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वकीलों की हड़ताल से जेल पर बढ़ेगा भार
शाहजहांपुर
Updated Thu, 12 Mar 2015 12:27 AM IST
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इलाहाबाद में हुई घटना से आक्रोशित शाहजहांपुर के वकीलों ने बृहस्पतिवार से हड़ताल की घोषणा कर दी है। हड़ताल के चलते अदालतों में न केवल कामकाज ठप रहेगा, वहीं सबसे ज्यादा असर जेल पर पड़ेगा। जेल में पहले से ही क्षमता से तीन गुना अधिक बंदी हैं। जेल में रोजना 10 से 15 बंदी पहुंचते हैं और करीब 10 से 12 बंदियों की रोजाना जमानत होती है। वकीलों की हड़ताल से जमानत का काम रुक जाएगा। जिससे जेल में बंदियों की संख्या बढ़ जाएगी।
जिला जेल की 511 बंदियों की क्षमता है। वर्तमान में जेल में क्षमता से तीन गुना अधिक 1522 बंदी हैं। जेल में बंदियों की संख्या अधिक होने से जेल प्रशासन पहले से ही दिक्कत झेल रहा है। जेल से रोजना 10 से 12 बंदियों की जमानत होती है, जबकि 10 से 15 लोगों को बंद किया जाता है। वकीलों की हड़ताल होने से जमानत का काम तो रुक जाएगा, लेकिन बंदियों की संख्या बढ़ती जाएगी। ऐसे में जेल में बंदियों की संख्या में लगातार इजाफा होता जाएगा। बंदियों की संख्या बढ़ने से जेल प्रशासन की मुसीबत बढ़ जाएगी। बंदियों को ठहराने की व्यवस्था, उनके खाने की व्यवस्था और सुरक्षा की व्यवस्था भी मजबूत करनी पड़ेगी।
फरवरी में 10 दिन रही वकीलों की हड़ताल
फरवरी महीने में 24 कार्य दिवसों में 10 दिन वकील हड़ताल पर रहे, जबकि एक दिन शोक की वजह से कार्य नहीं किया। यानी फरवरी में सिर्फ 13 दिन काम हुआ। मार्च के अब तक आठ कार्य दिवसों में दो दिन हड़ताल और एक दिन शोक की वजह से वकीलों ने काम नहीं किया। इस अवधि में दो दिन बार संघ चुनाव कार्यक्रम की वजह से वकीलों ने काम नहीं किया।
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असलाह पर पूर्ण प्रतिबंध हो: अमोघ
शाहजहांपुर। इलाहाबाद में हुई घटना के बाद बुधवार को आक्रोशित वकीलों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। पूछने पर बार के अध्यक्ष अमोघ चंद्र दीक्षित ने कहा कि जब कोर्ट में ही वकील सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी कैसे सुरक्षित हो सकता है? उन्होंने कहा कि परिसर में सभी लोगों पर असलाह लाने का प्रतिबंध होना चाहिए, चाहें वह आम आदमी हो या पुलिस हो।
रक्षक द्वारा हमला निंदनीय कृत्य
अधिवक्ता आशीष त्रिपाठी ने कहा कि जिस सुरक्षा एजेंसी को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है अगर वही अपराध और हत्या जैसे घृणित कार्य करेगी तो फिर कोई सुरक्षित नहीं रहेगा। घटना की जितनी निंदा की जाए वह कम है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर की सुरक्षा में लगे लोगों को ही असलाह लाने की अनुमति दी जाये।
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जिला जेल की 511 बंदियों की क्षमता है। वर्तमान में जेल में क्षमता से तीन गुना अधिक 1522 बंदी हैं। जेल में बंदियों की संख्या अधिक होने से जेल प्रशासन पहले से ही दिक्कत झेल रहा है। जेल से रोजना 10 से 12 बंदियों की जमानत होती है, जबकि 10 से 15 लोगों को बंद किया जाता है। वकीलों की हड़ताल होने से जमानत का काम तो रुक जाएगा, लेकिन बंदियों की संख्या बढ़ती जाएगी। ऐसे में जेल में बंदियों की संख्या में लगातार इजाफा होता जाएगा। बंदियों की संख्या बढ़ने से जेल प्रशासन की मुसीबत बढ़ जाएगी। बंदियों को ठहराने की व्यवस्था, उनके खाने की व्यवस्था और सुरक्षा की व्यवस्था भी मजबूत करनी पड़ेगी।
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फरवरी में 10 दिन रही वकीलों की हड़ताल
फरवरी महीने में 24 कार्य दिवसों में 10 दिन वकील हड़ताल पर रहे, जबकि एक दिन शोक की वजह से कार्य नहीं किया। यानी फरवरी में सिर्फ 13 दिन काम हुआ। मार्च के अब तक आठ कार्य दिवसों में दो दिन हड़ताल और एक दिन शोक की वजह से वकीलों ने काम नहीं किया। इस अवधि में दो दिन बार संघ चुनाव कार्यक्रम की वजह से वकीलों ने काम नहीं किया।
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असलाह पर पूर्ण प्रतिबंध हो: अमोघ
शाहजहांपुर। इलाहाबाद में हुई घटना के बाद बुधवार को आक्रोशित वकीलों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया। पूछने पर बार के अध्यक्ष अमोघ चंद्र दीक्षित ने कहा कि जब कोर्ट में ही वकील सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी कैसे सुरक्षित हो सकता है? उन्होंने कहा कि परिसर में सभी लोगों पर असलाह लाने का प्रतिबंध होना चाहिए, चाहें वह आम आदमी हो या पुलिस हो।
रक्षक द्वारा हमला निंदनीय कृत्य
अधिवक्ता आशीष त्रिपाठी ने कहा कि जिस सुरक्षा एजेंसी को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है अगर वही अपराध और हत्या जैसे घृणित कार्य करेगी तो फिर कोई सुरक्षित नहीं रहेगा। घटना की जितनी निंदा की जाए वह कम है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर की सुरक्षा में लगे लोगों को ही असलाह लाने की अनुमति दी जाये।