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डबल मर्डर में सात लोगों को उम्र कैद
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहजहांपुर
Updated Thu, 21 Jul 2016 11:42 PM IST
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सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव तुलापुर में 11 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड में चार परिवारों के सात लोगों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अपर सत्र न्यायाधीश षष्ठम फराह मतलूब ने बृहस्पतिवार को फैसला देते हुए चार अभियुक्तों नरेंद्र देव, रविंद्र देव, राजीव कुमार और धीरेंद्र उर्फ धीरू पर 61-61 हजार रुपये और उमेश उर्फ रज्जन, सुशील कुमार और धनंजय उर्फ बबलू पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माने की रकम से मृतकों के आश्रितों को एक-एक लाख रुपये बतौर क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी।
गांव तुलापुर में रवींद्र कुमार का गांव के ही रविंद्र देव और उसके लड़के धीरेंद्र उर्फ धीरू के साथ करीब दो साल से फौजदारी का मुकदमा चल रहा था। रवींद्र कुमार के लड़के संदीप और सत्यशील सात जून 2005 को मुकदमे की पेशी कर कोर्ट से घर आए थे। नौ जून 2005 की सुबह करीब साढ़े सात बजे रविंद्र देव अपनी लाइसेंसी राइफल, नरेंद्र देव अपनी लाइसेंसी बंदूक एवं डिप्टी राम और उसके बेटे उमेश उर्फ रज्जन और सुशील के अलावा धीरेंद्र उर्फ धीरू और राजीव तमंचे से लैस होकर अपने-अपने मकानों से निकले एवं खेत से अपने घर लौट रहे रवींद्र कुमार के बेटों कुलदीप, सत्यशील और संदीप को गांव के ही उमेश के मकान के सामने घेर लिया एवं कई गोलियां मारीं। कुलदीप की मौके पर ही मौत हो गई। संदीप ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। सत्यशील को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हमलावर राइफल, बंदूक और तमंचा लहराते हुए मौके पर पहुंचे ग्रामीणों को धमकाकर अपने रिश्तेदार बबलू निवासी गांव सबलापुर की मारुति कार में बैठकर भाग निकले।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने हत्या और आईपीसी की अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की और 15 जून 2005 को तीन नामजद आरोपियों को मय असलहा गिरफ्तार कर लिया। जबकि दो को चार जुलाई 2005 को गिरफ्तार किया। एक आरोपी रविंद्र ने कोर्ट में समर्पण किया। एक अन्य नामजद आरोपी डिप्टी राम की लखनऊ पीजीआई में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट और साक्ष्यों के अलावा सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा द्वारा प्रस्तुत आठ गवाहों के बयान एवं बचाव पक्ष का तर्क का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाया।
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गांव तुलापुर में रवींद्र कुमार का गांव के ही रविंद्र देव और उसके लड़के धीरेंद्र उर्फ धीरू के साथ करीब दो साल से फौजदारी का मुकदमा चल रहा था। रवींद्र कुमार के लड़के संदीप और सत्यशील सात जून 2005 को मुकदमे की पेशी कर कोर्ट से घर आए थे। नौ जून 2005 की सुबह करीब साढ़े सात बजे रविंद्र देव अपनी लाइसेंसी राइफल, नरेंद्र देव अपनी लाइसेंसी बंदूक एवं डिप्टी राम और उसके बेटे उमेश उर्फ रज्जन और सुशील के अलावा धीरेंद्र उर्फ धीरू और राजीव तमंचे से लैस होकर अपने-अपने मकानों से निकले एवं खेत से अपने घर लौट रहे रवींद्र कुमार के बेटों कुलदीप, सत्यशील और संदीप को गांव के ही उमेश के मकान के सामने घेर लिया एवं कई गोलियां मारीं। कुलदीप की मौके पर ही मौत हो गई। संदीप ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। सत्यशील को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हमलावर राइफल, बंदूक और तमंचा लहराते हुए मौके पर पहुंचे ग्रामीणों को धमकाकर अपने रिश्तेदार बबलू निवासी गांव सबलापुर की मारुति कार में बैठकर भाग निकले।
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सूचना पर पहुंची पुलिस ने हत्या और आईपीसी की अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की और 15 जून 2005 को तीन नामजद आरोपियों को मय असलहा गिरफ्तार कर लिया। जबकि दो को चार जुलाई 2005 को गिरफ्तार किया। एक आरोपी रविंद्र ने कोर्ट में समर्पण किया। एक अन्य नामजद आरोपी डिप्टी राम की लखनऊ पीजीआई में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट और साक्ष्यों के अलावा सरकारी वकील मनफूल सिंह वर्मा द्वारा प्रस्तुत आठ गवाहों के बयान एवं बचाव पक्ष का तर्क का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाया।
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