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कहिलिया यार्ड से 14 लाख के आयरन स्लीपर चोरी
रोजा।
Updated Sat, 07 Feb 2015 11:57 PM IST
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कहिलिया रेलवे यार्ड से करीब 160 आयरन स्लीपर चोरी हो गए हैं। इनकी बाजार में कीमत करीब 14 लाख रुपये बताई गई है। चौकीदार और रेलवे सुरक्षा गार्डों के तैनाती के बाद हुई इस चोरी में रेलकर्मियों की संलिप्तता के संकेत मिले हैं।
बता दें कि आरपीएफ पोस्ट शाहजहांपुर के अधीन रेलवे का कहिलिया यार्ड आता है। यहां रेलवे स्टेशन के पीछेे किमी संख्या 1221 के समीप रेलवे के आयरन स्लीपरों के चट्टे लगे थे। इनकी रखवाली के लिए रतीराम चौकीदार के अलावा आरपीएफ के दो जवानों की ड्यूटी भी लगाई जाती है।
रतीराम ने अधिकारियों को बताया कि आयरन स्लीपर के लगे चट्टो से 160 स्लीपर चोरी हो गए हैं। इसकी पुष्टि शुक्रवार को स्लीपरों की गणना करने के बाद हुई है। इन चट्टे में कितने स्लीपर रखे गए हैं, उसका कोई लेखा-जोखा रेलपथ अनुभाग के पास नहीं है।
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इस मामले में रेलपथ अभियंता और रेलवे सुरक्षा से जुड़े अधिकारी अपना पल्ला झाड़ रहे हैं और घटना के बारे में अनभिज्ञता जता रहे हैं। इससे पूर्व भी सीतापुर ब्रांच लाइन से एक हजार पेंड्रोल क्लिपें और रामप्रसाद बिस्मिल नगर से करीब इतनी ही पेंड्रोल क्लिपें भी चोरी हो चुकी है।
कहिलिया यार्ड से कुछ स्लीपर चोरी हुए हैं। इसकी शिकायत प्रभारी रेलपथ अभियंता को की गई है। आरपीएफ के जवान जांच करने आए हैं, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
- भगवानदीन, रेलपथ पर्यवेक्षक, कहिलिया
स्लीपर चोरी का मामला समझ से परे
रोजा। कहिलिया यार्ड से चोरी हुए स्लीपरों का मामला पुलिस के गले नहीं उतर रहा है। जिस स्थान पर यह स्लीपर लगे हैं वहां आबादी है और रेलकर्मियों के आवास आदि बने हुए हैं। यहां पर आरपीएफ जवानों की तैनाती भी रहती है। बावजूद इसके भारी मात्रा में स्लीपरों का चोरी होना रेलकर्मियों और सुरक्षा एजेंसियों को संदेह के घेरे में लाती है।
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बता दें कि आरपीएफ पोस्ट शाहजहांपुर के अधीन रेलवे का कहिलिया यार्ड आता है। यहां रेलवे स्टेशन के पीछेे किमी संख्या 1221 के समीप रेलवे के आयरन स्लीपरों के चट्टे लगे थे। इनकी रखवाली के लिए रतीराम चौकीदार के अलावा आरपीएफ के दो जवानों की ड्यूटी भी लगाई जाती है।
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रतीराम ने अधिकारियों को बताया कि आयरन स्लीपर के लगे चट्टो से 160 स्लीपर चोरी हो गए हैं। इसकी पुष्टि शुक्रवार को स्लीपरों की गणना करने के बाद हुई है। इन चट्टे में कितने स्लीपर रखे गए हैं, उसका कोई लेखा-जोखा रेलपथ अनुभाग के पास नहीं है।
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इस मामले में रेलपथ अभियंता और रेलवे सुरक्षा से जुड़े अधिकारी अपना पल्ला झाड़ रहे हैं और घटना के बारे में अनभिज्ञता जता रहे हैं। इससे पूर्व भी सीतापुर ब्रांच लाइन से एक हजार पेंड्रोल क्लिपें और रामप्रसाद बिस्मिल नगर से करीब इतनी ही पेंड्रोल क्लिपें भी चोरी हो चुकी है।
कहिलिया यार्ड से कुछ स्लीपर चोरी हुए हैं। इसकी शिकायत प्रभारी रेलपथ अभियंता को की गई है। आरपीएफ के जवान जांच करने आए हैं, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
- भगवानदीन, रेलपथ पर्यवेक्षक, कहिलिया
स्लीपर चोरी का मामला समझ से परे
रोजा। कहिलिया यार्ड से चोरी हुए स्लीपरों का मामला पुलिस के गले नहीं उतर रहा है। जिस स्थान पर यह स्लीपर लगे हैं वहां आबादी है और रेलकर्मियों के आवास आदि बने हुए हैं। यहां पर आरपीएफ जवानों की तैनाती भी रहती है। बावजूद इसके भारी मात्रा में स्लीपरों का चोरी होना रेलकर्मियों और सुरक्षा एजेंसियों को संदेह के घेरे में लाती है।