की सहानुभूति हासिल करना चाह रही है, जबकि उसने कभी नशा ही नहीं किया। वह डर्बीशायर की गुरुद्वारा कमेटी में सदस्य था। सीधा सादा सुखजीत लगातार धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेता रहता था।
सुखजीत को 26 वर्ष तक पुत्र की तरह पाला
पुवायां। पिता की मौत के बाद सुखजीत को बहन कुलविंदर कौर और बहनोई कुलदीप सिंह के पास इंग्लैंड के डर्बीशायर भेज दिया गया था। दोनों ने सुखजीत को पुत्रवत पाला और उसे उच्च शिक्षा दिलाने के साथ ही काम आदि दिलाने में भी पूरा सहयोग किया। सुखजीत की हत्या की जानकारी पाकर भारत आए बहन-बहनोई को लग रहा है कि उन्होंने अपना सब कुछ खो दिया है। कुलदीप सिंह का कहना है कि उन्होंने सुखजीत को 26 वर्ष तक अपने साथ रखा और पूरा लाड़ प्यार दिया। सुखजीत ने रमनदीप कौर से अपनी मर्जी से शादी की थी। शादी के बाद वह एक वर्ष तक भारत में रहा और बाद में फिर डर्बी आकर रहने लगा। शादी के बाद दुबई में मिट्ठू से याराना बढ़ा तो उन्होंने सुखजीत को समझाया भी था, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। एक वर्ष पूर्व से रमनदीप और मिट्ठू के बीच नजदीकियां ज्यादा ही बढ़ गई थीं, इसका अंजाम सुखजीत की मौत के रूप में सामने आया।
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दोनों के बीच झड़प और लड़ाई इतनी बदहवासी में हुई कि उनके आपसी धक्कामुक्की एवं एक-दूसरे पर काबू करने के चक्कर में कार का शीशा तक टूट गया था। छह फुटा बलिष्ठ पति पर हमला कर मौत के घाट उतारने की योजना तब नाकाम हो गई थी। तब उसने दुबई जाने के लिए दिल्ली को रवाना हुए पति के दोस्त मिट्ठू से मोबाइल पर अकेले में संपर्क किया और उस पर तब तक दुबई न जाने का दबाव बनाया जबतक कि सोनू का काम तमाम नहीं हो जाता है। हामी न भरने पर रमन ने खुदकुशी कर लेने की धमकी दी तो उसने दुबई जाने की योजना को थोड़े समय के टाला था।
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सोनू को अपने साथ गलत होने की आशंका हो चली थी और इसी कारण वह मुख्य और ऊपरी मंजिल का दरवाजा भीतर से लॉक करके सोने लगा था। एक और दो सितंबर की रात भी उसने ऐसा ही किया था। जालीदार कमरे में सोनू सोया था, जबकि बच्चे बंद कमरे में। इस पूरे तथ्य से शाहजहांपुर पुलिस ने ब्रिटिश कांसुलेट को भी अवगत कराया था। साथ ही दोनों आरोपियों के काल डिटेल और सर्विलांस पर उनके लगातार मिली लोकेशन संबंधी जानकारी भी कांसुलेट को मुहैया करा दी गई।
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एसपी डॉ. मनोज कुमार ने इस आशंका को सिरे से खारिज किया कि कातिलों की संख्या ज्यादा रही होगी। उन्होंने बताया कि सब कुछ साफ और पुष्ट हो चुका है। कत्ल करने वाले दोनों के अलावा मौके पर मिट्ठू को लेकर जाने वाला किराए का ड्राइवर भी था, लेकिन वह कार में ही था।
नशा नहीं करता था सुखजीत
पुवायां। साले को पुत्र की तरह पाल पोस कर बड़ा करने वाले इंग्लैंड के डर्बीशायर में रहने वाले मृत सुखजीत के बहनोई कुलदीप सिंह टुरना और बहन कुलविंदर कौर ने बताया कि रमनदीप कौर सुखजीत पर ड्रग लेने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाकर लोगों की सहानुभूति हासिल करना चाह रही है, जबकि उसने कभी नशा ही नहीं किया। वह डर्बीशायर की गुरुद्वारा कमेटी में सदस्य था। सीधा सादा सुखजीत लगातार धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेता रहता था।
सुखजीत को 26 वर्ष तक पुत्र की तरह पाला
पुवायां। पिता की मौत के बाद सुखजीत को बहन कुलविंदर कौर और बहनोई कुलदीप सिंह के पास इंग्लैंड के डर्बीशायर भेज दिया गया था। दोनों ने सुखजीत को पुत्रवत पाला और उसे उच्च शिक्षा दिलाने के साथ ही काम आदि दिलाने में भी पूरा सहयोग किया। सुखजीत की हत्या की जानकारी पाकर भारत आए बहन-बहनोई को लग रहा है कि उन्होंने अपना सब कुछ खो दिया है। कुलदीप सिंह का कहना है कि उन्होंने सुखजीत को 26 वर्ष तक अपने साथ रखा और पूरा लाड़ प्यार दिया। सुखजीत ने रमनदीप कौर से अपनी मर्जी से शादी की थी। शादी के बाद वह एक वर्ष तक भारत में रहा और बाद में फिर डर्बी आकर रहने लगा। शादी के बाद दुबई में मिट्ठू से याराना बढ़ा तो उन्होंने सुखजीत को समझाया भी था, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। एक वर्ष पूर्व से रमनदीप और मिट्ठू के बीच नजदीकियां ज्यादा ही बढ़ गई थीं, इसका अंजाम सुखजीत की मौत के रूप में सामने आया।